सीआईएसएफ का कार्यात्मक पुनर्गठन, एलएलएलआर(I) रडार और C-390 औद्योगिकीकरण
सीआईएसएफ की क्षेत्र-विशिष्ट कार्यात्मक कमान, भारतीय सेना के लिए ₹770 करोड़ के एलएलएलआर(I) रडार, डीआरडीओ के स्टैनैग-6 कवच और एम्ब्रेयर–महिंद्रा C-390 योजना का अध्ययन।
चर्चा में क्यों?
भारत के महत्वपूर्ण बुनियादी ढाँचे की सुरक्षा और कम ऊँचाई वाले ड्रोन खतरे—दोनों के अनुरूप संस्थागत तथा तकनीकी बदलाव साथ-साथ दिखाई दे रहे हैं। सीआईएसएफ 1 नवंबर 2026 से अपने आठ क्षेत्रीय सेक्टरों को क्षेत्र-विशिष्ट कार्यात्मक सेक्टरों में बदलेगा। दूसरी ओर रक्षा मंत्रालय ने भारतीय सेना के लिए उन्नत निम्न-स्तरीय हल्का रडार (Improved Low Level Light Weight Radar) [एलएलएलआर(I)] की खरीद हेतु भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (BEL) के साथ लगभग ₹770 करोड़ का अनुबंध किया है।
सीआईएसएफ का नया कार्यात्मक ढाँचा
पुरानी व्यवस्था में प्रशासनिक निगरानी मुख्यतः भूगोल/क्षेत्र पर आधारित थी। नई व्यवस्था का तर्क है कि कोयला खदान, बिजली संयंत्र, पेट्रोलियम प्रतिष्ठान, मेट्रो और बंदरगाह के खतरे, प्रशिक्षण और मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) अलग होते हैं; इसलिए समान प्रकृति की इकाइयों को एक विशेषज्ञ कमान के अधीन रखा जाए।
| पुराना सेक्टर | नया कार्यात्मक सेक्टर |
|---|---|
| NCR, नई दिल्ली | सरकारी भवन, संग्रहालय एवं स्मारक + जन द्रुत परिवहन प्रणाली (MRTS) |
| North, नई दिल्ली | Power-I |
| उत्तर-पूर्वी-II, कोलकाता | Power-II |
| Eastern, रांची | Coal |
| Central, भिलाई | Steel |
| North Eastern, गुवाहाटी | Petroleum & Natural Gas |
| Western, मुंबई | West Coast Port |
| Southern, चेन्नई | East Coast Port |
DAE एवं DoS सेक्टर और हवाई अड्डा क्षेत्र-I तथा II अपनी मौजूदा कार्यात्मक व्यवस्था में बने रहेंगे। बंदरगाह-विशिष्ट कमानों का महत्त्व सीआईएसएफ की बढ़ी समुद्री सुरक्षा भूमिका से जुड़ा है।
एलएलएलआर(I) रडार
रक्षा मंत्रालय ने 21 अक्टूबर 2026 को BEL के साथ लगभग ₹770 करोड़ का अनुबंध किया। आधिकारिक विवरण के अनुसार एलएलएलआर(I) लड़ाकू विमान-आकार के लक्ष्यों और लघु/सूक्ष्म ड्रोन का पता लगाने व ट्रैक करने तथा हवाई लक्ष्यों को प्राथमिकता देने में सक्षम है। इसका उपयोग विशेष रूप से सेना की कम ऊँचाई की वायु-रक्षा क्षमता और मानव-रहित हवाई प्रणालियों के विरुद्ध प्रतिक्रिया मजबूत करने में है।
BEL के उत्पाद विवरण के अनुसार यह त्रि-आयामी सक्रिय इलेक्ट्रॉनिक स्कैन सरणी (3D AESA) आधारित रडार है। परीक्षा के लिए “3D” का अर्थ याद रखें—रडार केवल दूरी और दिशा नहीं, लक्ष्य की ऊँचाई संबंधी सूचना भी देता है।
डीआरडीओ का स्टैनैग-6 कवच
डीआरडीओ की पुणे स्थित R&DE(E) की “स्टैनैग-6 के लिए विनिर्माण प्रौद्योगिकी (30mm AP) कवच पैनल” तकनीक अक्टूबर 2026 में प्रौद्योगिकी हस्तांतरण सूची में दर्ज है। इसका आशय ऐसी कवच तकनीक से है जिसे 30 मिमी के कवच-भेदी खतरे के विरुद्ध उच्च सुरक्षा स्तर के लिए विकसित किया गया है।
एम्ब्रेयर–महिंद्रा और C-390
