1.5.3 प्लेट विवर्तनिकी

पृथ्वी का कठोर बाहरी स्थलमंडल अनेक बड़े और छोटे खंडों में विभाजित है। इन खंडों को विवर्तनिक प्लेटें (Tectonic Plates) कहा जाता है।

इन प्लेटों की गति, पारस्परिक क्रिया और उनके कारण बनने वाली भू-आकृतियों तथा भूगर्भीय घटनाओं का अध्ययन प्लेट विवर्तनिकी (Plate Tectonics) कहलाता है।

यह आधुनिक भूविज्ञान का सबसे महत्वपूर्ण एकीकृत सिद्धांत है।

प्लेट क्या है?

प्लेट केवल भूपर्पटी नहीं है।

एक स्थलमंडलीय प्लेट में—

दोनों शामिल होते हैं।

इसलिए—

स्थलमंडल = भूपर्पटी + कठोर ऊपरी मैंटल।

प्लेटें कहाँ चलती हैं?

स्थलमंडलीय प्लेटों के नीचे अपेक्षाकृत कमजोर और दीर्घकाल में प्रवाही दुर्बलतामंडल (Asthenosphere) स्थित है।

प्लेटें इसके ऊपर गति करती हैं।

लेकिन प्लेट गति को केवल “पिघले मैग्मा पर तैरना” कहना गलत है।

दुर्बलतामंडल मुख्यतः ठोस है, पर भूवैज्ञानिक समय में नम्य व्यवहार करता है।

सिद्धांत का विकास

प्लेट विवर्तनिकी एक व्यक्ति द्वारा एक ही समय में नहीं दी गई।

यह अनेक वैज्ञानिक प्रगतियों का परिणाम है—

तुजो विल्सन

कनाडाई भूभौतिकविद् तुजो विल्सन ने रूपांतर भ्रंश और हॉटस्पॉट जैसी अवधारणाओं के विकास में प्रमुख भूमिका निभाई।

मैकेंज़ी, पार्कर और मॉर्गन

1960 के दशक के अंत में पृथ्वी की सतह को कठोर प्लेटों की गतिशील प्रणाली के रूप में गणितीय रूप से विकसित करने में इन वैज्ञानिकों का महत्वपूर्ण योगदान रहा।

प्लेट सीमाएँ

तीन मुख्य प्रकार—

अपसारी सीमा

प्लेटें दूर जाती हैं।

नई पर्पटी बनती है।

उदाहरण—मध्य-अटलांटिक कटक।

अभिसारी सीमा

प्लेटें पास आती हैं।

सबडक्शन या महाद्वीपीय टक्कर हो सकती है।

उदाहरण—एंडीज, हिमालय।

रूपांतरित सीमा

प्लेटें एक-दूसरे के समानांतर विपरीत दिशा में खिसकती हैं।

उदाहरण—सैन एंड्रियास भ्रंश।

प्लेट गति के परिणाम

प्लेट विवर्तनिकी समझाती है—

प्लेट गति की दर

प्लेटें सामान्यतः कुछ मिलीमीटर से कई सेंटीमीटर प्रति वर्ष के क्रम में चलती हैं।

यह मानव दृष्टि से धीमी, लेकिन करोड़ों वर्षों में अत्यंत बड़ी दूरी तय करने के लिए पर्याप्त है।

प्लेट गति के प्रमुख बल

आधुनिक व्याख्या में प्रमुख बल—

इनके सापेक्ष महत्व में क्षेत्रीय अंतर हो सकता है।

भारतीय प्लेट

भारतीय प्लेट पहले गोंडवानालैंड का भाग थी।

यह उत्तर की ओर तेजी से बढ़ी और यूरेशियाई प्लेट से टकराई।

इससे—

उत्पन्न हुई।

इंडो-ऑस्ट्रेलियाई जटिलता

पुरानी पुस्तकों में भारत और ऑस्ट्रेलिया को एक संयुक्त इंडो-ऑस्ट्रेलियाई प्लेट कहा जाता है।

