विभाग-संबंधित संसदीय स्थायी समितियाँ: 24 समितियों में अध्यक्षीय फेरबदल से व्यवस्था फिर चर्चा में
छह विभाग-संबंधित स्थायी समितियों के अध्यक्षों में बदलाव के बाद संसदीय समितियों की संरचना, कार्य और कार्यपालिका पर निगरानी की भूमिका परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण हुई।
पाठ्यक्रम से सीधा संबंध
- प्रारंभिक: संसदीय समितियों की संरचना।
- मुख्य: संसद की कार्यपालिका पर निगरानी, विधायी परीक्षण और वित्तीय जवाबदेही।
चर्चा में क्यों?
24 विभाग-संबंधित संसदीय स्थायी समितियों (Department-related Parliamentary Standing Committees—DRSCs) में से छह के अध्यक्षों में फेरबदल की खबर के बाद यह व्यवस्था चर्चा में है। परीक्षा में दलगत फेरबदल से अधिक समितियों की संरचना और कार्य महत्वपूर्ण हैं।
संरचना
कुल 24 विभाग-संबंधित स्थायी समितियाँ हैं। इनमें 8 राज्यसभा के सभापति के निर्देशन और नियंत्रण में तथा 16 लोकसभा अध्यक्ष के निर्देशन और नियंत्रण में कार्य करती हैं। प्रत्येक समिति में सामान्यतः 31 सदस्य—21 लोकसभा और 10 राज्यसभा—होते हैं।
प्रमुख कार्य
- संबंधित मंत्रालयों की अनुदान मांगों की जाँच।
- सदन द्वारा भेजे गए विधेयकों का परीक्षण।
- वार्षिक प्रतिवेदन और दीर्घकालिक नीति दस्तावेजों का अध्ययन।
- विशेषज्ञों और हितधारकों से साक्ष्य लेकर सूक्ष्म समीक्षा।
समितियाँ क्यों महत्वपूर्ण हैं?
सदन में समय सीमित होता है, जबकि नीति और विधेयक तकनीकी रूप से जटिल होते हैं। समिति-प्रणाली विस्तृत परीक्षण, विशेषज्ञ भागीदारी और मंत्रालय-विशिष्ट निगरानी संभव बनाती है। सिफारिशें सामान्यतः सलाहकारी होती हैं, पर जवाबदेही में उनका महत्व बड़ा है।
प्रारंभिक परीक्षा के उच्च-मूल्य तथ्य
- कुल विभाग-संबंधित स्थायी समितियाँ — 24.
- 8 राज्यसभा सभापति के अधीन; 16 लोकसभा अध्यक्ष के अधीन।
- सामान्य संरचना — 21 लोकसभा + 10 राज्यसभा सदस्य।
मुख्य परीक्षा अभ्यास प्रश्न
प्रश्न: संसदीय समितियाँ भारतीय संसद की सूक्ष्म परीक्षण क्षमता का आधार हैं। उनकी प्रभावशीलता बढ़ाने के उपाय सुझाइए।
त्वरित पुनरावृत्ति
- विषय: संसद एवं जवाबदेही
- समाचार तिथि: 4 अक्टूबर 2026
- परीक्षा संबंध: प्रारंभिक + सामान्य अध्ययन–II
- छह विभाग-संबंधित स्थायी समितियों के अध्यक्षों में बदलाव के बाद संसदीय समितियों की संरचना, कार्य और कार्यपालिका पर निगरानी की भूमिका परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण हुई।