ICRIER उर्वरक अध्ययन: N:P:K अनुपात 10.5:4.1:1 और पोषक असंतुलन का अर्थशास्त्र
यूरिया और अन्य उर्वरकों के सापेक्ष मूल्य-विकृति से नाइट्रोजन का अति-प्रयोग और पोटाश की गंभीर कमी; सब्सिडी सुधार पर नया नीतिगत अध्ययन।
27 अक्टूबर 2026
चर्चा में क्यों?
ICRIER के नए उर्वरक नीति और पोषक अनुकूलन संबंधी नीतिगत अध्ययन ने दिखाया है कि भारत का औसत N:P:K उपयोग अनुपात 10.5:4.1:1 है, जबकि अध्ययन में प्रयुक्त मानक अनुपात 2.8:1.5:1 है। अध्ययन इस असंतुलन को मुख्यतः सापेक्ष कीमतों और सब्सिडी संरचना से जोड़ता है।
मुख्य निष्कर्ष
- राष्ट्रीय स्तर पर नाइट्रोजन उपयोग अनुशंसित मात्रा से लगभग 6% अधिक हो चुका है।
- फॉस्फोरस की कमी लगभग 22% और पोटाश की कमी 72% बताई गई है।
- 20 प्रमुख राज्यों में 11 नाइट्रोजन का अति-प्रयोग करते हैं।
- 2010 की पोषक-तत्व आधारित सब्सिडी (NBS) में फॉस्फेटिक और पोटाशिक उर्वरक आते हैं, जबकि यूरिया बाहर है और उसकी कीमत अपेक्षाकृत नियंत्रित रहती है।
मूल समस्या: सापेक्ष मूल्य
जब यूरिया अन्य पोषक उर्वरकों की तुलना में कृत्रिम रूप से बहुत सस्ता रहता है, किसान के लिए नाइट्रोजन का अधिक उपयोग आर्थिक रूप से आकर्षक बनता है। इसलिए केवल जागरूकता अभियान से पोषक संतुलन ठीक होने की संभावना सीमित है। MSP खरीद और सस्ती बिजली जैसे अन्य प्रोत्साहन कुछ क्षेत्रों में अधिक इनपुट वाली फसल-पद्धति को और मजबूत कर सकते हैं।
पर्यावरण और राजकोषीय प्रभाव
- अधिक नाइट्रोजन से नाइट्रेट प्रदूषण और नाइट्रस ऑक्साइड उत्सर्जन बढ़ सकता है।
- कम पोटाश/फॉस्फोरस से पौध पोषण और दीर्घकालीन मृदा उत्पादकता प्रभावित होती है।
- वैश्विक उर्वरक एवं ऊर्जा आपूर्ति-झटके भारत के सब्सिडी व्यय को तेज़ी से बढ़ा सकते हैं। अध्ययन ने हॉर्मुज़ व्यवधान की स्थिति में 2026-27 सब्सिडी बिल ₹2.42–3.32 लाख करोड़ तक जाने का जोखिम बताया है।
सुधार की दिशा
अध्ययन पोषक और फसल-तटस्थ प्रत्यक्ष नकद सहायता, 4R पोषक प्रबंधन—सही स्रोत, सही मात्रा, सही समय और सही स्थान—तथा ड्रिप/फर्टिगेशन निवेश को बढ़ावा देने का सुझाव देता है। सुधार क्रमिक होना चाहिए ताकि छोटे किसानों पर अचानक लागत-झटका न पड़े।
प्रारंभिक परीक्षा अभ्यास
प्रश्न 1. पोषक-तत्व आधारित सब्सिडी (NBS) के संबंध में कौन-सा कथन सही है?
- यूरिया पूर्ण रूप से NBS में शामिल है
- यह केवल जैव उर्वरकों पर लागू है
- फॉस्फेटिक और पोटाशिक उर्वरक इसके अंतर्गत आते हैं, पर यूरिया बाहर है
- यह केवल आयातित उर्वरकों पर लागू है
सही उत्तर: C
व्याख्या: यूरिया की अलग नियंत्रित मूल्य व्यवस्था पोषक असंतुलन की प्रमुख नीति-चर्चा है।
प्रश्न 2. 4R पोषक प्रबंधन का आशय है—
- सही स्रोत, मात्रा, समय और स्थान
- चार प्रकार के यूरिया
- चार फसल मौसम
- चार प्रकार की सब्सिडी
सही उत्तर: A
व्याख्या: 4R पोषक दक्षता का मानक सिद्धांत है।
मुख्य परीक्षा अभ्यास प्रश्न
प्रश्न: भारत में उर्वरक असंतुलन को केवल किसान जागरूकता की समस्या मानना पर्याप्त नहीं है। सापेक्ष कीमतों, सब्सिडी और फसल प्रोत्साहनों की भूमिका का विश्लेषण कीजिए।