उत्तर व विस्तृत व्याख्या देखें
नियम: reach एक transitive verb है; इसके बाद स्थान से पहले सामान्यतः to/at/by नहीं आता। शुद्ध वाक्य होगा: I reached the station late.
प्रश्न 1–30
नियम: reach एक transitive verb है; इसके बाद स्थान से पहले सामान्यतः to/at/by नहीं आता। शुद्ध वाक्य होगा: I reached the station late.
Alternative to मानक प्रयोग है। वाक्य होगा: The alternative to submission is death.
किसी वस्तु की माँग के लिए ask for + noun प्रयोग होता है। इसलिए I asked for a ticket. सही है।
only to + verb का प्रयोग किसी क्रिया के बाद मिले अनपेक्षित परिणाम के लिए होता है। सही वाक्य: He opened the box only to find it empty.
After finishing my work, I went out to play स्वाभाविक और पूर्ण वाक्य है। ध्यान दें कि Having finished my work भी सामान्य अंग्रेज़ी में व्याकरणतः संभव है; इसलिए आधिकारिक BPSC key मिलने तक इस प्रश्न को समीक्षाधीन रखा गया है।
कई exam-solution sources इस item में to be चुनते हैं। लेकिन मानक आधुनिक प्रयोग She qualified as a doctor भी है; दिए गए वाक्य में to be as असहज बनता है। इसलिए इसे आधिकारिक key मिलने तक अंतिम रूप से lock नहीं किया गया है।
प्रचलित proverb है: Time and tide wait for no man. यहाँ time and tide संयुक्त subject है, इसलिए plural/base verb wait आता है।
News रूप से plural दिखता है, लेकिन व्याकरण में singular uncountable noun माना जाता है। इसलिए The news is true.
मुख्य subject The introduction singular है। बीच का of tea and coffee... केवल qualifying phrase है; इसलिए has not been सही है।
While किसी जारी क्रिया के दौरान दूसरी घटना होने को दिखाता है: While he was sleeping, the enemy entered the house.
यहाँ अर्थ है “उन लड़कियों में से प्रत्येक”, इसलिए everyone की जगह every one होना चाहिए। सही रूप: I helped every one of those girls...
यहाँ उद्देश्य नहीं, पहले देख लेने की परिस्थिति बतानी है। इसलिए To see की जगह Seeing a crow... या On seeing a crow... अधिक उचित है।
स्वाभाविक अंग्रेज़ी में lack of attention to the signals या inattention to the signals बेहतर है; less attention यहाँ असंगत लगता है। कुछ online solution keys segment mapping अलग देती हैं, इसलिए आधिकारिक key तक इसे समीक्षाधीन रखा गया है।
शहर के भीतर ठहरने के अर्थ में सामान्यतः in Mumbai कहा जाता है। हालांकि यात्रा-संदर्भ में stop at Mumbai भी कुछ प्रयोगों में मिलता है; इसलिए यह प्रश्न भी आधिकारिक key तक समीक्षाधीन है।
shall have been living Future Perfect Continuous है और for five years अवधि बताता है। वाक्य व्याकरणतः सही है।
Conceal = छिपाना; इसका सीधा विलोम reveal = प्रकट करना है। Hide, disguise और veil अर्थ में conceal के निकट हैं।
Dull का अर्थ फीका/मंद भी होता है; उसका उपयुक्त विलोम bright है। बाकी विकल्प dull के अन्य अर्थों के आसपास हैं, विलोम नहीं।
Defeat के दिए गए विकल्पों में एक निर्विवाद antonym नहीं है। Conquer/overcome/foil कई संदर्भों में defeat के synonym या निकटार्थी हैं और loss noun sense में defeat के निकट है। आधिकारिक key के बिना इसे lock करना उचित नहीं होगा।
