समय और समय क्षेत्र
पृथ्वी अपने अक्ष पर पश्चिम से पूर्व दिशा में घूमती है। इस घूर्णन के कारण पृथ्वी के विभिन्न भागों में सूर्य अलग-अलग समय पर दिखाई देता है। जब किसी स्थान पर सूर्य आकाश में सबसे ऊँची स्थिति में पहुँचता है, तब वहाँ लगभग दोपहर होती है। इसी कारण पृथ्वी के अलग-अलग देशांतरों पर स्थित स्थानों का स्थानीय समय भी अलग-अलग होता है।
पृथ्वी लगभग 24 घंटे में 360° का एक पूरा घूर्णन करती है। इसलिए वह लगभग एक घंटे में 15° तथा चार मिनट में 1° घूमती है।
360° = 24 घंटे
15° देशांतर = 1 घंटा
1° देशांतर = 4 मिनट
और अधिक सूक्ष्म गणना में 1 मिनट देशांतर = 4 सेकंड समय के बराबर होता है।
यही संबंध देशांतर और समय की पूरी व्यवस्था का आधार है।
स्थानीय समय
किसी स्थान के अपने देशांतर के आधार पर निर्धारित समय को स्थानीय समय कहा जाता है। जब सूर्य किसी स्थान की मध्याह्न रेखा के ऊपर सर्वोच्च स्थिति में पहुँचता है, तो वहाँ स्थानीय दोपहर मानी जाती है।
एक ही देशांतर रेखा पर स्थित स्थानों का स्थानीय समय लगभग समान होता है, जबकि अलग-अलग देशांतरों पर स्थित स्थानों का स्थानीय समय अलग होता है।
पृथ्वी पश्चिम से पूर्व की ओर घूमती है। इसलिए पूर्व में स्थित स्थान सूर्य के सामने पहले आते हैं और वहाँ सूर्योदय, दोपहर तथा सूर्यास्त पश्चिम में स्थित स्थानों की तुलना में पहले होते हैं।
इसी कारण समय की गणना में एक सरल नियम लागू होता है—
पूर्व की ओर जाने पर समय बढ़ता है।
पश्चिम की ओर जाने पर समय घटता है।
यदि दो स्थानों के बीच 15° देशांतर का अंतर है, तो उनके स्थानीय समय में 1 घंटे का अंतर होगा। यदि अंतर 30° है, तो समय का अंतर 2 घंटे होगा।
उदाहरण के लिए यदि किसी स्थान का देशांतर दूसरे स्थान से 10° पूर्व में है, तो उसका स्थानीय समय—
10 × 4 = 40 मिनट
आगे होगा।
इस प्रकार किसी भी दो स्थानों के देशांतरों का अंतर ज्ञात होने पर उनके स्थानीय समय का अंतर निकाला जा सकता है।
स्थानीय समय की व्यावहारिक समस्या
यदि प्रत्येक नगर और स्थान अपने-अपने स्थानीय समय का उपयोग करे, तो एक ही देश के भीतर अनेक अलग-अलग समय हो सकते हैं। पुराने समय में यह विशेष समस्या नहीं थी, लेकिन रेलवे, तार, संचार, प्रशासन और आधुनिक परिवहन के विकास के बाद एक समान समय की आवश्यकता महसूस हुई।
इसी समस्या को दूर करने के लिए देशों ने किसी एक सुविधाजनक देशांतर को अपना मानक मध्याह्न स्वीकार किया और उसके स्थानीय समय को पूरे देश या किसी बड़े क्षेत्र का मानक समय बनाया।
मानक समय
किसी देश द्वारा चुनी गई मानक मध्याह्न रेखा के स्थानीय समय को उस देश का मानक समय कहा जाता है।
आदर्श रूप से मानक समय क्षेत्रों का निर्धारण 15° देशांतर के अंतर पर किया जा सकता है, क्योंकि पृथ्वी को 15° घूमने में लगभग एक घंटा लगता है। लेकिन वास्तविक दुनिया में देशों की सीमाएँ, प्रशासनिक सुविधा, आर्थिक संबंध और राजनीतिक निर्णय भी समय क्षेत्र निर्धारित करते हैं। इसलिए सभी समय क्षेत्रों की सीमाएँ ठीक 15° के अंतर पर नहीं होतीं।
छोटे और मध्यम आकार के देश सामान्यतः एक मानक समय अपनाते हैं, जबकि बहुत अधिक पूर्व-पश्चिम विस्तार वाले कई देशों में एक से अधिक समय क्षेत्र पाए जाते हैं।
