यूनेस्को अस्थायी सूची: बाराटांग, अंडमान ज्वालामुखी, सिरपुर और गोविषाण
भारत के तीन नए यूनेस्को अस्थायी सूची स्थलों, बाराटांग की कार्स्ट-मड ज्वालामुखीय भू-आकृति, बैरन–नारकोंडम, सिरपुर और काशीपुर के गोविषाण उत्खनन का परीक्षा-उपयोगी अध्ययन।
चर्चा में क्यों?
भारत ने 28 सितंबर 2026 को तीन स्थलों को यूनेस्को की विश्व धरोहर अस्थायी सूची (अस्थायी सूची (Tentative List)) में जोड़ा—अंडमान एवं निकोबार का बाराटांग कार्स्ट–मड-वोल्केनो कॉम्प्लेक्स, अंडमान सबडक्शन ज्वालामुखी तथा छत्तीसगढ़ का सिरपुर सांस्कृतिक एवं पुरातात्विक परिदृश्य। इसके साथ भारत की अस्थायी सूची में स्थलों की संख्या 81 हो गई। इसी समय उत्तराखंड के काशीपुर में राष्ट्रीय महत्त्व के गोविषाण टीले पर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण की नई खुदाई भी चर्चा में है।
तीन नए अस्थायी सूची स्थल
| स्थल | श्रेणी | परीक्षा के लिए मुख्य बात |
|---|---|---|
| बाराटांग कार्स्ट–मड-वोल्केनो कॉम्प्लेक्स | प्राकृतिक | चूना-पत्थर की कार्स्ट संरचनाएँ और गैर-मैग्मैटिक मड ज्वालामुखी; अंडमान का सक्रिय विवर्तनिक परिवेश। |
| अंडमान सबडक्शन ज्वालामुखी | प्राकृतिक | बैरन और नारकोंडम द्वीप; अंडमान ज्वालामुखीय चाप और प्लेट क्षेपण से संबंध। |
| सिरपुर सांस्कृतिक एवं पुरातात्विक परिदृश्य | सांस्कृतिक | महानदी के पूर्वी तट पर प्राचीन श्रीपुर; ईंट-निर्मित लक्ष्मण मंदिर, बौद्ध विहार और बहुधार्मिक सांस्कृतिक परिदृश्य। |
सिरपुर महासमुंद जिले में स्थित है। यूनेस्को के नामांकन विवरण में इसे व्यापारिक संपर्क, स्थापत्य जटिलता और हिंदू-बौद्ध-जैन परंपराओं से आकार लिए बहुधार्मिक परिदृश्य के रूप में रेखांकित किया गया है। यहाँ का भू-दृश्य प्रोटेरोज़ोइक छत्तीसगढ़ बेसिन और प्राचीन स्ट्रोमैटोलाइट संरचनाओं से भी जुड़ा है।
भूगोल का जरूरी आधार
इस समाचार को समझने के लिए तीन मूल अवधारणाएँ पर्याप्त हैं। क्षेपण (अधोगमन (Subduction)) में एक विवर्तनिक प्लेट दूसरी के नीचे धँसती है; अंडमान क्षेत्र भारतीय प्लेट और बर्मा माइक्रोप्लेट की जटिल सीमा से जुड़ा है। इसी कारण यहाँ भूकंपीयता, ज्वालामुखीय चाप और समुद्री गर्त जैसी विशेषताएँ मिलती हैं।
कार्स्ट स्थलाकृति घुलनशील चूना-पत्थर पर जल की रासायनिक क्रिया से विकसित होती है; गुफाएँ, स्टैलेक्टाइट और स्टैलेग्माइट इसके सामान्य रूप हैं। दूसरी ओर मड ज्वालामुखी को मैग्माई ज्वालामुखी न समझें—इनसे सामान्यतः कीचड़, पानी और गैसें निकलती हैं; बैरन द्वीप जैसे ज्वालामुखी में मैग्मा/लावा उद्गार की प्रक्रिया अलग है। यही बुनियादी प्लेट-विवर्तनिकी और कार्स्ट अवधारणा इस करंट अफेयर्स का स्थिर भूगोल है।
सिरपुर और गोविषाण: पुरातत्व का अर्थ
सिरपुर में लक्ष्मण मंदिर भारत के महत्त्वपूर्ण प्राचीन ईंट मंदिरों में गिना जाता है। साथ ही आनंदप्रभु कुटी विहार और अन्य अवशेष बताते हैं कि यह केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि प्राचीन नगरीय, व्यापारिक और बहुधार्मिक केंद्र था।
गोविषाण टीला, काशीपुर (ऊधम सिंह नगर) राष्ट्रीय महत्त्व का संरक्षित पुरातात्विक स्थल है। 2026 की खुदाई में ईंट-निर्मित संरचनाएँ और कुएँ जैसी गोलाकार संरचना सामने आई है, लेकिन पुरातत्वविदों ने उसकी निश्चित तिथि पर अभी सावधानी बरती है। पुराने उत्खनन और दस्तावेज़ यहाँ चित्रित धूसर मृदभांड (PGW) काल से आरंभिक मध्यकाल तक सांस्कृतिक अनुक्रम तथा पंचायतन मंदिर परिसर के प्रमाण बताते हैं। परीक्षा में “महाभारत से जुड़ा सिद्ध स्थल” जैसी अतिशयोक्ति के बजाय पुरातात्विक साक्ष्य और साहित्यिक परंपरा को अलग-अलग पढ़ना अधिक सही है।
