तेंदुओं में प्रतिरक्षात्मक गर्भनिरोध, बाघ गलियारे और पश्चिमी घाट की नई प्रजातियाँ
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जुन्नर का तेंदुआ अध्ययन, बीड में बाघ की उपस्थिति, तीन नए कनखजूरे और वन्यजीव प्रबंधन की चुनौतियाँ।
चर्चा में क्यों?
महाराष्ट्र के पुणे जिले के जुन्नर वन प्रभाग में तेंदुओं की प्रजनन क्षमता नियंत्रित करने के लिए प्रतिरक्षात्मक गर्भनिरोध का क्षेत्रीय अध्ययन शुरू हुआ है। अक्टूबर के पहले सप्ताह में उपचार प्राप्त दो मादा तेंदुओं को प्राकृतिक क्षेत्र में छोड़कर उनकी निगरानी की जा रही है। प्रभाग और प्रजनन स्वास्थ्य शोध से जुड़ी संस्था का उद्देश्य यह देखना है कि यह तरीका सुरक्षित, प्रभावी और व्यवहार में उपयोगी है या नहीं।
मराठवाड़ा के बीड जिले के आष्टी क्षेत्र में एक बाघ की कैमरा-ट्रैप से पुष्टि और पश्चिमी घाट से कनखजूरे की तीन नई प्रजातियों का विवरण भी चर्चा में है। ये घटनाएँ आबादी प्रबंधन, जीवों की आवाजाही और कम अध्ययन किए गए समूहों के संरक्षण को जोड़ती हैं।
प्रतिरक्षात्मक गर्भनिरोध क्या है?
इम्यूनो-कॉन्ट्रासेप्शन में प्रजनन से संबंधित किसी लक्ष्य के विरुद्ध प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया उत्पन्न करके गर्भधारण की संभावना घटाई जाती है। यह शल्य-नसबंदी से अलग विधि है। कुछ टीके अंडाणु के बाहरी आवरण से संबंधित लक्ष्य पर काम करते हैं, जबकि कुछ प्रजनन हार्मोन की कार्यप्रणाली प्रभावित करते हैं। किसी सामान्य उदाहरण को जुन्नर में प्रयुक्त दवा का नाम मान लेना उचित नहीं है।
| तुलना | प्रतिरक्षात्मक विधि | शल्य-नसबंदी |
|---|---|---|
| प्रक्रिया | टीके या अन्य निर्धारित प्रतिरक्षात्मक उपचार से प्रजनन क्षमता पर प्रभाव। | शल्यक्रिया द्वारा प्रजनन अंग या मार्ग में हस्तक्षेप। |
| अवधि | दवा, मात्रा और जीव के अनुसार बदलती है; बूस्टर की जरूरत हो सकती है। | विधि के अनुसार प्रायः स्थायी। |
| प्रतिवर्तन | हर परिस्थिति में सुनिश्चित नहीं; अध्ययन से पुष्टि आवश्यक। | प्रायः स्थायी प्रभाव के उद्देश्य से की जाती है। |
| जोखिम | पकड़ने का तनाव, उपचार की प्रतिक्रिया, व्यवहार व प्रजनन पर दीर्घकालिक प्रभाव। | पकड़ने, बेहोशी, शल्यक्रिया और संक्रमण से जुड़े जोखिम। |
| निगरानी | उसी जीव की पहचान, स्वास्थ्य, व्यवहार और प्रजनन का दीर्घकालिक अवलोकन। | शल्यक्रिया के बाद देखभाल और स्वास्थ्य की निगरानी। |
इसे जोखिम-रहित या तेंदुआ संघर्ष का सिद्ध अंतिम समाधान नहीं माना जा सकता। जन्म दर घटने का प्रभाव धीरे आता है; गाँव के पास मौजूद तेंदुओं और मनुष्यों की तात्कालिक सुरक्षा के उपाय जारी रखने पड़ते हैं।
प्रारंभिक परीक्षा के उपयोगी तथ्य
- भारतीय तेंदुआ: Panthera pardus fusca। तेंदुआ प्रजाति की वैश्विक आईयूसीएन स्थिति सुभेद्य है; भारत में वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम की अनुसूची-I और साइट्स के परिशिष्ट-I का संरक्षण प्रासंगिक है।
