अंतर्राष्ट्रीय ई-कचरा दिवस 2026 और ‘फास्ट टेक’ का संकट
14 अक्टूबर को मनाया जाने वाला अंतर्राष्ट्रीय ई-कचरा दिवस इस बार ‘फास्ट टेक’ पर केंद्रित है—वे छोटे, सस्ते और जल्दी बदल दिए जाने वाले इलेक्ट्रॉनिक उत्पाद जो अक्सर सामान्य कचरे में चले जाते हैं और रीसाइक्लिंग व्यवस्था तक पहुँच ही नहीं पाते।
पाठ्यक्रम से सीधा संबंध
- प्रारंभिक: ई-कचरा (प्रबंधन) नियम, 2022; विस्तारित उत्पादक उत्तरदायित्व (EPR); बासेल अभिसमय।
- मुख्य GS-III: पर्यावरण प्रदूषण, चक्रीय अर्थव्यवस्था, शहरी खनन और महत्वपूर्ण खनिजों की सुरक्षा।
चर्चा में क्यों?
हर वर्ष 14 अक्टूबर को International E-Waste Day मनाया जाता है। WEEE Forum ने 2026 में Fast Tech—जैसे ईयरबड्स, चार्जिंग केबल, USB एडेप्टर, छोटे इलेक्ट्रॉनिक खिलौने और एकल-उपयोग वेप—पर ध्यान केंद्रित किया है। अभियान का सीधा संदेश है: “Don't bin it, bring it!” यानी छोटे इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों को सामान्य कूड़ेदान में न डालें, उन्हें अधिकृत संग्रह/रीसाइक्लिंग चैनल तक पहुँचाएँ।
प्रारंभिक परीक्षा के मुख्य तथ्य
- Fast Tech: कम कीमत, छोटा आकार, कम उपयोग-अवधि और बार-बार प्रतिस्थापन वाले इलेक्ट्रॉनिक उत्पाद। छोटी वस्तुएँ होने के कारण इन्हें ई-कचरा मानने की उपभोक्ता जागरूकता भी कम रहती है।
- ऐसे उत्पादों में लिथियम, तांबा, सोना, चाँदी और पैलेडियम जैसे उपयोगी संसाधन हो सकते हैं; सामान्य कचरे में जाने पर इनकी पुनर्प्राप्ति का अवसर खो जाता है।
- ई-कचरा (प्रबंधन) नियम, 2022: 1 अप्रैल 2023 से प्रभावी; उत्पादकों के लिए विस्तारित उत्पादक उत्तरदायित्व आधारित रीसाइक्लिंग लक्ष्य और CPCB के पोर्टल पर EPR प्रमाणपत्र व्यवस्था।
स्थैतिक एवं पर्यावरणीय पृष्ठभूमि
ई-कचरे में प्रमुख विषाक्त पदार्थ
- सीसा: तंत्रिका तंत्र और गुर्दों पर असर डाल सकता है।
- पारा: तंत्रिका तंत्र के लिए हानिकारक; मिनामाता रोग से जुड़ा प्रसिद्ध उदाहरण।
- कैडमियम: बैटरियों/इलेक्ट्रॉनिक घटकों में पाया जा सकता है; इटाई-इटाई रोग से जुड़ा धातु प्रदूषक।
अर्बन माइनिंग: उपयोग से बाहर इलेक्ट्रॉनिक वस्तुओं और कचरा-प्रवाह से धातुओं व खनिजों की पुनर्प्राप्ति। इसका उद्देश्य नए खनन पर दबाव घटाना और मौजूदा संसाधनों को अर्थव्यवस्था में वापस लाना है।
बासेल अभिसमय (1989): खतरनाक अपशिष्ट के सीमा-पार परिवहन और निपटान को नियंत्रित करने वाला प्रमुख अंतरराष्ट्रीय ढाँचा।
मुख्य परीक्षा के लिए विश्लेषण
भारत की प्रमुख चुनौतियाँ
- अनौपचारिक क्षेत्र: बड़ी मात्रा में ई-कचरा असंगठित कबाड़ी और छोटे रीसाइक्लिंग नेटवर्क तक पहुँचता है, जहाँ एसिड बाथ और खुले में जलाने जैसी असुरक्षित प्रक्रियाएँ स्वास्थ्य तथा पर्यावरण को नुकसान पहुँचा सकती हैं।
- संग्रह की कमजोरी: छोटे उपकरणों के लिए सुविधाजनक take-back और जमा-बिंदु पर्याप्त दिखाई नहीं देते; उपभोक्ता आर्थिक प्रोत्साहन भी सीमित है।
- डिजाइन समस्या: बंद बैटरी, चिपके हुए हिस्से और मरम्मत में कठिनाई उत्पादों की आयु घटाते हैं।
आगे की राह
मरम्मत के अधिकार को मजबूत करना, मॉड्यूलर डिजाइन, जमा-वापसी प्रोत्साहन, अधिकृत संग्रह नेटवर्क, उत्पादक जवाबदेही का कड़ाई से पालन और अनौपचारिक रीसाइकिलरों को सुरक्षित औपचारिक सूक्ष्म-उद्यमों से जोड़ना—चक्रीय अर्थव्यवस्था की दिशा में ज्यादा व्यावहारिक रास्ता है।
PYQ से संबंध
इस विषय को EPR, अपशिष्ट प्रबंधन नियम, प्रदूषण, चक्रीय अर्थव्यवस्था और संसाधन दक्षता से जुड़े UPSC प्रश्नों की स्थायी थीम के रूप में पढ़ें।
अभ्यास प्रश्न
प्रारंभिक प्रश्न
भारत के ई-कचरा (प्रबंधन) नियम, 2022 के संदर्भ में विचार कीजिए:
- ये नियम उत्पादकों के लिए विस्तारित उत्पादक उत्तरदायित्व के लक्ष्य निर्धारित करते हैं।
- कैडमियम प्रदूषण इटाई-इटाई रोग से जुड़ा है।
- भारत में ई-कचरे का 90% से अधिक हिस्सा सीधे सरकारी आधुनिक रीसाइक्लिंग संयंत्रों द्वारा प्रसंस्कृत किया जाता है।
उत्तर: केवल 1 और 2। कथन 3 गलत है।
मुख्य परीक्षा प्रश्न
“इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों का ‘उपभोग करो और फेंको’ मॉडल भारत की खनिज सुरक्षा और पर्यावरण दोनों के लिए जोखिम है।” फास्ट टेक के संदर्भ में EPR की प्रभावशीलता और चक्रीय अर्थव्यवस्था की संभावनाओं का परीक्षण कीजिए। (250 शब्द, 15 अंक)
त्वरित पुनरावृत्ति
- 14 अक्टूबर → International E-Waste Day
- 2026 फोकस → Fast Tech
- भारत → E-Waste (Management) Rules, 2022; प्रभावी 1 अप्रैल 2023
- EPR → उत्पादक की संग्रह/रीसाइक्लिंग जिम्मेदारी
- Urban Mining → पुराने इलेक्ट्रॉनिक्स से मूल्यवान संसाधनों की पुनर्प्राप्ति
- Basel Convention → hazardous waste के सीमा-पार परिवहन का नियंत्रण