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स्वतंत्र पत्रकारों की सुरक्षा और पहचान: सरकारी मान्यता की सीमा तथा मीडिया परिषद का विमर्श

जंतर-मंतर घटनाओं और डिजिटल पत्रकारिता की पृष्ठभूमि में प्रेस स्वतंत्रता, पेशेवर पहचान तथा प्रेस क्लब के National Media Council मसौदे पर बहस।

27 अक्टूबर 2026

चर्चा में क्यों?

दिल्ली के विरोध प्रदर्शनों की रिपोर्टिंग के दौरान स्वतंत्र पत्रकारों के साथ कथित पुलिस व्यवहार, सरकारी मान्यता-पत्र पर निर्भरता और डिजिटल मीडिया के विस्तार ने यह प्रश्न उठाया है कि पेशेवर पत्रकार की पहचान और सुरक्षा किस आधार पर होनी चाहिए। NHRC ने तीन महिला पत्रकारों से कथित दुर्व्यवहार पर दिल्ली पुलिस को नोटिस भी जारी किया।

सरकारी मान्यता की सीमा

PIB अथवा राज्य/दिल्ली स्तर की मान्यता मुख्यतः सरकारी कार्यक्रमों और संस्थानों तक औपचारिक पहुँच की सुविधा है; इसे पत्रकार होने की एकमात्र कानूनी कसौटी मानना स्वतंत्र और छोटे डिजिटल पत्रकारों को बाहर कर सकता है।

राष्ट्रीय मीडिया परिषद का विचार

प्रेस क्लब ऑफ इंडिया के मीडिया पारदर्शिता एवं जवाबदेही विधेयक, 2025 के कार्यकारी मसौदे में एक राष्ट्रीय मीडिया परिषद का प्रस्ताव है। यह अभी कानून नहीं है और न ही वर्तमान सर्वोच्च न्यायालय कार्यवाही से ऐसी परिषद स्वतः स्थापित हुई है। इसे मीडिया स्वामित्व, पंजीकरण, शिकायत और जवाबदेही के लिए एक प्रस्तावित मॉडल के रूप में ही पढ़ना चाहिए।

UPSC दृष्टि

नीति को प्रेस स्वतंत्रता, पत्रकारों की सुरक्षा और जवाबदेही के बीच संतुलन बनाना होगा। किसी भी पंजीकरण व्यवस्था को राजनीतिक नियंत्रण का साधन नहीं बनना चाहिए; स्वतंत्र अपील, पारदर्शी मानदंड और स्रोत-सुरक्षा जैसे तत्व महत्वपूर्ण हैं।

स्रोत

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