5 शास्त्रीय भाषाओं के लिए उत्कृष्टता केंद्र: शोध, संरक्षण और डिजिटलीकरण को संस्थागत आधार
शिक्षा मंत्रालय ने शास्त्रीय असमिया, बंगाली, मराठी, पाली और प्राकृत के अध्ययन के लिए पाँच उत्कृष्टता केंद्र स्थापित करने को मंजूरी दी।
पाठ्यक्रम से सीधा संबंध
- प्रारंभिक: शास्त्रीय भाषाएँ और संबंधित संस्थान।
- मुख्य: भारतीय संस्कृति, भाषाई विरासत, पांडुलिपि संरक्षण और डिजिटलीकरण।
चर्चा में क्यों?
उच्च शिक्षा विभाग ने पाँच भाषाओं के लिए ऐसे समर्पित उत्कृष्टता केंद्र मंजूर किए हैं जो उन्नत शोध, संरक्षण, डिजिटलीकरण और व्यापक प्रसार पर काम करेंगे।
कौन-सा केंद्र कहाँ?
- असमिया — तेजपुर विश्वविद्यालय, असम
- बंगाली — विश्व-भारती विश्वविद्यालय, पश्चिम बंगाल
- मराठी — डेक्कन कॉलेज स्नातकोत्तर एवं अनुसंधान संस्थान, पुणे
- पाली — केंद्रीय विश्वविद्यालय ओडिशा
- प्राकृत — केंद्रीय विश्वविद्यालय गुजरात
परीक्षा के लिए महत्व
यह निर्णय केवल भाषा-सम्मान तक सीमित नहीं है; यह शास्त्रीय साहित्य के पाठालोचन, पांडुलिपि अध्ययन, डिजिटल अभिलेखीकरण, शब्दकोश निर्माण और अंतर्विषयी शोध के लिए दीर्घकालिक संस्थागत क्षमता विकसित करता है।
भारत में शास्त्रीय भाषा की अवधारणा
भारत सरकार ने 2004 में शास्त्रीय भाषा की श्रेणी बनाई और सबसे पहले तमिल को यह दर्जा दिया। 2024 में भाषाविद् विशेषज्ञ समिति द्वारा संशोधित मानदंडों के आधार पर मराठी, पाली, प्राकृत, असमिया और बंगाली को भी शास्त्रीय भाषा का दर्जा दिया गया, जिससे कुल संख्या 11 हो गई।
शास्त्रीय भाषा के संशोधित मानदंड
- प्रारंभिक ग्रंथों/अभिलेखित इतिहास की 1500–2000 वर्ष की उच्च प्राचीनता।
- ऐसा प्राचीन साहित्य/ग्रंथ-संग्रह जिसे पीढ़ियों से सांस्कृतिक विरासत माना गया हो।
- काव्य के अतिरिक्त ज्ञान-ग्रंथ, गद्य, अभिलेखीय और शिलालेखीय प्रमाण।
- शास्त्रीय भाषा और साहित्य अपने आधुनिक रूप से भिन्न हो सकते हैं या उनके बीच ऐतिहासिक असततता हो सकती है।
परीक्षा सावधानी: शास्त्रीय दर्जा संविधान की आठवीं अनुसूची से अलग व्यवस्था है। आठवीं अनुसूची में भाषा का होना और “Classical Language” का दर्जा मिलना दो भिन्न प्रश्न हैं।
भारत की 11 शास्त्रीय भाषाएँ
- तमिल — 2004
- संस्कृत — 2005
- तेलुगु — 2008
- कन्नड़ — 2008
- मलयालम — 2013
- ओड़िया — 2014
- मराठी — 2024
- असमिया — 2024
- बंगाली — 2024
- पाली — 2024
- प्राकृत — 2024
नए 5 उत्कृष्टता केंद्र: भाषा और संस्थान
- असमिया: तेजपुर विश्वविद्यालय, असम।
- बंगाली: विश्व-भारती विश्वविद्यालय, पश्चिम बंगाल।
- मराठी: डेक्कन कॉलेज स्नातकोत्तर एवं अनुसंधान संस्थान, पुणे।
- पाली: केंद्रीय विश्वविद्यालय ओडिशा।
- प्राकृत: केंद्रीय विश्वविद्यालय गुजरात।
इन केंद्रों का काम क्या होगा?