Corrupt = बेईमान/भ्रष्ट; इसका स्पष्ट विलोम honest है।
Devastate = बुरी तरह नष्ट करना; restore = पुनः स्थापित/ठीक करना, इसलिए यह उपयुक्त विलोम है।
Gloom का अर्थ अंधकार, उदासी या निराशाजनक वातावरण है। दिए विकल्पों में darkness सबसे निकट है।
Lazy का सटीक synonym idle/indolent होता, जो विकल्पों में नहीं है। उपलब्ध विकल्पों में slow सबसे निकट है; active, energetic और industrious इसके विपरीत अर्थ देते हैं।
Horror और terror दोनों तीव्र भय की अवस्था बताते हैं। इसलिए Terror निकटतम अर्थ है।
Effort = प्रयत्न/कोशिश; attempt इसका निकटतम विकल्प है। बाकी विकल्प निष्क्रियता बताते हैं।
Polite का अर्थ विनम्र/शिष्ट है; courteous इसका सीधा synonym है।
जाल फेंकने के लिए क्रिया cast a net प्रयोग होती है। cost = कीमत, caste = जाति।
ब्रेड flour (आटा/मैदा) से बनती है। floor = फर्श और flower = फूल।
चिमनी में धुएँ से जमा काला कार्बन पदार्थ soot कहलाता है। suit और suite अलग शब्द हैं।
Funeral rites का अर्थ अंतिम संस्कार की धार्मिक/परंपरागत विधियाँ है। rights = अधिकार, writes = लिखता है।
at one draught का अर्थ एक ही घूँट/एक बार में पी लेना है। draft और drought अलग अर्थ वाले शब्द हैं।
प्रश्न 31–50
यहाँ पदक्रम दोष है। स्वाभाविक और शुद्ध क्रम गेंदे की एक माला होगा; संख्या-सूचक ‘एक’ को ‘माला’ के ठीक पहले रखना उचित है।
‘प्रणाली’ स्त्रीलिंग संज्ञा है, इसलिए क्रिया भी उसके अनुसार बदलनी चाहिए होगी। ‘बदलना चाहिए’ लिंग-सामंजस्य की दृष्टि से अशुद्ध है।
संकट के साथ सामान्य प्रयोग संकट से बचाना/बचा लेना है। इसलिए शुद्ध वाक्य होगा—‘उसने देश को भारी संकट से बचा लिया।’
‘संध्याकाल’ में ही ‘समय’ का भाव निहित है। अतः ‘संध्याकाल के समय’ पुनरुक्ति है; ‘संध्याकाल’ या ‘संध्या के समय’ पर्याप्त है।
इस प्रसंग में उचित प्रयोग गर्व करना है। ‘धन-जन पर गौरव करना’ की जगह ‘धन-जन पर गर्व करना’ अधिक मानक है।
यह वाक्य पदक्रम की दृष्टि से संदिग्ध है। अधिक स्वाभाविक रूप है—‘शीघ्र ही वह आन्दोलन देशव्यापी हो गया।’ आधिकारिक BPSC कुंजी न मिलने तक इसे समीक्षाधीन रखा गया है।
यहाँ शब्द-क्रम गलत है। ‘कई रेलवे के कर्मचारी’ से अर्थ कई रेलवों के कर्मचारी निकलता है; अपेक्षित वाक्य है—‘रेलवे के कई कर्मचारियों की गिरफ्तारी हुई।’
‘रविवार’ के साथ ‘के दिन’ अनावश्यक पुनरुक्ति है। शुद्ध रूप—‘उसने रविवार को तुमसे मिलने का निश्चय किया है।’
‘एक पलंग और एक कुर्सी’ संयुक्त कर्ता है और मिश्रित लिंग में बहुवचन क्रिया ‘रखे हैं’ स्वीकार्य है। वाक्य में कोई आवश्यक व्याकरणिक सुधार नहीं है।
यहाँ ‘गाँवों’ का बहुवचन प्रसंगानुकूल नहीं है। अपेक्षित रूप ‘उनके गाँव के भीतर दो कुएँ हैं…’ है।
‘जैसा’ के साथ सहसंबंधी रूप ‘वैसा’ आता है। अतः ‘वैसे’ की जगह ‘वैसा’ होना चाहिए।
‘बात समझ जाने पर वह आश्वस्त हो गया’ व्याकरण और अर्थ—दोनों की दृष्टि से स्वीकार्य वाक्य है।
मानक शब्द उन्नतिशील है, जिसका अर्थ निरंतर उन्नति की ओर बढ़ने वाला है। इसलिए ‘उन्नतशील’ की जगह ‘उन्नतिशील’ अपेक्षित है।
‘परिवार’ पुल्लिंग है, इसलिए संबंधवाचक रूप उसके परिवार में होगा, ‘उसकी परिवार में’ नहीं।