आधुनिक अध्ययन भारतीय, ऑस्ट्रेलियाई और कैप्रिकॉर्न खंडों के बीच आंतरिक विकृति और अलग गति दिखाते हैं।

इसलिए इसे कठोर एकल प्लेट मानना अत्यधिक सरल हो सकता है।

2025 का समसामयिक अद्यतन

2025 में तिब्बत के नीचे भारतीय स्थलमंडल के कुछ भागों में फटने और अलग-अलग संरचनात्मक व्यवहार के संकेत मिले।

इससे पता चलता है कि महाद्वीप–महाद्वीप टक्कर में प्लेटें हमेशा एक अखंड कठोर पट्टी की तरह व्यवहार नहीं करतीं।

2025–2026 प्लेट गति के कारणों पर वैज्ञानिक बहस

2024 के एक वैश्विक भू-गतिशील मॉडल ने भारतीय प्लेट की गति में तेज ऊपरी-मैंटल प्रवाह और प्लेट के आधार पर खिंचाव को महत्वपूर्ण माना।

इसके विपरीत 2025 के उच्च-रिज़ॉल्यूशन मॉडल ने सुमात्रा–जावा सबडक्शन से उत्पन्न स्लैब पुल को वर्तमान भारत–यूरेशिया अभिसरण का प्रमुख चालक बताया और आधारभूत मैंटल खिंचाव को गौण माना।

परीक्षा-योग्य सावधानी

प्लेट गति का एक ही सार्वभौमिक कारण नहीं लिखें।

अलग प्लेटों और अलग समयों में विभिन्न बलों का योगदान अलग हो सकता है।

सत्यापित संघ लोक सेवा आयोग प्रारंभिक परीक्षा प्रश्न

प्रत्यक्ष एक-पंक्ति परिभाषा वाला हालिया प्रश्न स्पष्ट रूप से सत्यापित नहीं मिला।

सत्यापित संघ लोक सेवा आयोग मुख्य परीक्षा प्रश्न

भूगोल वैकल्पिक, 2014

प्रश्न:

प्लेट विवर्तनिकी की अवधारणा स्पष्ट कीजिए और बताइए कि यह हिमालय तथा अपालेशियन पर्वतों की उत्पत्ति कैसे समझाती है।

भूगोल वैकल्पिक, 2021

प्लेट विवर्तनिकी की अवधारणा को समस्थिति और महाद्वीपीय विस्थापन से विकसित होने की व्याख्या माँगी गई।

सत्यापित बिहार लोक सेवा आयोग प्रारंभिक परीक्षा प्रश्न

69वीं प्रारंभिक परीक्षा, 2023

पृथ्वी की पर्पटी के बड़े टुकड़ों की धीमी गति को समझाने वाला सिद्धांत पूछा गया।

सही उत्तर:

प्लेट विवर्तनिकी।

सत्यापित बिहार लोक सेवा आयोग मुख्य परीक्षा प्रश्न

प्रत्यक्ष सत्यापित प्रश्न नहीं मिला।

प्रारंभिक परीक्षा के अंतिम तथ्य

प्लेट = स्थलमंडलीय खंड।

प्लेट केवल भूपर्पटी नहीं है।

तीन मुख्य सीमा प्रकार—अपसारी, अभिसारी, रूपांतरित।

हिमालय—महाद्वीप–महाद्वीप अभिसरण।

मध्य-महासागरीय कटक—अपसारी सीमा।

सैन एंड्रियास—रूपांतरित सीमा।

निष्कर्ष

प्लेट विवर्तनिकी पृथ्वी की सतह की गतिशीलता का एकीकृत सिद्धांत है। यह महाद्वीपीय विस्थापन, समुद्रतल प्रसार, भूकंप, ज्वालामुखिता और पर्वतनिर्माण को एक ही भूगतिशील ढाँचे में समझाता है।