ओसीसीसीएम, सुविकल्प और ग्रैप चरण-I: कार्बन बाज़ार से वायु गुणवत्ता तक
अनुपालन कार्बन बाज़ारों पर खुला गठबंधन (OCCCM), भारत की कार्बन क्रेडिट व्यापार योजना (CCTS), बंद खदानों के पुनरुपयोग के सुविकल्प–प्रिज़्म (PRISM) और दिल्ली-एनसीआर में ग्रैप चरण-I का समेकित अध्ययन।
चर्चा में क्यों?
कार्बन मूल्य निर्धारण, कोयला-क्षेत्र के न्यायसंगत संक्रमण और दिल्ली-NCR की वायु गुणवत्ता—तीनों अलग खबरें दिखती हैं, लेकिन इनका साझा प्रश्न है: पर्यावरणीय लागत को नीति और बाजार के निर्णयों में कैसे शामिल किया जाए? मई 2026 में यूरोपीय संघ, ब्राजील और चीन ने ओपन कोएलिशन ऑन कम्प्लायंस कार्बन मार्केट्स (OCCCM) शुरू किया। भारत में कोयला नियंत्रक संगठन के सुविकल्प को 2026 का स्कॉच गोल्ड पुरस्कार मिला, और 21 अक्टूबर को दिल्ली का AQI ‘खराब’ श्रेणी में पहुँचने पर ग्रैप चरण-I लागू किया गया।
OCCCM क्या है?
OCCCM को 7 मई 2026 को यूरोपीय संघ, ब्राजील और चीन ने शुरू किया। यह किसी सदस्य पर एक समान बाध्यकारी उत्सर्जन-कटौती लक्ष्य थोपने वाला समझौता नहीं, बल्कि घरेलू अनुपालन कार्बन बाजारों के बीच सहयोग का मंच है। इसके प्रमुख क्षेत्र हैं—निगरानी, रिपोर्टिंग और सत्यापन (MRV), कार्बन लेखांकन पद्धतियाँ और उच्च-अखंडता वाले ऑफसेट।
मूल अवधारणा: अनुपालन बाजार में कानून/नियमन से संस्थाओं पर उत्सर्जन या उत्सर्जन-तीव्रता की बाध्यता होती है। स्वैच्छिक बाजार में संस्था स्वेच्छा से परियोजना-आधारित क्रेडिट खरीद या बेच सकती है। दोनों को एक ही चीज न मानें।
भारत का कार्बन बाज़ार
भारत की कार्बन क्रेडिट ट्रेडिंग स्कीम (CCTS), 2023 ऊर्जा संरक्षण अधिनियम, 2001 में 2022 के संशोधन से बने वैधानिक आधार पर अधिसूचित हुई। इसके दो तंत्र हैं:
- अनुपालन तंत्र: बाध्य संस्थाओं के लिए प्रति इकाई उत्पादन ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन-तीव्रता लक्ष्य। लक्ष्य से बेहतर प्रदर्शन पर कार्बन क्रेडिट प्रमाणपत्र, कमी रहने पर प्रमाणपत्र खरीद/समर्पण की जरूरत।
- ऑफसेट तंत्र: गैर-बाध्य संस्थाओं की पात्र परियोजनाएँ उत्सर्जन में कमी, निष्कासन या परिहार के आधार पर क्रेडिट मांग सकती हैं।
BEE के अनुसार एल्युमिनियम, सीमेंट, क्लोर-अल्कली, उर्वरक, लौह-इस्पात, पेट्रोकेमिकल, पेट्रोलियम रिफाइनरी, पल्प-पेपर और टेक्सटाइल सहित नौ क्षेत्र अनुपालन तंत्र में क्रमिक संक्रमण के लिए चिह्नित हैं। मौजूदा PAT व्यवस्था के संबंधित हिस्सों को क्रमशः CCTS में ले जाने की परिकल्पना है।
सुविकल्प और PRISM
सुविकल्प (SUVIKALP) कोयला मंत्रालय के अधीन कोयला नियंत्रक संगठन (CCO) का इन-हाउस, डेटा-आधारित खदान पुनरुपयोग उपकरण है। यह बंद या खनन-उपरांत भूमि के लिए तकनीकी, पर्यावरणीय, सामाजिक और आर्थिक मानदंडों के आधार पर पुनरुपयोग विकल्पों का मूल्यांकन और क्रम निर्धारण करता है। इसे 26 सितंबर 2026 को “डिजिटल परिचालन दक्षता – डेटा-आधारित निर्णय-निर्माण” श्रेणी में स्कॉच गोल्ड पुरस्कार 2026 मिला।
उपयुक्त विकल्प चुनने के बाद PRISM (खनन-पश्चात पुनरुपयोग कार्यान्वयन रणनीति मॉडल) परियोजना अवधारणा, क्रियान्वयन दृष्टिकोण, केस स्टडी, नमूना DPR और निविदा दस्तावेज जैसी सामग्री देता है। इसका व्यापक अर्थ है—खदान बंद करना केवल गड्ढा भरना नहीं; भूमि, जल, स्थानीय रोजगार और भविष्य की ऊर्जा उपयोगिता को साथ देखना।
दिल्ली-NCR में ग्रैप चरण-I