वाक्य का पदक्रम, कारक और क्रिया-सामंजस्य सही है; इसलिए कोई त्रुटि नहीं है।
‘ओर’ स्त्रीलिंग है और संबंध रूप मेरी ओर होगा। अतः ‘मेरे ओर’ अशुद्ध है।
‘श्रद्धा’ के साथ सामान्य कारक प्रयोग ईश्वर में श्रद्धा है। ‘ईश्वर के ऊपर श्रद्धा’ अप्राकृतिक प्रयोग है।
निषेधात्मक अर्थ में मानक रूप ‘किसी ने भी’ होगा। ‘किस ने भी’ यहाँ अशुद्ध है।
‘प्रातःकाल’ स्वयं समय का बोध कराता है, इसलिए ‘प्रातःकाल के समय’ पुनरुक्ति है। ‘प्रातःकाल घूमने जाता है’ पर्याप्त है।
मानक प्रयोग ‘सिर नीचे कर लिया’ है। यहाँ ‘नीचे को’ अनावश्यक/अशुद्ध प्रयोग है।
प्रश्न 51–60
‘व्यवहार’ से बना मानक विशेषण व्यावहारिक है। बाकी रूप वर्तनी की दृष्टि से अशुद्ध हैं।
नक्षत्र का मानक नाम स्वाति है; ‘सुवाति/स्वाती/सवाति’ इस प्रसंग में अशुद्ध रूप हैं।
मानक वर्तनी अतिशयोक्ति है—अर्थात किसी बात को बढ़ा-चढ़ाकर कहना। ‘अतिश्योक्ति’ प्रचलित किंतु अशुद्ध रूप है।
शुद्ध वर्तनी आशीर्वाद है। इसमें ‘शी’ और ‘र्वाद’ का सही क्रम रहता है।
‘रचना करने वाला’ के लिए शुद्ध शब्द रचयिता है। ‘रचयीता’ में अनावश्यक दीर्घ ‘ई’ है।
अर्थ है ‘ऊपर कही गई पंक्तियाँ’, इसलिए उपर्युक्त उचित है। ‘उपयुक्त’ का अर्थ ‘योग्य/अनुकूल’ होता है।
शुद्ध रूप प्रादुर्भाव है, जिसका अर्थ प्रकट होना/उद्भव है। ‘प्रादूर्भाव’ में मात्रा-दोष है।
‘व्यक्ति’ से संबंध बताने वाला मानक विशेषण वैयक्तिक है।
जीवित रहने की प्रबल इच्छा के लिए शुद्ध शब्द जिजीविषा है।
‘सबसे आगे गिने जाने योग्य’ के अर्थ में शुद्ध रूप अग्रगण्य है।
प्रश्न 61–70
‘मनः + योग’ में विसर्ग संधि से मनोयोग बनता है।
‘गिरि + ईश’ में गुण संधि से गिरीश बनता है; अर्थ—पर्वतों के ईश्वर।
‘महा + उदय’ में गुण संधि से महोदय बनता है।
‘जगत् + नाथ’ के संयोग से जगन्नाथ बनता है; व्यंजन-संधि में ‘त्’ का रूप परिवर्तित होता है।
निः + चल = निश्चल। विसर्ग के बाद ‘च’ आने पर रूप ‘श्च’ में बदलता है।
शिखा + अन्त के संयोग से दीर्घ/सवर्ण संधि द्वारा ‘शिखान्त’ रूप बनता है।
वात + आवरण = वातावरण। ‘वात’ का अर्थ वायु और ‘आवरण’ का अर्थ घेरा/परिवेश है।
सत्य + आग्रह = सत्याग्रह। गांधीवादी संदर्भ में इसका भाव सत्य पर दृढ़ आग्रह है।
उपसर्ग सम् के बाद ‘र’ आने पर अनुस्वार रूप से संरक्षक बनता है।
हिंदी व्याकरण में प्रचलित विच्छेद मंत्री + मंडल माना जाता है; संयुक्त रूप में दीर्घ ‘ई’ ह्रस्व होकर ‘मंत्रिमंडल’ बनता है।
प्रश्न 71–80
प्रश्न के मुद्रित रूप में ‘शीतल’ स्वयं सामान्यतः गुणवाचक विशेषण है, जबकि विकल्प केवल संज्ञा-भेद देते हैं। इसलिए उपलब्ध विकल्पों में निर्विवाद उत्तर नहीं बनता; आधिकारिक कुंजी मिलने तक इसे लॉक नहीं किया गया है।
दिए विकल्पों में ‘सूर्य’ का स्त्रीलिंग रूप सूर्या स्वीकार किया जाता है।
‘आँसू’ ऐसा शब्द है जिसका प्रत्यक्ष बहुवचन भी आँसू रहता है; परसर्गयुक्त रूप ‘आँसुओं’ होता है।
‘प्राण’ प्रायः बहुवचन रूप में प्रयुक्त होता है—जैसे ‘प्राण निकल गए’। बाकी विकल्प एकवचन हैं।
‘जवान’, ‘बालक’ और ‘मनुष्य’ व्यक्ति-वर्ग के नाम होकर जातिवाचक संज्ञाएँ हो सकते हैं; सुन्दर मूलतः गुणवाचक विशेषण है।
‘यह घोड़ा’ में ‘यह’ संज्ञा ‘घोड़ा’ की ओर संकेत करके उसकी विशेषता/निर्धारण कर रहा है, इसलिए इसे सार्वनामिक विशेषण माना जाता है।
