भू-आकृतिक प्रक्रम, ज्वालामुखी एवं मानचित्रण • संघ लोक सेवा आयोग 2027

अनाक क्राकाटोआ के पास दो नए द्वीप: सुंडा जलडमरूमध्य में ज्वालामुखीय भू-आकृति परिवर्तन

सुंडा जलडमरूमध्य में अनाक क्राकाटोआ के पास दो नए भू-भागों की पुष्टि हुई; उनकी सटीक उत्पत्ति पर भूवैज्ञानिक जाँच अभी जारी है।

समाचार स्रोत तिथि: 24 सितंबर 2026 • अध्ययन तिथि: 6 अक्टूबर 2026
प्रकाशित: 6 अक्टूबर 2026अंतिम अद्यतन: 6 अक्टूबर 2026परीक्षा: प्रारंभिक + मुख्यसामान्य अध्ययन–I

पाठ्यक्रम से सीधा संबंध

  • प्रारंभिक परीक्षा: ज्वालामुखी, द्वीप-चाप, प्लेट विवर्तनिकी, जलडमरूमध्य और मानचित्रण।
  • मुख्य सामान्य अध्ययन–I: महत्वपूर्ण भू-भौतिकीय घटनाएँ, ज्वालामुखीय उद्गार, सुनामी और तटीय भू-आकृति विज्ञान।

चर्चा में क्यों?

इंडोनेशिया की भूवैज्ञानिक एजेंसी ने सुंडा जलडमरूमध्य में अनाक क्राकाटोआ (Anak Krakatau) के उत्तर-पश्चिम और दक्षिण-पूर्व में दो नए भू-भागों/छोटे द्वीपों की पुष्टि की। वे तट से क्रमशः लगभग 760 मीटर और 495 मीटर दूर हैं। समुद्री प्रेक्षणों और सेंटिनल उपग्रह चित्रों से 23 सितंबर तक इनकी मौजूदगी की पुष्टि हुई।

महत्वपूर्ण तथ्य: इन भू-भागों का संबंध 4–6 सितंबर के लगातार उद्गारों से माना जा रहा है, लेकिन एजेंसी ने अभी यह निश्चित नहीं किया है कि वे नए उद्गार-वेंट हैं या द्वितीयक ज्वालामुखीय पदार्थ के संचय से बने हैं। इसलिए “समुद्र-तलीय दरारी उद्गार” को अभी निश्चित कारण नहीं माना जाना चाहिए।

अनाक क्राकाटोआ और सुंडा जलडमरूमध्य

  • अनाक क्राकाटोआ: अर्थ—“क्राकाटोआ का बच्चा”; 1883 के विनाशकारी क्राकाटोआ विस्फोट के बाद बने ज्वालामुखीय तंत्र से उभरा नया शंकु।
  • सुंडा जलडमरूमध्य: जावा और सुमात्रा के बीच; जावा सागर को हिंद महासागर से जोड़ता है।
  • विवर्तनिक स्थिति: इंडो-ऑस्ट्रेलियाई प्लेट का सुंडा प्लेट के नीचे अभिसरण; प्रशांत “रिंग ऑफ फायर” का सक्रिय क्षेत्र।

नए भू-भाग कैसे बने?

4–6 सितंबर 2026 के लगभग 25 घंटे लंबे उद्गार-क्रम में भारी लावा प्रवाह ने ज्वालामुखीय संरचना का क्षेत्र लगभग 32.8 हेक्टेयर बढ़ाया। समुद्र में लावा, राख, टेफ्रा और मलबे का जमाव नई तटीय आकृतियाँ बना सकता है, पर दोनों नए भू-भागों की सटीक उत्पत्ति अभी जाँचाधीन है।

भू-आकृतिक और पारिस्थितिकीय महत्त्व

  • नई ज्वालामुखीय भूमि दिखाती है कि द्वीप और तट अल्प समय में भी बदल सकते हैं।
  • असंगठित टेफ्रा समुद्री अपरदन और ढलान-पतन से शीघ्र बदल सकता है।
  • स्थिर रहने पर ऐसी भूमि प्राथमिक पारिस्थितिकीय अनुक्रमण के अध्ययन का अवसर देती है।

2018 की सुनामी से सीख

दिसंबर 2018 में अनाक क्राकाटोआ के हिस्से के ढहने से सुंडा जलडमरूमध्य में घातक सुनामी उत्पन्न हुई थी। इससे स्पष्ट है कि सभी सुनामियाँ बड़े भूकंप से नहीं आतीं; ज्वालामुखीय ढलान-पतन भी विनाशकारी तरंगें पैदा कर सकता है।

आपदा प्रबंधन

  • उपग्रह, तटीय रडार और समुद्र-स्तर सेंसर की संयुक्त निगरानी।
  • भूकंप-आधारित चेतावनी से आगे ज्वालामुखीय ढलान-पतन की वास्तविक समय निगरानी।
  • तटीय समुदायों के लिए स्पष्ट निकासी मार्ग और अभ्यास।

प्रारंभिक परीक्षा अभ्यास

प्रश्न: (1) सुंडा जलडमरूमध्य जावा सागर को दक्षिण चीन सागर से जोड़ता है; (2) अनाक क्राकाटोआ एक मिश्रित ज्वालामुखी है; (3) दोनों नए द्वीपों का समुद्र-तलीय दरारी उद्गार से बनना निश्चित रूप से सिद्ध हो चुका है।

उत्तर: केवल 2।

मुख्य परीक्षा अभ्यास प्रश्न

ज्वालामुखीय द्वीपों का तीव्र निर्माण और ढलान-पतन तटीय क्षेत्रों में किस प्रकार बहु-आपदा जोखिम उत्पन्न करते हैं? अनाक क्राकाटोआ के संदर्भ में समझाइए।

त्वरित पुनरावृत्ति

  • स्थान → सुंडा जलडमरूमध्य, जावा–सुमात्रा
  • दूरी → 760 मीटर और 495 मीटर
  • 4–6 सितंबर उद्गार → संरचना में लगभग 32.8 हेक्टेयर विस्तार
  • सटीक उत्पत्ति → अभी जाँचाधीन

स्रोत