यूनेस्को व्यवस्था और तथ्य-सुधार
विश्व सांस्कृतिक एवं प्राकृतिक धरोहर संरक्षण अभिसमय 1972 के अंतर्गत विश्व धरोहर सूची संचालित होती है। किसी स्थल के चयन में उत्कृष्ट सार्वभौमिक मूल्य (Outstanding Universal Value) और निर्धारित सांस्कृतिक/प्राकृतिक मानदंड महत्त्वपूर्ण हैं।
अस्थायी सूची और पूर्ण विश्व धरोहर सूची को अलग रखें: आज की खबर के तीनों नए स्थल अभी अस्थायी सूची में हैं, पूर्ण विश्व धरोहर सूची में नहीं।
मुख्य परीक्षा विश्लेषण
भू-विरासत की पहचान: भारत की विरासत नीति लंबे समय तक स्थापत्य और पुरातात्विक स्मारकों पर अधिक केंद्रित रही है। बाराटांग और अंडमान ज्वालामुखीय चाप का नामांकन भू-विविधता, सक्रिय विवर्तनिकी और द्वीपीय पारिस्थितिकी को संरक्षण विमर्श में आगे लाता है।
संस्कृति को परिदृश्य की तरह देखना: सिरपुर का महत्त्व केवल लक्ष्मण मंदिर तक सीमित नहीं है; नदी, व्यापार, बस्ती, बौद्ध विहार, शैव-वैष्णव परंपरा और जैन उपस्थिति मिलकर सांस्कृतिक परिदृश्य बनाते हैं।
चुनौती: अंडमान में भू-पर्यटन बढ़ाने की इच्छा को संवेदनशील द्वीपीय पारिस्थितिकी और आदिवासी क्षेत्रों की सुरक्षा के साथ संतुलित करना होगा। पुरातात्विक स्थलों पर भी लोकप्रिय कथाओं की तुलना में वैज्ञानिक उत्खनन, स्तरीकरण, दिनांकन और संरक्षण को प्राथमिकता आवश्यक है।
विगत वर्ष का वास्तविक प्रश्न
UPSC प्रारंभिक परीक्षा 2018
निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- बैरेन द्वीप ज्वालामुखी एक सक्रिय ज्वालामुखी है जो भारतीय राज्य-क्षेत्र में स्थित है।
- बैरेन द्वीप, ग्रेट निकोबार के लगभग 140 किमी पूर्व में स्थित है।
- पिछली बार बैरेन द्वीप ज्वालामुखी में 1991 में उद्गार हुआ था और तब से यह निष्क्रिय बना हुआ है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
- (a) केवल 1
- (b) केवल 2 और 3
- (c) केवल 3
- (d) 1 और 3
सही उत्तर और विस्तृत व्याख्या
सही उत्तर: (a) केवल 1
बैरेन द्वीप भारतीय क्षेत्र में स्थित सक्रिय ज्वालामुखी है। दूसरा कथन गलत है क्योंकि लगभग 140 किमी वाला संदर्भ पोर्ट ब्लेयर से उत्तर-पूर्व दिशा का है, ग्रेट निकोबार से नहीं। तीसरा कथन भी गलत है क्योंकि 1991 के बाद भी बैरेन द्वीप ने कई बार ज्वालामुखीय सक्रियता दिखाई।
प्रारंभिक परीक्षा अभ्यास
हाल में यूनेस्को की अस्थायी सूची में शामिल भारतीय स्थलों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- बाराटांग के मड ज्वालामुखी से सामान्यतः बेसाल्टिक लावा का उद्गार होता है।
- सिरपुर महानदी के पूर्वी तट पर स्थित सांस्कृतिक एवं पुरातात्विक परिदृश्य है।
- बैरेन और नारकोंडम अंडमान ज्वालामुखीय चाप से संबंधित हैं।
- (a) केवल 1 और 2
- (b) केवल 2 और 3
- (c) केवल 1 और 3
- (d) 1, 2 और 3
सही उत्तर और विस्तृत व्याख्या
सही उत्तर: (b) केवल 2 और 3
कथन 1 गलत है। मड ज्वालामुखी को मैग्माई ज्वालामुखी नहीं समझना चाहिए; इनमें कीचड़, जल और गैसों का निष्कासन प्रमुख होता है। कथन 2 और 3 सही हैं।
मुख्य परीक्षा अभ्यास प्रश्न
“यूनेस्को की अस्थायी सूची में बाराटांग, अंडमान ज्वालामुखीय क्षेत्र और सिरपुर का समावेशन भारत की भू-विरासत तथा सांस्कृतिक परिदृश्य संरक्षण की विस्तृत होती अवधारणा को दर्शाता है।” चर्चा कीजिए।
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