21 अक्टूबर 2026 को दिल्ली का दैनिक औसत AQI दोपहर 2 बजे 244 और शाम 4 बजे 245 दर्ज हुआ—दोनों ‘खराब’ श्रेणी में। वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) की उपसमिति ने पूरे NCR में ग्रैप चरण-I के सभी 25 कार्रवाई बिंदु तत्काल लागू किए।
| GRAP चरण | दिल्ली AQI | श्रेणी |
|---|---|---|
| चरण-I | 201–300 | खराब |
| चरण-II | 301–400 | बहुत खराब |
| चरण-III | 401–450 | गंभीर |
| चरण-IV | 450 से अधिक | गंभीर+ |
AQI को केवल एक संख्या की तरह न पढ़ें। यह विभिन्न प्रदूषकों की सांद्रता को स्वास्थ्य-जोखिम आधारित सूचकांक में बदलता है। GRAP की विशेषता यह है कि प्रदूषण बहुत बिगड़ जाने के बाद प्रतिक्रिया करने के बजाय अलग-अलग AQI स्तरों पर पहले से तय कार्रवाई सक्रिय होती है।
मुख्य परीक्षा विश्लेषण
वैश्विक आयाम: भारत के लिए OCCCM जैसे मंच का लाभ MRV और कार्बन लेखांकन के अंतरराष्ट्रीय सामंजस्य में भागीदारी है। इससे भारतीय कार्बन बाजार की विश्वसनीयता बढ़ सकती है, पर भारत को समान लेकिन विभेदित उत्तरदायित्व एवं संबंधित क्षमताएँ (CBDR-RC), विकासशील देशों की नीति-स्वायत्तता और व्यापारिक संरक्षणवाद की चिंताओं को भी सामने रखना होगा।
घरेलू आयाम: CCTS उत्सर्जन को आर्थिक संकेत देता है; सुविकल्प जीवाश्म ईंधन-निर्भर क्षेत्रों में खदान बंद होने के बाद भूमि और आजीविका के पुनर्गठन को संबोधित करता है; GRAP शहरी प्रदूषण के तात्कालिक नियंत्रण का उपकरण है। तीनों मिलकर रोकथाम, मूल्य निर्धारण और संक्रमण—तीन अलग नीतिगत स्तर दिखाते हैं।
आगे की राह: मजबूत MRV, विश्वसनीय क्रेडिट, दोहरी गणना से बचाव, प्रभावित श्रमिकों के लिए कौशल और सामाजिक सुरक्षा तथा NCR में स्रोत-विशिष्ट प्रदूषण नियंत्रण जरूरी हैं।
विगत वर्ष का वास्तविक प्रश्न
UPSC प्रारंभिक परीक्षा 2023
कथन-I: कार्बन बाजार जलवायु परिवर्तन के विरुद्ध लड़ाई में सबसे व्यापक रूप से प्रयुक्त साधनों में से एक होने की संभावना रखते हैं।
कथन-II: कार्बन बाजार निजी क्षेत्र से राज्य को संसाधनों का हस्तांतरण करते हैं।
उपर्युक्त कथनों के संबंध में निम्नलिखित में से कौन-सा सही है?
- (a) कथन-I और कथन-II दोनों सही हैं तथा कथन-II, कथन-I की सही व्याख्या है।
- (b) कथन-I और कथन-II दोनों सही हैं, किंतु कथन-II, कथन-I की सही व्याख्या नहीं है।
- (c) कथन-I सही है, किंतु कथन-II गलत है।
- (d) कथन-I गलत है, किंतु कथन-II सही है।
सही उत्तर और विस्तृत व्याख्या
सही उत्तर: (b)
कथन-I और कथन-II दोनों सही हैं, लेकिन कथन-II यह नहीं बताता कि कार्बन बाजार जलवायु परिवर्तन से निपटने के व्यापक साधन क्यों बन सकते हैं। इसलिए कथन-II, कथन-I की सही व्याख्या नहीं है।
प्रारंभिक परीक्षा अभ्यास
निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- OCCCM को 2026 में यूरोपीय संघ, ब्राजील और चीन ने शुरू किया।
- भारत की CCTS में केवल स्वैच्छिक ऑफसेट तंत्र है; अनुपालन तंत्र नहीं है।
- सुविकल्प बंद/खनन-उपरांत खदान भूमि के पुनरुपयोग विकल्पों के मूल्यांकन में सहायता करता है।
- (a) केवल 1 और 2
- (b) केवल 1 और 3
- (c) केवल 2 और 3
- (d) 1, 2 और 3
सही उत्तर और विस्तृत व्याख्या
सही उत्तर: (b) केवल 1 और 3
CCTS में अनुपालन और ऑफसेट—दोनों तंत्र हैं। इसलिए कथन 2 गलत है।
मुख्य परीक्षा अभ्यास प्रश्न
“कार्बन बाजारों की विश्वसनीयता, कोयला-क्षेत्र का न्यायसंगत संक्रमण और शहरी वायु प्रदूषण नियंत्रण—भारत की हरित अर्थव्यवस्था के परस्पर जुड़े लेकिन भिन्न नीतिगत आयाम हैं।” OCCCM, CCTS, सुविकल्प और GRAP के संदर्भ में विश्लेषण कीजिए।
15 अंक • 250 शब्द