प्रधान मध्याह्न रेखा और विश्व समय
0° देशांतर, जो इंग्लैंड के ग्रीनविच से होकर गुजरता है, प्रधान मध्याह्न रेखा कहलाता है। विश्व के समय की गणना के लिए ऐतिहासिक रूप से ग्रीनविच माध्य समय का उपयोग किया जाता था।
आधुनिक अंतरराष्ट्रीय समय व्यवस्था में मुख्य संदर्भ समन्वित सार्वभौमिक समय (UTC) है।
भारत का समय इससे 5 घंटे 30 मिनट आगे है।
अर्थात—
भारतीय मानक समय = UTC + 5 घंटे 30 मिनट
पारंपरिक भूगोल की पुस्तकों में इसे GMT + 5 घंटे 30 मिनट भी लिखा जाता है।
भारतीय मानक समय
भारत का पूर्व-पश्चिम विस्तार काफी अधिक है। भारत का मुख्य भूभाग लगभग 68°7′ पूर्व देशांतर से 97°25′ पूर्व देशांतर तक फैला हुआ है। दोनों छोरों के बीच लगभग 29° देशांतर का अंतर है।
चूँकि प्रत्येक 1° देशांतर लगभग 4 मिनट के समय अंतर के बराबर है, इसलिए भारत के सुदूर पूर्वी और पश्चिमी भागों के स्थानीय समय में लगभग 2 घंटे का अंतर उत्पन्न हो जाता है।
यही कारण है कि अरुणाचल प्रदेश और अन्य पूर्वोत्तर क्षेत्रों में गुजरात की तुलना में सूर्योदय बहुत पहले हो जाता है। इसके बावजूद प्रशासनिक सुविधा के लिए पूरे भारत में एक ही मानक समय का उपयोग किया जाता है।
भारत का मानक मध्याह्न—
82°30′ पूर्व देशांतर
है।
यह उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर के निकट से गुजरता है। इसके स्थानीय समय को पूरे भारत के लिए भारतीय मानक समय के रूप में स्वीकार किया गया है।
82°30′ पूर्व देशांतर और ग्रीनविच के बीच समय का अंतर आसानी से निकाला जा सकता है—
82.5 × 4 मिनट = 330 मिनट
अर्थात—
330 मिनट = 5 घंटे 30 मिनट
इसीलिए भारतीय मानक समय UTC से 5 घंटे 30 मिनट आगे है।
भारत की मानक मध्याह्न रेखा उत्तर से दक्षिण की ओर लगभग उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, ओडिशा और आंध्र प्रदेश से होकर गुजरती है।
भारत में राष्ट्रीय समय मानक को बनाए रखने की वैज्ञानिक जिम्मेदारी CSIR–राष्ट्रीय भौतिक प्रयोगशाला से संबंधित है।
समय क्षेत्र
पृथ्वी को सैद्धांतिक रूप से लगभग 24 समय क्षेत्रों में बाँटा जा सकता है। प्रत्येक क्षेत्र का आदर्श विस्तार लगभग 15° देशांतर माना जाता है।
इसका आधार सरल है—
360° ÷ 24 घंटे = 15° प्रति घंटा
लेकिन वास्तविक समय क्षेत्रों की सीमाएँ अक्सर राजनीतिक सीमाओं के अनुसार बदली हुई होती हैं। इसलिए वे मानचित्र पर सीधी देशांतर रेखाओं जैसी नहीं दिखाई देतीं।
कुछ विशाल देशों में अनेक समय क्षेत्र हैं। इसके विपरीत कुछ बड़े देश प्रशासनिक सुविधा के लिए एक ही मानक समय का उपयोग करते हैं।
समय क्षेत्र हमेशा पूरे घंटे के अंतर वाले हों, यह आवश्यक नहीं है। भारत UTC +5:30 का उपयोग करता है, जबकि नेपाल UTC +5:45 का उपयोग करता है। इसलिए विश्व के सभी समय क्षेत्रों को केवल एक-एक घंटे के अंतर पर आधारित मानना गलत होगा।
अंतरराष्ट्रीय तिथि रेखा
पृथ्वी पर समय की गणना करते हुए एक महत्वपूर्ण समस्या उत्पन्न होती है। यदि कोई व्यक्ति लगातार पृथ्वी के चारों ओर यात्रा करे, तो किसी स्थान पर तिथि बदलने की आवश्यकता पड़ेगी। इस उद्देश्य से लगभग 180° देशांतर के आसपास एक काल्पनिक रेखा निर्धारित की गई है, जिसे अंतरराष्ट्रीय तिथि रेखा कहा जाता है।