‘थोड़ा’ मात्रा/परिमाण बताता है और इस प्रयोग में विशेषण है। ‘भलाई’ व ‘मिठास’ भाववाचक संज्ञाएँ हैं, ‘स्वयं’ सर्वनामिक शब्द है।
‘धीरे से’ क्रिया ‘बोलता है’ की रीति बता रहा है, इसलिए यह क्रिया-विशेषण है।
यहाँ ‘अच्छा’ ‘स्थान’ का गुण बता रहा है, इसलिए गुणवाचक विशेषण है। अन्य वाक्यों में ‘अच्छा’ अलग व्याकरणिक भूमिकाओं में है।
‘बूँद-बूँद’ बताता है कि टपकने की क्रिया किस प्रकार हो रही है; इसलिए यह क्रिया-विशेषणीय प्रयोग है।
प्रश्न 81–90
‘अमिय’ का अर्थ अमृत है और पीयूष भी अमृत का पर्याय है।
प्रसून पुष्प/फूल का प्रसिद्ध पर्यायवाची है। ‘रसाल’ आम के वृक्ष और ‘नीरज’ कमल के लिए प्रयुक्त हो सकता है।
‘अक्षि’ और ‘लोचन’ सीधे आँख के पर्याय हैं; ‘दृष्टि’ देखने की शक्ति/नज़र है। दिए विकल्पों में ईक्षण मुख्यतः देखने की क्रिया के अर्थ में आता है, इसलिए इसे असमान माना गया है।
‘आडम्बर’ का अर्थ दिखावा/बनावट है; इसलिए ढोंग निकटतम समानार्थी है।
‘उषा’, ‘प्रभात’ और ‘सवेरा’ सुबह के समय से जुड़े हैं; दिन व्यापक अवधि है, इसलिए भिन्न अर्थ वाला है।
‘ज्येष्ठ’ = वरिष्ठ/बड़ा; इसका विलोम कनिष्ठ = छोटा/जूनियर है।
‘गरिमा’ में महत्ता/गौरव/भारीपन का भाव है; उसका प्रतिलोम रूप लघिमा है।
दिए विकल्पों में ‘गंभीर’ के विपरीत स्वभाव को वाचाल सबसे निकट व्यक्त करता है।
‘गृहस्थी’ पारिवारिक/सांसारिक जीवन का संकेत है; उसके विपरीत त्यागी सांसारिक बंधनों से विरत व्यक्ति है।
‘परुष’ का अर्थ कठोर/रूखा है; इसका विलोम कोमल है।
प्रश्न 91–100
इस प्रश्न-रूप में ‘कच्चे घड़े पानी भरना’ के लिए परीक्षा-समाधानों में मूर्खतापूर्ण कार्य करना को सर्वाधिक सटीक विकल्प माना गया है। शाब्दिक परंपरा में यह अत्यंत कठिन/जोखिमपूर्ण काम का भाव भी दे सकता है।
मुद्रित रूप ‘अंग लगाना’ के लिए ‘गले लगाना’ और ‘आलिंगन करना’ दोनों अर्थतः एक ही हैं। स्रोत-पत्रों में कई जगह ‘अंग लगना’ रूप मिलता है, जिसका अर्थ शरीर को पोषण/ताकत लगना भी होता है; इसलिए इस वर्तमान प्रश्न को आधिकारिक कुंजी तक समीक्षाधीन रखा गया है।
मुहावरा ‘हाथ ऊँचा होना’ यहाँ प्रतिष्ठा/प्रभाव अधिक होने के अर्थ में प्रयुक्त है। अतः दिए विकल्पों में ‘अत्यधिक प्रतिष्ठित’ सही है।
ढपोर शंख ऐसे व्यक्ति के लिए कहा जाता है जो बड़ी-बड़ी बातें करे पर सार्थक काम न करे; दिए विकल्पों में ‘बेवकूफ’ सबसे निकट है।
घर बसाना का मुहावरेदार अर्थ विवाह करके गृहस्थ जीवन आरंभ करना है।
सिर हथेली पर रखना का अर्थ प्राणों की परवाह न करना और आवश्यकता पड़ने पर मृत्यु/बलिदान के लिए तैयार रहना है।
‘ठीकरी/ठीकरा किसी के सिर फूटना’ का भाव दोष या जिम्मेदारी किसी एक व्यक्ति पर मढ़ देना है। इसलिए विकल्प D सर्वाधिक उपयुक्त है।
लोकोक्ति ‘फिसल पड़े तो हरि गंगे’ अनिच्छित/मजबूरी में हुए काम को बाद में इच्छित बताने के भाव में आती है। दिए विकल्पों में ‘मजबूरी में काम पड़ना’ सबसे निकट है।
‘आगे नाथ न पीछे पगहा’ का भाव किसी बंधन या जिम्मेदारी से मुक्त/बेफिक्र होना है। दिए विकल्पों में ‘बंधन रहित होना’ सबसे सटीक है।
‘सिर सहलाए भेजा खाए’ ऐसे व्यक्ति के लिए है जो मित्रता या अपनापन दिखाकर भीतर से नुकसान पहुँचाए। इसलिए विकल्प B सही है।