कैद में प्रजनित गोडावण को जंगल में छोड़ने की प्रक्रिया: मरुस्थलीय राष्ट्रीय उद्यान में नया संरक्षण चरण
वन्यजीव सप्ताह 2026 के दौरान मरुस्थलीय राष्ट्रीय उद्यान, जैसलमेर में कैद में प्रजनित दो गोडावण को सॉफ्ट-रिलीज सुविधा से प्राकृतिक आवास में छोड़ने की प्रक्रिया शुरू की गई।
पाठ्यक्रम से सीधा संबंध
- प्रारंभिक: गोडावण, मरुस्थलीय राष्ट्रीय उद्यान, संरक्षण स्थिति, कैद-प्रजनन।
- मुख्य: संकटग्रस्त प्रजाति संरक्षण, पुनर्प्रवेश, आवास प्रबंधन और वैज्ञानिक निगरानी।
चर्चा में क्यों?
लगभग 10 वर्षों के संरक्षण प्रयासों के बाद कैद में प्रजनित दो गोडावण को प्राकृतिक आवास में पुनर्प्रवेश की दिशा में आगे बढ़ाया गया। 3 अक्टूबर को प्रक्रिया की शुरुआत हुई और वास्तविक रिलीज 4 अक्टूबर के लिए निर्धारित की गई।
गोडावण के बारे में
गोडावण या ग्रेट इंडियन बस्टर्ड भारत के शुष्क और अर्ध-शुष्क घासभूमि पारितंत्र का प्रमुख पक्षी है। इसकी बहुत छोटी जंगली आबादी मुख्यतः राजस्थान में केंद्रित है।
सॉफ्ट रिलीज का अर्थ
सॉफ्ट रिलीज में किसी कैद-प्रजनित जीव को सीधे पूरी तरह खुले जंगल में छोड़ने से पहले नियंत्रित प्राकृतिक परिवेश में अनुकूलन का समय दिया जाता है। इससे भोजन खोज, शिकारी से बचाव और स्थानीय पर्यावरण के अनुरूप व्यवहार विकसित करने में सहायता मिलती है।
संरक्षण की प्रमुख चुनौतियाँ
- आवास ह्रास और विखंडन
- ऊँची विद्युत लाइनों से टकराव
- धीमी प्रजनन दर
- मानव गतिविधियों का दबाव
स्थैतिक पृष्ठभूमि: गोडावण
गोडावण या ग्रेट इंडियन बस्टर्ड (Great Indian Bustard—GIB) का वैज्ञानिक नाम Ardeotis nigriceps है। यह भारत के शुष्क और अर्ध-शुष्क खुले घासभूमि एवं झाड़ीदार पारितंत्रों से जुड़ा अत्यंत संकटग्रस्त पक्षी है। वन्यजीव संस्थान के अनुसार यह विश्व के दुर्लभतम पक्षियों में से एक है और भारत में इसका प्रमुख शेष परिदृश्य राजस्थान के थार क्षेत्र में है।
यह खुली प्राकृतिक भूमि, कम ऊँचाई वाली घासभूमि, खुली झाड़ियाँ और वर्षा-आधारित कृषि क्षेत्र का उपयोग करता है। इसलिए इसे केवल “रेगिस्तान का पक्षी” मानना अधूरा है; इसका संरक्षण भारत की उपेक्षित घासभूमि पारिस्थितिकी से भी जुड़ा है।
संरक्षण स्थिति
- वैज्ञानिक नाम: Ardeotis nigriceps
- IUCN स्थिति: Critically Endangered
- वन्यजीव संरक्षण: वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम के सर्वोच्च संरक्षण वाले अनुसूची ढाँचे में संरक्षित प्रजाति।
- मुख्य परिदृश्य: थार मरुस्थल, विशेषकर जैसलमेर–राजस्थान क्षेत्र।
- प्रमुख खतरे: आवास ह्रास, खुले प्राकृतिक पारितंत्रों का रूपांतरण, मानव-जनित मृत्यु, विद्युत तारों से टकराव और धीमी जीवन-इतिहास दर।
Project GIB की पृष्ठभूमि
पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने 2013 में राष्ट्रीय बस्टर्ड रिकवरी योजना तैयार की और 2016 में Great Indian Bustard Habitat Improvement and Conservation Breeding Programme शुरू किया। वन्यजीव संस्थान प्रमुख तकनीकी भागीदार रहा है। 2018 में मंत्रालय, राजस्थान वन विभाग और WII के बीच संरक्षण प्रजनन कार्यक्रम के लिये त्रिपक्षीय समझौता हुआ।
जैसलमेर क्षेत्र में Sam और Ramdevra से जुड़े संरक्षण प्रजनन ढाँचे विकसित किए गए। कैद में प्रजनन केवल “चिड़ियाघर में संख्या बढ़ाने” का कार्यक्रम नहीं, बल्कि भविष्य के वैज्ञानिक पुनर्वन्यीकरण के लिये सुरक्षित संस्थापक आबादी तैयार करने का प्रयास है।
2026 का नया चरण: कैद से जंगल तक
- दो कैद-प्रजनित गोडावण को soft-release सुविधा से प्राकृतिक आवास में छोड़ने की प्रक्रिया शुरू की गई।
- 86 पक्षी कैद-प्रजनन आबादी में बनाए जा रहे थे और 11 को जंगली पुनर्प्रवेश के लिये चिह्नित किया गया।
- 2025 में 24 और 2026 में 29 जीवित चूजे कैद-प्रजनन से प्राप्त हुए।
- राजस्थान में लगभग 200 वर्ग किमी घासभूमि क्षेत्र को बाड़बंद संरक्षण क्षेत्र के रूप में विकसित किया गया, जिसे दीर्घकालिक टेलीमेट्री अध्ययनों ने महत्वपूर्ण प्रजनन आवास के रूप में चिन्हित किया।
Soft Release और Hard Release में अंतर
Soft Release में जीव को सीधे पूरी तरह खुले जंगल में छोड़ने से पहले अर्ध-प्राकृतिक नियंत्रित परिवेश में स्थानीय मौसम, भोजन, शिकारी और स्थल-परिस्थितियों के अनुकूल होने का अवसर दिया जाता है। Hard Release में संक्रमण अवधि बहुत कम या नहीं होती। संवेदनशील कैद-प्रजनित प्रजातियों के लिये soft release जीवित रहने की संभावना बढ़ा सकती है।
Jumpstart Approach क्या है?
