‘Mandar of Jharkhand’ को GI टैग: लोक वाद्ययंत्र, गुमला और पारंपरिक शिल्प
झारखंड के पारंपरिक ताल-वाद्य मांदर को भौगोलिक संकेतक पंजीकरण मिला; यह संस्कृति, शिल्प और बौद्धिक संपदा—तीनों को जोड़ता है।
चर्चा में क्यों?
झारखंड के पारंपरिक लोक वाद्ययंत्र मांदर को ‘Mandar Of Jharkhand’ नाम से भौगोलिक संकेतक के रूप में पंजीकृत किया गया। GI Registry के आधिकारिक डेटाबेस में इसका Application No. 777 और स्थिति Registered दर्ज है।
आवेदक और क्षेत्र
आधिकारिक रिकॉर्ड के अनुसार आवेदक Raidih Mandar Producer Company Limited, जरजट्टा, रायडीह, गुमला है। भौगोलिक क्षेत्र झारखंड दर्ज है। आवेदन 24 सितंबर 2021 को दायर हुआ था और वस्तु हस्तशिल्प श्रेणी में दर्ज है।
मांदर क्या है?
मांदर झारखंड के लोक और जनजातीय जीवन से जुड़ा ताल-वाद्य है। इसकी विशिष्ट निर्माण परंपरा स्थानीय लाल मिट्टी, चमड़े और पारंपरिक तकनीक से संबंधित है। यह सामुदायिक नृत्य, पर्व और लोक-संगीत में प्रमुख भूमिका निभाता है।
GI टैग का अर्थ
GI ऐसे उत्पाद की पहचान करता है जिसकी गुणवत्ता, प्रतिष्ठा या विशेषता किसी निश्चित भौगोलिक क्षेत्र से जुड़ी हो। यह किसी एक व्यक्ति का निजी ट्रेडमार्क नहीं, बल्कि पात्र उत्पादकों की सामूहिक भौगोलिक पहचान है।
प्रारंभिक परीक्षा केंद्रित तथ्य
- नाम: Mandar Of Jharkhand।
- Application No.: 777।
- आवेदक: Raidih Mandar Producer Company Limited, गुमला।
- भौगोलिक क्षेत्र: झारखंड।
- आवेदन दायर: 24 सितंबर 2021।
- श्रेणी: Handicrafts; Class 15।
कथन आधारित सावधानियाँ
- GI टैग को पेटेंट या ट्रेडमार्क के समान न मानें।
- आवेदक गुमला में है, लेकिन आधिकारिक GI क्षेत्र झारखंड दर्ज है।
मुख्य परीक्षा अभ्यास प्रश्न
प्रश्न: भौगोलिक संकेतक किस प्रकार पारंपरिक शिल्प और स्थानीय सांस्कृतिक अर्थव्यवस्था को संरक्षण दे सकते हैं? मांदर के उदाहरण सहित समझाइए।