अंतर्राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण दिवस 2026 और सेंडाई फ्रेमवर्क
13 अक्टूबर को मनाया जाने वाला अंतर्राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण दिवस 2026 ‘Resilience Starts at Home’ पर केंद्रित है। विषय का केंद्र सुरक्षित आवास, जोखिम-सूचित भूमि उपयोग, भवन मानक, प्रारंभिक चेतावनी और परिवार स्तर की तैयारी है।
पाठ्यक्रम से सीधा संबंध
- प्रारंभिक: सेंडाई फ्रेमवर्क 2015–2030, चार प्राथमिकताएँ, सात वैश्विक लक्ष्य, बहु-खतरा प्रारंभिक चेतावनी, NDMA/SDMA/DDMA।
- मुख्य GS-III: आपदा एवं आपदा प्रबंधन, जलवायु-प्रेरित चरम घटनाएँ, जोखिम-सहनीय अवसंरचना, शमन, तैयारी और पुनर्निर्माण।
चर्चा में क्यों?
संयुक्त राष्ट्र आपदा जोखिम न्यूनीकरण कार्यालय (UNDRR) ने 2026 के लिए आधिकारिक विषय “Resilience Starts at Home” — “आपदा-प्रतिरोधक क्षमता घर से शुरू होती है” रखा है। यह घर को केवल निजी संपत्ति नहीं, बल्कि आपदा जोखिम, असमानता, बीमा, भूमि उपयोग, भवन गुणवत्ता और प्रारंभिक चेतावनी से जुड़ी बुनियादी इकाई के रूप में देखता है।
तथ्य-सुधार: “Fund Resilience, Not Disasters” 2025 के IDDRR का विषय था, 2026 का नहीं। 2026 की तैयारी में दोनों को मिलाकर पढ़ना भ्रम पैदा कर सकता है; परीक्षा में 2026 के लिए केवल “Resilience Starts at Home” याद रखें।
प्रारंभिक परीक्षा के मुख्य तथ्य
- दिन: हर वर्ष 13 अक्टूबर। इसकी शुरुआत 1989 में संयुक्त राष्ट्र महासभा के आह्वान के बाद वैश्विक जोखिम-जागरूकता और आपदा न्यूनीकरण संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए हुई।
- सेंडाई फ्रेमवर्क: 2015–2030 की अवधि का वैश्विक आपदा जोखिम न्यूनीकरण ढाँचा; जापान के सेंडाई में तीसरे संयुक्त राष्ट्र विश्व सम्मेलन में 18 मार्च 2015 को अपनाया गया।
- स्वरूप: स्वैच्छिक और गैर-बाध्यकारी; यह कानूनी दंड वाली संधि नहीं है।
- चार प्राथमिकताएँ: (1) आपदा जोखिम को समझना, (2) जोखिम शासन को मजबूत करना, (3) लचीलेपन के लिए जोखिम न्यूनीकरण में निवेश, (4) प्रभावी प्रतिक्रिया की तैयारी और पुनर्प्राप्ति/पुनर्वास/पुनर्निर्माण में Build Back Better।
- सात लक्ष्य A–G: मृत्यु घटाना; प्रभावित लोगों की संख्या घटाना; प्रत्यक्ष आर्थिक नुकसान घटाना; महत्वपूर्ण अवसंरचना और बुनियादी सेवाओं की क्षति घटाना; राष्ट्रीय/स्थानीय DRR रणनीतियाँ बढ़ाना; विकासशील देशों के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग बढ़ाना; बहु-खतरा प्रारंभिक चेतावनी और जोखिम सूचना तक पहुँच बढ़ाना।
स्थैतिक एवं वैचारिक पृष्ठभूमि
भारत का संस्थागत ढाँचा: आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 के तहत राष्ट्रीय स्तर पर NDMA की अध्यक्षता प्रधानमंत्री करते हैं; राज्य स्तर पर SDMA की अध्यक्षता मुख्यमंत्री और जिला स्तर पर DDMA की भूमिका जिला प्रशासन के साथ जुड़ी है। NDRF विशेषीकृत आपदा प्रतिक्रिया बल है।
खतरा ≠ आपदा: भूकंप, चक्रवात या बाढ़ ‘खतरा’ हो सकते हैं; वे तब विनाशकारी आपदा बनते हैं जब उच्च exposure और vulnerability उनसे मिलते हैं। इसलिए विकास-नीति में risk-informed planning महत्त्वपूर्ण है।
Build Back Better: पुनर्निर्माण का लक्ष्य केवल टूटा ढाँचा पहले जैसा बनाना नहीं, बल्कि भविष्य के जोखिम को कम करते हुए अधिक सुरक्षित, समावेशी और लचीली व्यवस्था बनाना है।
मुख्य परीक्षा के लिए विस्तृत विश्लेषण