180° पूर्व और 180° पश्चिम वास्तव में एक ही मध्याह्न रेखा हैं। अंतरराष्ट्रीय तिथि रेखा मुख्यतः प्रशांत महासागर से होकर गुजरती है।
यह रेखा हर स्थान पर ठीक 180° देशांतर का अनुसरण नहीं करती। कई स्थानों पर यह पूर्व या पश्चिम की ओर मुड़ती है ताकि किसी देश या द्वीप समूह के भीतर अलग-अलग तिथियाँ न हो जाएँ।
इसलिए अंतरराष्ट्रीय तिथि रेखा को मानचित्र पर एक सीधी रेखा के बजाय कुछ स्थानों पर टेढ़ी-मेढ़ी रेखा के रूप में दिखाया जाता है।
अंतरराष्ट्रीय तिथि रेखा पार करने पर दिन परिवर्तन
अंतरराष्ट्रीय तिथि रेखा के दोनों ओर समय लगभग समान हो सकता है, लेकिन तिथि में एक दिन का अंतर होता है।
इसे याद रखने का सबसे महत्वपूर्ण नियम है—
अंतरराष्ट्रीय तिथि रेखा को पश्चिम की ओर पार करने पर एक दिन जोड़ते हैं।
अंतरराष्ट्रीय तिथि रेखा को पूर्व की ओर पार करने पर एक दिन घटाते हैं।
उदाहरण के लिए यदि कोई व्यक्ति सोमवार को अंतरराष्ट्रीय तिथि रेखा को पूर्व से पश्चिम की ओर पार करता है, तो वह मंगलवार में प्रवेश करेगा।
इसके विपरीत यदि वह पश्चिम से पूर्व की ओर इसे पार करता है, तो एक दिन पीछे चला जाएगा।
इस नियम का कारण यह है कि पृथ्वी की परिक्रमा करते हुए स्थानीय समय में लगातार किए गए परिवर्तन को किसी स्थान पर तिथि परिवर्तन द्वारा समायोजित करना आवश्यक होता है।
180° देशांतर और अंतरराष्ट्रीय तिथि रेखा समान क्यों नहीं हैं?
अंतरराष्ट्रीय तिथि रेखा का सामान्य आधार 180° देशांतर है, लेकिन दोनों को पूर्णतः समान नहीं मानना चाहिए।
180° देशांतर एक निश्चित भौगोलिक मध्याह्न रेखा है, जबकि अंतरराष्ट्रीय तिथि रेखा तिथि परिवर्तन की व्यावहारिक व्यवस्था है।
राजनीतिक और प्रशासनिक सुविधा के कारण अंतरराष्ट्रीय तिथि रेखा अनेक स्थानों पर 180° से हट जाती है।
इस अंतर को प्रारंभिक परीक्षा में विशेष रूप से ध्यान रखना चाहिए।
ग्रीनविच और अंतरराष्ट्रीय तिथि रेखा का संबंध
प्रधान मध्याह्न रेखा 0° देशांतर पर स्थित है, जबकि उसके लगभग विपरीत दिशा में 180° देशांतर स्थित है।
0° देशांतर विश्व समय की आधार रेखा है, जबकि लगभग 180° देशांतर के आसपास अंतरराष्ट्रीय तिथि रेखा स्थित है।
इस प्रकार—
0° → समय गणना का प्रमुख संदर्भ
लगभग 180° → तिथि परिवर्तन का प्रमुख क्षेत्र
है।
दिन परिवर्तन और पृथ्वी का घूर्णन
पृथ्वी पश्चिम से पूर्व की ओर घूमती है। इसलिए पूर्व की ओर स्थित स्थानों पर नया दिन पश्चिम के स्थानों की अपेक्षा पहले शुरू होता है।
यही कारण है कि विश्व के विभिन्न देशों में एक ही क्षण पर अलग-अलग समय और कभी-कभी अलग-अलग तिथियाँ होती हैं।
उदाहरण के लिए जब भारत में नया दिन शुरू हो चुका हो, तब अमेरिका के कई भागों में पिछली तिथि की शाम हो सकती है।
इसका अर्थ यह नहीं है कि पृथ्वी पर दिन अलग-अलग गति से चलता है। यह केवल देशांतर, पृथ्वी के घूर्णन और मानव द्वारा निर्धारित समय क्षेत्रों का परिणाम है।
दिन प्रकाश बचत समय