इस संरक्षण रणनीति में कैद में रखी मादा द्वारा दिये गए अंडों को चयनित जंगली घोंसलों में रखा जाता है, ताकि जंगली मादा उन्हें से सके और चूजे प्राकृतिक परिवेश में पले-बढ़ें। 2026 में राजस्थान और गुजरात में इस पद्धति से सफल हैचिंग दर्ज की गई। इसका उद्देश्य कैद-प्रजनन और जंगली व्यवहार के बीच वैज्ञानिक पुल बनाना तथा संस्थापक आनुवंशिक विविधता को मजबूत करना है।
प्रारंभिक परीक्षा के उच्च-मूल्य तथ्य
- गोडावण — Ardeotis nigriceps.
- IUCN — Critically Endangered.
- मुख्य भारतीय परिदृश्य — थार, राजस्थान।
- Desert National Park — राजस्थान के जैसलमेर–बाड़मेर क्षेत्र से संबंधित।
- घासभूमि को “बेकार भूमि” मानना पारिस्थितिक दृष्टि से गलत है; गोडावण जैसे पक्षी खुले प्राकृतिक पारितंत्र पर निर्भर हैं।
- कैद-प्रजनन, soft release, habitat restoration और power-line mitigation—चारों संरक्षण रणनीति के अलग घटक हैं।
मुख्य परीक्षा: गोडावण संरक्षण की प्रमुख चुनौतियाँ
आवास विखंडन: सड़क, कृषि विस्तार, ऊर्जा परियोजना और अन्य भूमि उपयोग परिवर्तन खुले आवास को खंडित कर सकते हैं। विद्युत तार: बड़े शरीर और सीमित अग्र-दृष्टि वाले पक्षी ऊँचे तारों से टकराने के प्रति संवेदनशील हो सकते हैं। धीमी प्रजनन दर: छोटी आबादी में प्रत्येक वयस्क और प्रत्येक सफल प्रजनन घटना का संरक्षण महत्व बहुत अधिक हो जाता है।
समाधान: महत्वपूर्ण आवास की कानूनी/प्रबंधकीय सुरक्षा, संवेदनशील विद्युत लाइनों पर वैज्ञानिक शमन, स्थानीय समुदायों के साथ प्रोत्साहन आधारित संरक्षण, घासभूमि को पारिस्थितिक संपदा मानना और कैद-प्रजनन को जंगली आवास संरक्षण का विकल्प नहीं बल्कि पूरक बनाना।
परीक्षा में संभावित भ्रम
- गोडावण और Lesser Florican अलग प्रजातियाँ हैं।
- गोडावण घने वन का पक्षी नहीं; खुले शुष्क/अर्ध-शुष्क पारितंत्र से जुड़ा है।
- कैद-प्रजनन = अंतिम समाधान नहीं; जंगली आवास सुरक्षित रहना अनिवार्य है।
- Soft release में अनुकूलन चरण होता है; सीधे छोड़ना इसका उद्देश्य नहीं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
1. गोडावण का वैज्ञानिक नाम क्या है?
Ardeotis nigriceps.
2. इसकी IUCN स्थिति क्या है?
Critically Endangered.
3. 2026 की खबर किस संरक्षित क्षेत्र से जुड़ी है?
मरुस्थलीय राष्ट्रीय उद्यान, जैसलमेर।
4. संरक्षण प्रजनन का लक्ष्य क्या है?
सुरक्षित कैद आबादी बनाना और वैज्ञानिक तरीके से भविष्य में जंगली आबादी को पुनर्स्थापित करना।
मुख्य परीक्षा अभ्यास प्रश्न
प्रश्न: संकटग्रस्त प्रजातियों के संरक्षण में कैद-प्रजनन और वैज्ञानिक पुनर्प्रवेश कार्यक्रमों की भूमिका तथा सीमाओं की चर्चा कीजिए।
त्वरित पुनरावृत्ति
- स्थान: मरुस्थलीय राष्ट्रीय उद्यान, जैसलमेर
- प्रजाति: गोडावण
- प्रक्रिया: कैद-प्रजनन → सॉफ्ट रिलीज → जंगली आवास
- संदर्भ: वन्यजीव सप्ताह 2026