IWC-70 और होबार्ट घोषणापत्र: सिटासियन एवं समुद्री जैव विविधता संरक्षण
होबार्ट में 70वीं बैठक के दौरान अंतरराष्ट्रीय व्हेलिंग व्यवस्था के 80 वर्ष, होबार्ट घोषणापत्र और सिटासियन संरक्षण से जुड़े अलग-अलग प्रस्ताव चर्चा के केंद्र में रहे।
पाठ्यक्रम से सीधा संबंध
- प्रारंभिक: समुद्री पारिस्थितिकी, जैव विविधता, वन्यजीव संरक्षण और अंतरराष्ट्रीय पर्यावरण संस्थाएँ।
- मुख्य सामान्य अध्ययन–III: जैव विविधता संरक्षण, समुद्री प्रदूषण, महासागरीय पारिस्थितिकी और जलवायु परिवर्तन।
चर्चा में क्यों?
ऑस्ट्रेलिया के होबार्ट में अंतरराष्ट्रीय व्हेलिंग आयोग (International Whaling Commission—IWC) की 70वीं बैठक सम्पन्न हुई। यह अंतरराष्ट्रीय व्हेलिंग नियमन सम्मेलन (International Convention for the Regulation of Whaling—ICRW) के 80 वर्ष पूरे होने का अवसर भी था। सदस्य देशों ने सहमति से होबार्ट घोषणापत्र स्वीकार किया। भारत ने विज्ञान-आधारित सिटासियन संरक्षण और क्षेत्रीय सहयोग के प्रति प्रतिबद्धता दोहराई।
IWC-70 के प्रमुख निर्णय
आधिकारिक IWC विवरण के अनुसार होबार्ट घोषणापत्र के अलावा कुछ संरक्षण विषयों पर अलग प्रस्ताव भी लिए गए। परीक्षा में इन्हें एक ही दस्तावेज का हिस्सा न समझें।
- बायकैच और फिश-मॉ व्यापार: गैर-लक्षित समुद्री जीवों के जाल में फँसने की समस्या पर प्रस्ताव स्वीकार किया गया।
- जहाज-टक्कर: व्हेल और बड़े जहाजों के बीच घातक टक्करों के जोखिम को कम करने पर प्रस्ताव स्वीकार किया गया।
- स्ट्रैंडिंग: तट पर फँसे सिटासियन के वैज्ञानिक प्रबंधन और वैश्विक डेटाबेस के विकास पर सहमति बनी।
IWC के बारे में
- स्थापना का आधार: 1946 में हस्ताक्षरित ICRW.
- मुख्यालय: कैम्ब्रिज, यूनाइटेड किंगडम।
- भारत: 1981 में सदस्य बना; संस्थापक सदस्य नहीं था।
- व्यावसायिक व्हेलिंग पर वैश्विक अधिस्थगन: 1986 से प्रभावी।
भारत में सिटासियन संरक्षण
- व्हेल और डॉल्फ़िन जैसे सिटासियन को भारतीय वन्यजीव कानून के अंतर्गत उच्च स्तर का संरक्षण प्राप्त है।
- प्रोजेक्ट डॉल्फ़िन: नदीय और समुद्री डॉल्फ़िन के आवास संरक्षण पर केंद्रित।
- अरब सागर हंपबैक व्हेल: संकटग्रस्त प्रजाति पुनर्प्राप्ति प्रयासों में महत्त्वपूर्ण समुद्री प्रजाति।
व्हेल का पारिस्थितिक महत्त्व
व्हेल पंप
व्हेल गहरे समुद्र से पोषक तत्वों को सतही प्रकाश-युक्त परत तक पहुँचाने में मदद करती हैं। इससे फाइटोप्लांकटन और समुद्री खाद्य-जाल को लाभ हो सकता है।
जैविक कार्बन सिंक
बड़ी व्हेल अपने शरीर में कार्बन संग्रहित करती हैं। प्राकृतिक मृत्यु के बाद शरीर समुद्र तल तक पहुँचने पर कार्बन लंबे समय तक गहरे महासागर में बंद रह सकता है; इसे “व्हेल फॉल” से जोड़ा जाता है।
मुख्य संकट
- बायकैच और घोस्ट नेट।
- सोनार, अपतटीय अन्वेषण और जहाजों से समुद्री ध्वनि प्रदूषण।
- व्यस्त नौवहन मार्गों पर जहाज-टक्कर।
- जलवायु परिवर्तन से खाद्य उपलब्धता और प्रवास में बदलाव।
आगे की राह
- संवेदनशील क्षेत्रों में जहाज गति और मार्ग का गतिशील प्रबंधन।
- बायकैच-न्यूनकरण तकनीक और घोस्ट नेट हटाने के कार्यक्रम।
- राष्ट्रीय क्षेत्राधिकार से परे समुद्री जैव विविधता (BBNJ) व्यवस्था और समुद्री संरक्षित क्षेत्रों का उपयोग।
- स्ट्रैंडिंग प्रतिक्रिया और वैज्ञानिक डेटा-साझाकरण में क्षेत्रीय सहयोग।
प्रारंभिक परीक्षा अभ्यास
प्रश्न: (1) IWC की स्थापना 1946 के ICRW के अंतर्गत हुई; (2) भारत 1946 से संस्थापक सदस्य है; (3) भारत में व्हेल और डॉल्फ़िन को उच्च विधिक संरक्षण प्राप्त है। सही संयोजन: केवल 1 और 3। कथन 2 गलत है क्योंकि भारत 1981 में सदस्य बना।
मुख्य परीक्षा अभ्यास प्रश्न
प्रश्न: सिटासियन महासागरीय पारिस्थितिकी के स्वास्थ्य-सूचक होने के साथ जैविक कार्बन चक्र में भी महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उनके संरक्षण के वैश्विक और राष्ट्रीय उपायों की चर्चा कीजिए।
त्वरित पुनरावृत्ति
- IWC स्थापना आधार: ICRW, 1946
- भारत सदस्य: 1981
- व्यावसायिक व्हेलिंग अधिस्थगन: 1986
- होबार्ट घोषणापत्र: IWC की भूमिका और भविष्य पर सामूहिक वक्तव्य
- बायकैच, जहाज-टक्कर और स्ट्रैंडिंग: IWC-70 में अलग संरक्षण निर्णय