कुछ उच्च अक्षांशीय देशों में गर्मियों के दौरान दिन बहुत लंबे होते हैं। उपलब्ध दिन के प्रकाश का बेहतर उपयोग करने के उद्देश्य से कुछ देश वर्ष के एक भाग में अपनी घड़ियाँ सामान्य समय से आगे कर देते हैं। इसे दिन प्रकाश बचत समय कहा जाता है।
सामान्यतः इसमें घड़ी लगभग एक घंटे आगे की जाती है और बाद में सामान्य समय पर लौटा दी जाती है।
सभी देश इसका उपयोग नहीं करते।
भारत दिन प्रकाश बचत समय का नियमित उपयोग नहीं करता।
यह व्यवस्था समय क्षेत्र की प्राकृतिक आवश्यकता से अधिक प्रशासनिक और सामाजिक व्यवस्था है।
समय की गणना में आवश्यक नियम
समय संबंधी प्रश्नों में सबसे पहले दोनों स्थानों के देशांतरों का अंतर निकालना चाहिए।
यदि दोनों देशांतर एक ही दिशा में हों, जैसे दोनों पूर्व देशांतर, तो बड़े देशांतर में से छोटे देशांतर को घटाया जाता है।
यदि एक स्थान पूर्व और दूसरा पश्चिम देशांतर पर हो, तो दोनों देशांतरों को जोड़ दिया जाता है।
इसके बाद—
देशांतर का अंतर × 4 मिनट
करने पर समय का अंतर प्राप्त होता है।
पूर्व का स्थान समय में आगे और पश्चिम का स्थान पीछे होगा।
यदि गणना करते समय आधी रात पार हो जाए तो तिथि भी उसी अनुसार बदलनी होगी।
परीक्षा के लिए आवश्यक तथ्य
पृथ्वी लगभग 24 घंटे में 360° घूमती है।
15° देशांतर = 1 घंटा।
1° देशांतर = 4 मिनट।
1 मिनट देशांतर = 4 सेकंड समय।
पृथ्वी पश्चिम से पूर्व दिशा में घूमती है।
इसलिए पूर्व की ओर स्थानीय समय आगे तथा पश्चिम की ओर पीछे होता है।
एक ही देशांतर पर स्थित स्थानों का स्थानीय समय लगभग समान होता है।
0° देशांतर ग्रीनविच से गुजरने वाली प्रधान मध्याह्न रेखा है।
भारत का मानक मध्याह्न 82°30′ पूर्व देशांतर है।
यह मिर्जापुर के निकट से गुजरता है।
भारतीय मानक समय UTC +5:30 है।
भारत के पूर्वी और पश्चिमी छोर के स्थानीय समय में लगभग 2 घंटे का अंतर है।
सैद्धांतिक रूप से पृथ्वी को लगभग 24 समय क्षेत्रों में बाँटा जाता है।
समय क्षेत्रों की वास्तविक सीमाएँ राजनीतिक और प्रशासनिक कारणों से 15° वाले आदर्श विभाजन से अलग हो सकती हैं।
अंतरराष्ट्रीय तिथि रेखा लगभग 180° देशांतर के आसपास स्थित है।
180° देशांतर और अंतरराष्ट्रीय तिथि रेखा को पूर्णतः समान नहीं मानना चाहिए।
अंतरराष्ट्रीय तिथि रेखा मुख्यतः प्रशांत महासागर से गुजरती है।
इसे पश्चिम की ओर पार करने पर एक दिन जोड़ा जाता है और पूर्व की ओर पार करने पर एक दिन घटाया जाता है।
भारत नियमित रूप से दिन प्रकाश बचत समय का उपयोग नहीं करता।
निष्कर्ष
समय की भौगोलिक व्यवस्था पृथ्वी के घूर्णन और देशांतर से सीधे जुड़ी हुई है। पृथ्वी 24 घंटे में 360° घूमती है, इसलिए अलग-अलग देशांतरों पर स्थानीय समय अलग होता है। प्रशासनिक सुविधा के लिए देशों द्वारा मानक समय और समय क्षेत्र निर्धारित किए गए हैं। भारत 82°30′ पूर्व देशांतर के स्थानीय समय को भारतीय मानक समय के रूप में अपनाता है, जो UTC से 5 घंटे 30 मिनट आगे है। पृथ्वी के लगभग विपरीत भाग में स्थित अंतरराष्ट्रीय तिथि रेखा विश्वव्यापी तिथि परिवर्तन को व्यवस्थित करती है। समय, देशांतर और तिथि परिवर्तन की यही समझ आगे विश्व मानचित्रण, परिवहन, अंतरराष्ट्रीय संचार और स्थान-आधारित प्रश्नों को समझने का आधार बनती है।