- संरक्षित क्षेत्र: टिपेश्वर वन्यजीव अभयारण्य—महाराष्ट्र का यवतमाल; कवाल बाघ आरक्षित क्षेत्र—तेलंगाना; नेय्यार वन्यजीव अभयारण्य—केरल।
- बीड का बाघ: वन अधिकारियों द्वारा अनौपचारिक रूप से ‘रामलिंग’ कहे गए बाघ को टिपेश्वर से निकले और तेलंगाना व धाराशिव की ओर चले जीव से जोड़ा गया है। बीड में लगभग एक सदी के बाद की उपस्थिति का दावा क्षेत्रीय रिकॉर्ड पर आधारित है।
- कनखजूरे की नई प्रजातियाँ: Rhysida quadrispinosa, Rhysida coorgensis और Rhysida neyyarensis। इनके नाम क्रमशः संरचनात्मक विशेषता, कूर्ग और नेय्यार से जुड़े हैं।
- कनखजूरे का वर्गीकरण: संघ आर्थ्रोपोडा और वर्ग चिलोपोडा। ये स्थलीय शिकारी हैं; सामने के रूपांतरित उपांग फोर्सिप्यूल कहलाते हैं और शिकार में विष पहुँचा सकते हैं।
- स्पॉट-बेलिड ईगल-आउल: वर्तमान नाम Ketupa nipalensis; पुराने स्रोतों में Bubo nipalensis भी मिलता है। कोझिकोड के जानकीकाडु और कुट्टियाडी नदी क्षेत्र में इसका फोटोग्राफिक रिकॉर्ड चर्चा में है। यह नई खोजी गई प्रजाति नहीं है।
एनसीईआरटी से संबंध
कक्षा 12, जीव विज्ञान—जैव विविधता एवं संरक्षण; कक्षा 11, भारत: भौतिक पर्यावरण—प्राकृतिक वनस्पति।
स्थिर आधार • सीधे पढ़ें
गलियारा: आवास के अलग-अलग खंडों के बीच आवाजाही संभव करने वाला परिदृश्य। इससे प्रजनन-साथी, भोजन और नए क्षेत्र मिलते हैं तथा आनुवंशिक आदान-प्रदान बना रहता है। हर गलियारा लगातार घना जंगल हो, यह आवश्यक नहीं; बीच के छोटे सुरक्षित आवास भी उपयोगी हो सकते हैं।
स्थानांतरण की सीमा: किसी तेंदुए को पकड़कर दूर छोड़ने से उसके वापस आने, नए स्थान पर संघर्ष या दूसरे जीवों से क्षेत्रीय प्रतिस्पर्धा की समस्या हो सकती है। इसलिए संघर्ष का कारण समझे बिना स्थानांतरण को नियमित समाधान बनाना उचित नहीं।
कानूनी आधार: वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम की धारा 12 वैज्ञानिक प्रबंधन जैसे विशेष उद्देश्यों के लिए शर्तबद्ध अनुमति से जुड़ी है। अनुसूची-I जीवों के मामले में केंद्र सरकार की पूर्व अनुमति प्रासंगिक है। धारा 11 में मानव जीवन के लिए खतरनाक या अन्य निर्दिष्ट स्थितियों की अलग व्यवस्था है; उसे सामान्य जनसंख्या-नियंत्रण की खुली अनुमति नहीं समझें।
मुख्य परीक्षा: सह-अस्तित्व की व्यवस्था
जुन्नर जैसे गन्ना-आधारित कृषि परिदृश्य तेंदुओं को छिपने और शिकार का अवसर देते हैं। आवास बदलने, खुले कचरे, असुरक्षित पशुशालाओं और रात की गतिविधियों से संघर्ष का जोखिम बढ़ सकता है। समाधान में सुरक्षित पशुशाला, पर्याप्त प्रकाश, विश्वसनीय चेतावनी, त्वरित मुआवजा और प्रशिक्षित प्रतिक्रिया दल का समन्वय आवश्यक है।
