उड़ान योजना का नया चरण और एयरोड्रम विकास का चुनौती मोड
नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने उड़ान योजना के अगले चरण के अंतर्गत 21 राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों के साथ समझौता ज्ञापन किए और हवाई पट्टियों तथा हेलीपैडों के विकास के लिए चुनौती मोड शुरू किया।
पाठ्यक्रम से जुड़ाव
- प्रारंभिक परीक्षा: उड़ान योजना, भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण, क्षेत्रीय हवाई संपर्क।
- मुख्य परीक्षा GS-III: अवसंरचना—विमानन, क्षेत्रीय विकास, लॉजिस्टिक्स और सार्वजनिक निवेश।
- शासन: केंद्र–राज्य समन्वय और मांग-आधारित परियोजना चयन।
चर्चा में क्यों?
22 सितंबर 2026 को नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने उड़ान के अगले चरण के लिए 21 राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों के साथ समझौता ज्ञापन किए। साथ ही एयरोड्रम विकास हेतु चुनौती मोड पोर्टल शुरू किया गया, जिसके माध्यम से राज्य और केंद्रशासित प्रदेश स्थानीय संपर्क आवश्यकता के आधार पर हवाई पट्टियों तथा हेलीपैडों को विकास के लिए नामित कर सकेंगे।
मुख्य बिंदु
- अगले चरण में केंद्र, राज्य/केंद्रशासित प्रदेश और भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण के बीच समन्वित ढाँचा बनाया गया है।
- चुनौती मोड का उद्देश्य स्थानीय मांग के आधार पर संभावित एयरोड्रम परियोजनाओं की पहचान करना है।
- विशेष ध्यान कम-सेवित और बिना-सेवा वाले क्षेत्रों पर है।
- हवाई पट्टी, हेलीपैड और अन्य विमानन परिसंपत्तियाँ क्षेत्रीय संपर्क नेटवर्क का हिस्सा बन सकती हैं।
- परियोजना चयन में केवल भौतिक निर्माण नहीं, बल्कि मार्ग की वास्तविक मांग और संचालन की स्थिरता भी निर्णायक है।
पृष्ठभूमि और विस्तार
उड़ान अर्थात “उड़े देश का आम नागरिक” क्षेत्रीय संपर्क योजना है। इसका मूल उद्देश्य छोटे शहरों और दूरस्थ क्षेत्रों को वाणिज्यिक हवाई नेटवर्क से जोड़ना, यात्रा समय घटाना और क्षेत्रीय आर्थिक गतिविधि को बढ़ाना है।
क्षेत्रीय विमानन में दो समस्याएँ प्रमुख रहती हैं—पहली, पर्याप्त यात्री मांग न होने से मार्ग व्यावसायिक रूप से कमजोर हो सकता है; दूसरी, हवाई अड्डा या हवाई पट्टी उपलब्ध होने पर भी वह संचालन योग्य स्थिति में नहीं होती। इसलिए योजना में मार्ग सहायता और अवसंरचना विकास को साथ देखना आवश्यक है।
चुनौती मोड स्थानीय सरकारों को ऊपर से तय सूची के बजाय अपनी भौगोलिक, पर्यटन, औद्योगिक, चिकित्सा अथवा आपदा-प्रतिक्रिया जरूरतों के अनुसार परिसंपत्तियाँ प्रस्तावित करने का अवसर देता है।
महत्व, प्रभाव और चुनौतियाँ
क्षेत्रीय विकास: बेहतर हवाई संपर्क पर्यटन, सेवा क्षेत्र, निवेश और स्थानीय बाजारों को बड़े आर्थिक केंद्रों से जोड़ सकता है।
दूरस्थ क्षेत्रों की पहुँच: पर्वतीय, सीमावर्ती और द्वीपीय क्षेत्रों में हवाई संपर्क समय की बचत के साथ चिकित्सा आपातकाल और आपदा राहत में भी उपयोगी है।