- उन्नत अकादमिक शोध और विद्वत कार्य।
- पांडुलिपि, साहित्यिक स्रोत और भाषाई सामग्री का संरक्षण।
- डिजिटलीकरण और डिजिटल अभिलेख निर्माण।
- ज्ञान परंपराओं का व्यापक प्रसार और नए शोधकर्ताओं का प्रशिक्षण।
- क्षेत्रीय विश्वविद्यालयों में शास्त्रीय भाषा अध्ययन का संस्थागत पारितंत्र विकसित करना।
शास्त्रीय भाषा दर्जे से मिलने वाला संस्थागत समर्थन
सरकार द्वारा शास्त्रीय भाषाओं के लिये उपलब्ध प्रमुख समर्थन में शास्त्रीय भाषा पुरस्कार, अध्ययन के उत्कृष्टता केंद्र और केंद्रीय विश्वविद्यालयों में पेशेवर चेयर स्थापित करना शामिल है। यह दर्जा केवल सांस्कृतिक सम्मान नहीं बल्कि शोध, दस्तावेजीकरण, अनुवाद और अकादमिक क्षमता निर्माण से भी जुड़ता है।
प्रारंभिक परीक्षा के उच्च-मूल्य तथ्य
- भारत में कुल शास्त्रीय भाषाएँ — 11।
- पहली शास्त्रीय भाषा — तमिल, 2004।
- 2024 में जोड़ी गई 5 भाषाएँ — मराठी, पाली, प्राकृत, असमिया और बंगाली।
- संशोधित प्राचीनता मानदंड — 1500–2000 वर्ष।
- शास्त्रीय भाषा दर्जा और आठवीं अनुसूची की सदस्यता अलग संवैधानिक/नीतिगत अवधारणाएँ हैं।
- पाली और प्राकृत 2024 के नए शास्त्रीय भाषा समूह का हिस्सा हैं।
मुख्य परीक्षा: भाषाई विरासत संरक्षण की चुनौतियाँ
चुनौतियाँ: पांडुलिपियों का क्षरण, विशेषज्ञ पाठकों की कमी, प्राचीन लिपियों का ज्ञान घटाना, विखंडित संग्रह, सीमित डिजिटल कॉर्पस और नई पीढ़ी से दूरी।
आगे की दिशा: उच्च गुणवत्ता डिजिटलीकरण, आलोचनात्मक संस्करण, बहुभाषी अनुवाद, डिजिटल ह्यूमैनिटीज, कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित लिप्यंतरण, शोध फेलोशिप और वैश्विक विश्वविद्यालय सहयोग।
परीक्षा में संभावित भ्रम
- तमिल पहली शास्त्रीय भाषा है; संस्कृत दूसरी।
- मराठी, पाली, प्राकृत, असमिया और बंगाली को 2024 में दर्जा मिला।
- डेक्कन कॉलेज — मराठी केंद्र; विश्व-भारती — बंगाली केंद्र।
- तेजपुर विश्वविद्यालय — असमिया; केंद्रीय विश्वविद्यालय ओडिशा — पाली; केंद्रीय विश्वविद्यालय गुजरात — प्राकृत।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
1. भारत में कितनी शास्त्रीय भाषाएँ हैं?
11।
2. पहली शास्त्रीय भाषा कौन-सी थी?
तमिल।
3. 2024 में कितनी नई भाषाएँ जुड़ीं?
5।
4. शास्त्रीय भाषा दर्जे का प्रमुख लाभ क्या है?
अनुसंधान, संरक्षण, उत्कृष्टता केंद्र, अकादमिक चेयर और भाषाई विरासत के संस्थागत संवर्धन को समर्थन।
मुख्य परीक्षा अभ्यास प्रश्न
प्रश्न: भारत की भाषाई विविधता और सभ्यतागत विरासत के संरक्षण में शास्त्रीय भाषा संस्थानों की भूमिका का मूल्यांकन कीजिए।
त्वरित पुनरावृत्ति
- कुल नए उत्कृष्टता केंद्र: 5
- भाषाएँ: असमिया, बंगाली, मराठी, पाली, प्राकृत
- उद्देश्य: शोध + संरक्षण + डिजिटलीकरण + प्रसार