BS-VII की प्रस्तावित रूपरेखा और काकीनाडा ग्रीन अमोनिया परियोजना
भारत की परिवहन नीति अब केवल टेलपाइप धुएँ तक सीमित नहीं रह सकती। अक्टूबर 2026 में प्रकाशित मसौदा BS-VII नियमों ने ब्रेक, टायर और वाहन-जीवनचक्र जैसे नए प्रदूषण आयामों को केंद्र में लाया है; इसी समय काकीनाडा की 1.1 मिलियन टन वार्षिक ग्रीन अमोनिया परियोजना को ADB–Japan समर्थन मिला है।
चर्चा में क्यों?
सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने केंद्रीय मोटर वाहन नियमों में संशोधन के लिए मसौदा अधिसूचनाएँ प्रकाशित की हैं, जिनमें अलग-अलग वाहन श्रेणियों के लिए Bharat Stage-VII (BS-VII) मानक प्रस्तावित हैं। यात्री कारों और एसयूवी के लिए चरणबद्ध संक्रमण 2029 से आगे बढ़ने की दिशा में है। साथ ही Asian Development Bank (ADB) और जापान समर्थित वित्तपोषण के तहत आंध्र प्रदेश के काकीनाडा में AM Green Ammonia की लगभग 1.1 मिलियन टन वार्षिक क्षमता वाली परियोजना को समर्थन मिला है।
BS-VII: प्रदूषण नियंत्रण का अगला चरण
- BS-VI भारत में अप्रैल 2020 से लागू है; भारत ने BS-V को छोड़कर सीधे BS-VI अपनाया था।
- BS-VII मसौदों में PN10 अर्थात 10 नैनोमीटर तक के कणों की संख्या मापने का प्रावधान सामने आता है, जिससे अति-सूक्ष्म कण भी नियमन में आते हैं।
- नई दिशा non-exhaust emissions पर भी है—ब्रेक घिसाव, टायर घर्षण तथा इलेक्ट्रिक वाहनों में बैटरी टिकाऊपन जैसे पहलू Euro 7 के अनुरूप नीति-विमर्श का हिस्सा हैं।
- इलेक्ट्रिक वाहन टेलपाइप उत्सर्जन नहीं करते, पर वे शून्य-प्रदूषण वाहन नहीं हैं; टायर, ब्रेक, सड़क-धूल और बैटरी जीवनचक्र महत्वपूर्ण बने रहते हैं।
क्यों महत्वपूर्ण?
जैसे-जैसे इंजन-उत्सर्जन घटता है, शहरी PM प्रदूषण में गैर-निकास स्रोतों का सापेक्ष महत्व बढ़ता है। इसलिए अगली पीढ़ी का वाहन-नियमन “इंजन” से आगे बढ़कर पूरे वाहन-जीवनचक्र को देखता है।
काकीनाडा ग्रीन अमोनिया और ACCEL
- परियोजना काकीनाडा, आंध्र प्रदेश में है और इसकी नियोजित क्षमता लगभग 1.1 मिलियन टन प्रति वर्ष है।
- ADB के अनुसार परियोजना नवीकरणीय बिजली, ग्रीन हाइड्रोजन, अमोनिया संश्लेषण, भंडारण और बंदरगाह-आधारित निर्यात लॉजिस्टिक्स को एकीकृत करती है।
- यह ACCEL — Action for Creating Energy Security for Long-term Resilience के तहत पहला निवेश है; जापान समर्थित LEAP 2 के माध्यम से वित्तपोषण जुड़ा है।
- अमोनिया (NH₃) हाइड्रोजन का उपयोगी वाहक है: इसे हाइड्रोजन की तुलना में अपेक्षाकृत आसानी से द्रवित और जहाजों से ले जाया जा सकता है।
मुख्य परीक्षा हेतु विश्लेषण
पहला आयाम—स्वच्छ परिवहन: BS-VII उद्योग को केवल इंजन दक्षता नहीं, बल्कि सामग्री, टायर, ब्रेक, ऑन-बोर्ड निगरानी और बैटरी गुणवत्ता में भी निवेश के लिए प्रेरित करेगा। इससे R&D लागत बढ़ सकती है, पर दीर्घकाल में स्वास्थ्य-लाभ, तकनीकी उन्नयन और निर्यात-संगत मानक मिलेंगे।
दूसरा आयाम—स्वच्छ औद्योगिक ईंधन: ग्रीन अमोनिया उर्वरक, समुद्री ईंधन और ऊर्जा-गहन उद्योगों के डीकार्बोनाइजेशन में उपयोगी हो सकता है। भारत के लिए बंदरगाह आधारित परियोजनाएँ निर्यात, रोजगार और हरित हाइड्रोजन मूल्य-श्रृंखला का आधार बन सकती हैं।
नीतिगत प्राथमिकता: मानक कठोर हों, पर उद्योग को परीक्षण अवसंरचना और स्पष्ट समयसीमा मिले; साथ ही ग्रीन अमोनिया के लिए अतिरिक्त नवीकरणीय ऊर्जा, जल उपयोग, सुरक्षा और वास्तविक जीवन-चक्र उत्सर्जन पर निगरानी आवश्यक है।
परीक्षा अभ्यास
प्रारंभिक परीक्षा अभ्यास
प्रश्न: BS-VII के संदर्भ में निम्न कथनों पर विचार कीजिए— (1) PN10 अति-सूक्ष्म कणों के मापन से संबंधित है। (2) इलेक्ट्रिक वाहन गैर-निकास उत्सर्जन के कारण नियमन के दायरे में आ सकते हैं। सही उत्तर: दोनों कथन सही।
मुख्य परीक्षा अभ्यास
“वाहन प्रदूषण नियंत्रण का अगला चरण टेलपाइप से आगे बढ़कर गैर-निकास उत्सर्जन और जीवनचक्र नियमन का है।” प्रस्तावित BS-VII मानकों के संदर्भ में चर्चा कीजिए। (150 शब्द, 10 अंक)