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आकाश वायु-रक्षा प्रणाली का मध्य एशिया में निर्यात और भारत की रक्षा कूटनीति

आकाश Surface-to-Air Missile के ताजिकिस्तान व तुर्कमेनिस्तान निर्यात, DRDO तकनीक, रक्षा निर्यात, मध्य एशिया और आत्मनिर्भर भारत के रणनीतिक आयाम।

24 अक्टूबर 2026

चर्चा में क्यों?

रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह ने अक्टूबर 2026 में कहा कि स्वदेशी Akash Surface-to-Air Missile प्रणाली आर्मेनिया के बाद ताजिकिस्तान और तुर्कमेनिस्तान को भी निर्यात की गई है। यह भारत के रक्षा निर्यात में मध्य एशिया की ओर महत्वपूर्ण विस्तार है।

स्रोत-सावधानी: ताजिकिस्तान/तुर्कमेनिस्तान के अनुबंध मूल्य और विस्तृत configuration सार्वजनिक नहीं किए गए हैं; इसलिए केवल सार्वजनिक रूप से पुष्ट जानकारी का उपयोग किया गया है।

आकाश प्रणाली: मुख्य विशेषताएँ

  • विकास: DRDO; प्रणाली Indian Army और Indian Air Force में operational है।
  • प्रकार: short-range/mobile Surface-to-Air Missile air-defence system.
  • एक साथ अनेक targets को group या autonomous mode में engage कर सकती है।
  • Electronic Counter-Counter Measures (ECCM) और network-centric operation की क्षमता।
  • DRDO export catalogue में engagement range लगभग 3–25 km बताई गई है; configuration के अनुसार अन्य प्रदर्शन पैरामीटर बदल सकते हैं।
  • प्रमुख उत्पादन भागीदार: Bharat Dynamics Limited (BDL) और Bharat Electronics Limited (BEL) सहित भारतीय उद्योग नेटवर्क।

IGMDP और स्वदेशी मिसाइल विकास

आकाश का विकास भारत के Integrated Guided Missile Development Programme (IGMDP) की विरासत से जुड़ा है। IGMDP के तहत पृथ्वी, अग्नि, आकाश, त्रिशूल और नाग जैसी मिसाइल प्रणालियों पर काम किया गया। Prelims में missile type, role और development agency का मिलान अक्सर संभावित क्षेत्र होता है।

मध्य एशिया का रणनीतिक महत्व

ताजिकिस्तान और तुर्कमेनिस्तान दोनों मध्य एशिया में स्थित हैं। यह क्षेत्र ऐतिहासिक रूप से रूसी रक्षा प्रणालियों पर निर्भर रहा है और चीन की आर्थिक-सुरक्षा उपस्थिति भी बढ़ी है। भारत के लिए रक्षा निर्यात केवल commercial sale नहीं, बल्कि long-term training, maintenance, spares और strategic relationships का साधन बन सकता है।

  • ताजिकिस्तान स्थलरुद्ध देश है और अफगानिस्तान से सीमा साझा करता है।
  • तुर्कमेनिस्तान कैस्पियन सागर के तट पर है तथा गैस संसाधनों के लिए प्रसिद्ध है।

भारत की रक्षा-निर्यात नीति के लिए महत्व

  • DRDO-developed platform की export credibility बढ़ती है।
  • Armenia के बाद नए ग्राहकों से market diversification और scale economies संभव।
  • Maintenance–training ecosystem भारतीय private/MSME suppliers के लिए दीर्घकालिक अवसर देता है।
  • Central Asia में भारत की strategic visibility बढ़ती है।
  • स्वदेशी systems की overseas deployment से quality, lifecycle support और certification standards की परीक्षा भी होती है।

चुनौतियाँ और सावधानियाँ

Defence exports में end-use monitoring, geopolitical sensitivities, spare-parts assurance, long-term maintenance, technology security और buyer-country payment/financing महत्त्वपूर्ण होते हैं। भारत को export growth के साथ production capacity तथा भारतीय सशस्त्र बलों की घरेलू जरूरतों में संतुलन भी बनाए रखना होगा।

प्रारंभिक परीक्षा अभ्यास

प्रश्न 1. Akash के बारे में कथनों पर विचार करें: 1. यह surface-to-air missile system है। 2. इसे DRDO ने विकसित किया। 3. यह केवल नौसेना में operational है। सही विकल्प— (a) 1 और 2 (b) 2 और 3 (c) केवल 1 (d) सभी।

उत्तर

(a). यह Army और Air Force में operational है।

प्रश्न 2. ताजिकिस्तान और तुर्कमेनिस्तान के बारे में कौन-सा सही है? (a) दोनों समुद्री तट वाले देश हैं (b) दोनों मध्य एशिया में हैं (c) दोनों NATO सदस्य हैं (d) दोनों EU सदस्य हैं

उत्तर

(b).

मुख्य परीक्षा अभ्यास प्रश्न

स्वदेशी वायु-रक्षा प्रणाली आकाश का निर्यात भारत के रक्षा औद्योगिक आधार और रणनीतिक कूटनीति के लिए किस प्रकार महत्त्वपूर्ण है? मध्य एशिया के संदर्भ में चर्चा कीजिए।

10 अंक · 150 शब्द · GS-III

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स्रोत और संदर्भ