Embraer और Mahindra भारतीय वायुसेना के मध्यम परिवहन विमान (MTA) कार्यक्रम के लिए C-390 Millennium के औद्योगिकीकरण पर काम कर रहे हैं। 1 अक्टूबर 2026 को दोनों कंपनियों ने कहा कि यदि C-390 का चयन होता है, तो नागपुर को संभावित अंतिम असेंबली लाइन के स्थान के रूप में चुना गया है। इसलिए इसे “भारत ने C-390 चुन लिया” या “AN-32 का निश्चित प्रतिस्थापन तय हो गया” कहना गलत होगा।
महिंद्रा की 9 अक्टूबर की विनियामक सूचना में उसकी अधीनस्थ सहायक कंपनी Novavayu Aerospace Limited में 51% हिस्सेदारी बिक्री के समझौते की पुष्टि होती है। इसे C-390 के व्यापक औद्योगिक सहयोग की पृष्ठभूमि में पढ़ें, लेकिन दोनों घटनाओं को एक ही अनुमोदित सैन्य खरीद निर्णय न मानें।
परीक्षा के लिए तकनीकी आधार
रडार विद्युतचुंबकीय तरंग भेजता है और लक्ष्य से लौटे संकेत का विश्लेषण कर दूरी, दिशा और गति जैसी सूचनाएँ निकालता है। आधुनिक AESA रडार में अनेक छोटे प्रेषण/प्राप्ति मॉड्यूल इलेक्ट्रॉनिक रूप से beam को steer करते हैं; इससे तेज स्कैन, अनेक लक्ष्यों की ट्रैकिंग और विश्वसनीयता में लाभ मिलता है। डॉप्लर प्रभाव लक्ष्य की सापेक्ष गति पहचानने में उपयोगी होता है। यही मूल भौतिकी एलएलएलआर(I) जैसे आधुनिक वायु-रक्षा रडार को समझने के लिए पर्याप्त है।
मुख्य परीक्षा विश्लेषण
क्षेत्र-विशिष्ट सुरक्षा: सीआईएसएफ का पुनर्गठन प्रशिक्षण, SOP, जोखिम आकलन और संबंधित मंत्रालयों/स्थापना प्रबंधन के साथ समन्वय को विशेषज्ञ बनाता है। बंदरगाहों में कंटेनर, ड्रोन, तस्करी और समुद्री इंटरफेस के खतरे ऊर्जा संयंत्र की औद्योगिक सुरक्षा से अलग हैं।
कम ऊँचाई का खतरा: सस्ते और छोटे ड्रोन पारंपरिक वायु-रक्षा नेटवर्क के लिए चुनौती हैं। एलएलएलआर(I) जैसे स्वदेशी रडार “देखने” की परत मजबूत करते हैं; लेकिन प्रभावी मानवरहित विमान-रोधी (counter-UAS) के लिए पहचान के बाद इलेक्ट्रॉनिक युद्ध, सॉफ्ट-किल/हार्ड-किल और कमान एवं नियंत्रण का एकीकृत ढाँचा भी आवश्यक है।
आत्मनिर्भरता: BEL रडार, डीआरडीओ कवच और संभावित C-390 औद्योगिक साझेदारी तीन अलग मॉडल दिखाते हैं—स्वदेशी सार्वजनिक क्षेत्र उत्पादन, रक्षा अनुसंधान से उद्योग को प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और वैश्विक OEM के साथ स्थानीय औद्योगिकीकरण।
प्रारंभिक परीक्षा अभ्यास
निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- सीआईएसएफ का नया ढाँचा 1 नवंबर 2026 से कुछ क्षेत्रीय सेक्टरों को कोयला, इस्पात, पावर, पेट्रोलियम-गैस और बंदरगाह जैसे कार्यात्मक सेक्टरों में बदलता है।
- एलएलएलआर(I) केवल बड़े लड़ाकू विमानों का पता लगा सकता है; लघु/सूक्ष्म ड्रोन इसकी क्षमता से बाहर हैं।
- C-390 के भारत में नागपुर assembly plan को कंपनियों ने भारतीय वायुसेना द्वारा विमान के चयन की शर्त से जोड़ा है।
- (a) केवल 1 और 2
- (b) केवल 1 और 3
- (c) केवल 2 और 3
- (d) 1, 2 और 3
सही उत्तर और विस्तृत व्याख्या
सही उत्तर: (b) केवल 1 और 3
एलएलएलआर(I) के आधिकारिक विवरण में लड़ाकू-विमान आकार के लक्ष्य के साथ लघु/सूक्ष्म ड्रोन का पता लगाना और ट्रैकिंग भी शामिल है, इसलिए कथन 2 गलत है।
मुख्य परीक्षा अभ्यास प्रश्न
“महत्वपूर्ण अवसंरचना की सुरक्षा में संस्थागत विशेषज्ञता और स्वदेशी सेंसर-क्षमता एक-दूसरे की पूरक हैं।” सीआईएसएफ के कार्यात्मक पुनर्गठन और एलएलएलआर(I) रडार के संदर्भ में चर्चा कीजिए।
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