1. 2026 विषय का नीति-अर्थ
घर वह स्थान है जहाँ बाढ़, भूकंप, चक्रवात, हीटवेव और आग का जोखिम सबसे व्यक्तिगत रूप में महसूस होता है। सुरक्षित आवास के लिए भवन कोड, जोखिम-सूचित भूमि उपयोग, सस्ती वित्तीय सहायता, बीमा और समय पर चेतावनी एक-दूसरे से जुड़े हैं। केवल परिवार को जिम्मेदार ठहराना पर्याप्त नहीं; सरकार, निजी क्षेत्र और स्थानीय संस्थाओं की भी भूमिका है।
2. भारत में राहत से लचीलापन की ओर बदलाव
पुराना मॉडल आपदा के बाद राहत और मुआवजे पर केंद्रित था। आधुनिक DRR दृष्टिकोण जोखिम मानचित्रण, पूर्व चेतावनी, शमन निवेश, सुरक्षित अवसंरचना, समुदाय-आधारित तैयारी और आपदा के बाद बेहतर पुनर्निर्माण को समान महत्व देता है।
3. शहरी जोखिम
कंक्रीटीकरण, जलनिकासी पर अतिक्रमण, आर्द्रभूमि क्षरण और जोखिम-सूचना के बिना निर्माण शहरी बाढ़ तथा हीटवेव का प्रभाव बढ़ाते हैं। नगर नियोजन में floodplain zoning, blue-green infrastructure, permeable surfaces और स्थानीय जोखिम मानचित्र जोड़े जाने चाहिए।
4. हिमालयी क्षेत्र
भूस्खलन, ग्लेशियर झील विस्फोट बाढ़, तीव्र वर्षा और भूकंपीय जोखिम के बीच ढाल-कटान तथा अनियोजित निर्माण vulnerability बढ़ाते हैं। carrying capacity, slope-sensitive building codes और real-time monitoring जरूरी हैं।
5. सामाजिक न्याय
कम आय वाले परिवार अक्सर कमजोर घरों, जोखिमग्रस्त भूमि और सीमित बीमा/बचत के कारण अधिक प्रभावित होते हैं। इसलिए disaster resilience को आवास, सामाजिक सुरक्षा और जलवायु-अनुकूलन नीति से अलग नहीं देखा जा सकता।
अतिरिक्त परीक्षा-सामग्री और उत्तर-लेखन मूल्यवर्धन
- 2026 उत्तर-लेखन बिंदु: “Safe home” को building code + land-use planning + early warning + risk financing + insurance + community preparedness के संयुक्त परिणाम के रूप में लिखें।
- Sendai का प्रमुख बदलाव: disaster management से disaster risk management की ओर—यानी घटना के बाद प्रतिक्रिया से पहले से जोखिम घटाने पर बल।
- स्थानीयकरण: ग्राम पंचायत/शहरी वार्ड स्तर पर जोखिम मानचित्र, evacuation route, vulnerable persons registry और mock drills वास्तविक क्षमता बढ़ाते हैं।
- PYQ-थीम कनेक्शन: UPSC आपदा प्रतिक्रिया से शमन, समुदाय की भूमिका, early warning, urban floods और resilient infrastructure जैसे विषय बार-बार पूछता है।
अभ्यास प्रश्न
प्रारंभिक प्रश्न
सेंडाई फ्रेमवर्क के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: (1) यह कानूनी रूप से बाध्यकारी संधि है। (2) इसमें चार Priorities for Action हैं। (3) बहु-खतरा प्रारंभिक चेतावनी तक पहुँच बढ़ाना इसके वैश्विक लक्ष्यों में है।
उत्तर: केवल 2 और 3। कथन 1 गलत है—यह स्वैच्छिक, गैर-बाध्यकारी ढाँचा है।
मुख्य परीक्षा प्रश्न
“आपदा प्राकृतिक खतरे से नहीं, बल्कि खतरे और मानवजनित vulnerability के मेल से बनती है।” सेंडाई फ्रेमवर्क और 2026 की ‘Resilience Starts at Home’ थीम के संदर्भ में भारत की आपदा जोखिम न्यूनीकरण रणनीति का समालोचनात्मक मूल्यांकन कीजिए। (250 शब्द, 15 अंक)
त्वरित पुनरावृत्ति
- IDDRR → 13 अक्टूबर
- 2026 theme → Resilience Starts at Home
- 2025 theme → Fund Resilience, Not Disasters
- Sendai → 2015–2030; स्वैच्छिक, गैर-बाध्यकारी
- Priorities → 4; Global Targets → 7 (A–G)
- मुख्य मंत्र → Risk understanding + governance + investment + preparedness/Build Back Better