चुनौती—मांग: कम यात्री भार वाले मार्गों पर लंबे समय तक वित्तीय व्यवहार्यता बनाए रखना कठिन हो सकता है।
चुनौती—अवसंरचना: भूमि, सुरक्षा मानक, वायु यातायात प्रबंधन, रखरखाव और पर्यावरणीय अनुमतियाँ परियोजनाओं की गति को प्रभावित कर सकती हैं।
चुनौती—स्थायित्व: केवल नया हवाई अड्डा बनाना पर्याप्त नहीं; नियमित उड़ान, उचित किराया और स्थानीय आर्थिक गतिविधि से उसका जुड़ाव आवश्यक है।
मुख्य परीक्षा
क्षेत्रीय विमानन को परिवहन के अलग क्षेत्र के रूप में नहीं, बल्कि बहु-माध्यम संपर्क, पर्यटन, औद्योगिक गलियारों, आकांक्षी जिलों और आपदा प्रबंधन से जोड़कर देखना चाहिए। सफल मॉडल वही होगा जिसमें सार्वजनिक समर्थन प्रारंभिक जोखिम घटाए, परंतु दीर्घकाल में मार्गों की आर्थिक उपयोगिता, स्थानीय मांग और अन्य परिवहन साधनों के साथ समन्वय सुनिश्चित हो।
आगे की राह
- परियोजना चयन से पहले वास्तविक यात्री और आर्थिक मांग का पारदर्शी आकलन।
- रेल, सड़क और बस नेटवर्क के साथ अंतिम-मील संपर्क।
- छोटे एयरोड्रमों के रखरखाव और सुरक्षा के लिए स्थायी वित्तीय मॉडल।
- पर्यटन, स्वास्थ्य और व्यापारिक क्लस्टरों के साथ मार्गों का एकीकरण।
- संचालन शुरू होने के बाद यात्री संख्या, लागत और सेवा निरंतरता का सार्वजनिक मूल्यांकन।
संबंधित महत्वपूर्ण तथ्य
- उड़ान एक क्षेत्रीय संपर्क योजना है।
- भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण नागरिक उड्डयन मंत्रालय के अंतर्गत वैधानिक निकाय है।
- कम-सेवित और बिना-सेवा वाले हवाई अड्डों को जोड़ना योजना का प्रमुख उद्देश्य है।
- हेलीपैड विशेष रूप से पर्वतीय और दुर्गम क्षेत्रों के लिए उपयोगी हो सकते हैं।
विगत वर्षों के प्रश्न और अपेक्षित प्रश्न
सत्यापित PYQ
मुख्य परीक्षा GS-II, 2022 — भावार्थ: संपर्कता के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए गति-शक्ति योजना में सरकार और निजी क्षेत्र के सूक्ष्म समन्वय की आवश्यकता पर चर्चा कीजिए।
अपेक्षित प्रारंभिक प्रश्न
प्रश्न 1. उड़ान योजना का मूल उद्देश्य क्या है? (क) केवल महानगरों के बीच अंतरराष्ट्रीय उड़ानें बढ़ाना (ख) कम-सेवित और बिना-सेवा वाले क्षेत्रों को क्षेत्रीय हवाई संपर्क से जोड़ना (ग) केवल सैन्य हवाई पट्टियों का आधुनिकीकरण (घ) केवल मालवाहक विमानन को प्रोत्साहन।
उत्तर देखें
उत्तर: (ख)
प्रश्न 2. चुनौती मोड में राज्य और केंद्रशासित प्रदेश किस प्रकार की परिसंपत्तियों को विकास के लिए प्रस्तावित कर सकते हैं?
उत्तर देखें
उत्तर: हवाई पट्टियाँ और हेलीपैड सहित क्षेत्रीय विमानन परिसंपत्तियाँ।
अपेक्षित मुख्य प्रश्न
क्षेत्रीय हवाई संपर्क को केवल परिवहन परियोजना न मानते हुए क्षेत्रीय विकास, पर्यटन, आपदा प्रतिक्रिया और बहु-माध्यम संपर्क के साधन के रूप में परखिए। उड़ान योजना की दीर्घकालीन वित्तीय व्यवहार्यता की चुनौतियाँ भी बताइए।
PYQ सत्यापन: UPSC मुख्य परीक्षा 2022, GS-II।
सामग्री स्रोतों का स्वतंत्र, परीक्षा-उन्मुख पुनर्लेखन है; किसी प्रकाशन का पाठ प्रतिलिपि नहीं किया गया है।