गर्भनिरोधक अध्ययन का आकलन केवल बच्चे कम होने से न हो। उपचार का स्वास्थ्य, व्यवहार, क्षेत्र-उपयोग और जनसंख्या की आनुवंशिक विविधता पर प्रभाव भी जाँचा जाए। कैमरा-ट्रैप, पहचान और जहाँ उपयुक्त हो कॉलर से दीर्घ निगरानी उपयोगी होगी।
बीड में बाघ की उपस्थिति बड़े आरक्षित क्षेत्रों के बाहर भी संरक्षण की आवश्यकता दिखाती है। सड़क और रेल परियोजनाओं में सुरक्षित पार-पथ, वनखंडों के बीच संपर्क और स्थानीय समुदाय को संरक्षण का लाभ मिलना चाहिए। अकेले एक बाघ के प्रवास से सभी मूल आवासों की वहन क्षमता पूरी हो जाने का निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता।
पश्चिमी घाट की नई प्रजातियाँ बताती हैं कि छोटे अकशेरुकी भी जैव विविधता का महत्वपूर्ण भाग हैं। वर्गिकी शोध, स्थानीय आवास और वनभूमि की सूक्ष्म पारिस्थितिकी को बड़े स्तनधारियों के समान अध्ययन-व्यवस्था में स्थान मिलना चाहिए।
विगत वर्ष के वास्तविक प्रश्न
UPSC 2017 • प्रारंभिक परीक्षा • सामान्य अध्ययन-I
प्रश्न 67 • प्रश्नपुस्तिका A
यदि आप घड़ियाल को उनके प्राकृतिक आवास में देखना चाहते हैं, तो निम्नलिखित में से कौन-सा स्थान सर्वोत्तम है?
मूल अंग्रेज़ी प्रश्न
If you want to see gharials in their natural habitat, which one of the following is the best place to visit?
- (a) Bhitarkanika Mangroves
- (b) Chambal River
- (c) Pulicat Lake
- (d) Deepor Beel
- (a) भितरकनिका मैन्ग्रोव
- (b) चम्बल नदी
- (c) पुलिकट झील
- (d) दीपोर बील
सही उत्तर और विस्तृत व्याख्या
सही उत्तर: (b) चम्बल नदी
चम्बल नदी में राष्ट्रीय चम्बल अभयारण्य घड़ियाल का प्रमुख प्राकृतिक आवास है। यह नदी-आधारित संरक्षण क्षेत्र मध्य प्रदेश, राजस्थान और उत्तर प्रदेश से संबंधित है। घड़ियाल मछली खाने वाला मगरमच्छ समूह का जीव है, जिसे गहरी नदी, रेतीले तट और उपयुक्त प्रजनन स्थल की आवश्यकता होती है। भितरकनिका मुख्यतः खारे पानी के मगरमच्छ के लिए प्रसिद्ध है; पुलिकट और दीपोर बील प्रश्न में घड़ियाल के लिए सर्वोत्तम विकल्प नहीं हैं।
प्रारंभिक परीक्षा अभ्यास
निम्नलिखित युग्मों पर विचार कीजिए:
- टिपेश्वर वन्यजीव अभयारण्य—महाराष्ट्र
- कवाल बाघ आरक्षित क्षेत्र—तेलंगाना
- नेय्यार वन्यजीव अभयारण्य—कर्नाटक
उपर्युक्त में से सही विकल्प चुनिए।
- (a) केवल एक
- (b) केवल दो
- (c) सभी तीन
- (d) कोई नहीं
सही उत्तर और विस्तृत व्याख्या
सही उत्तर: (b) केवल दो
युग्म 1 और 2 सही हैं। टिपेश्वर महाराष्ट्र के यवतमाल जिले में और कवाल तेलंगाना में है। तीसरा युग्म गलत है: नेय्यार केरल के तिरुवनंतपुरम जिले में है तथा अगस्त्यमलाई के परिदृश्य से संबंधित है।
मुख्य परीक्षा अभ्यास प्रश्न
भारत में मानव–वन्यजीव संघर्ष के प्रबंधन में स्थानांतरण, प्रतिरक्षात्मक गर्भनिरोध और गलियारा संरक्षण की भूमिका तथा सीमाओं की चर्चा कीजिए।
10 अंक • 150 शब्द