यूपीएससी भूगोल › भौतिक भूगोल › 1.6 भूकंप › 1.6.1

1.6.1 भूकंप की मूल अवधारणाएँ

भूकंप को सही तरह समझने के लिए पाँच मूल अवधारणाएँ सबसे महत्वपूर्ण हैं—

  1. भूकंप केंद्र
  2. अधिकेंद्र
  3. भ्रंश
  4. परिमाण
  5. तीव्रता

इनके साथ प्रत्यास्थ पुनरागमन और भूकंपीय तरंगों का संबंध समझना आवश्यक है।

भूकंप कैसे शुरू होता है?

प्लेट गति या स्थानीय विवर्तनिक बलों से शैलों पर तनाव बढ़ता है।

शैलें कुछ समय तक प्रत्यास्थ विकृति सहती हैं।

भ्रंश पर घर्षण उन्हें अटकाए रखता है।

जब तनाव घर्षण और शैल शक्ति से अधिक हो जाए, तो भ्रंश अचानक खिसकता है।

संचित प्रत्यास्थ ऊर्जा भूकंपीय तरंगों में मुक्त होती है।

इसे प्रत्यास्थ पुनरागमन सिद्धांत (Elastic Rebound Theory) कहा जाता है।

1. भूकंप केंद्र

पृथ्वी के भीतर वह बिंदु जहाँ भ्रंश पर टूटन या फिसलन शुरू होती है, भूकंप केंद्र (Focus/Hypocentre) कहलाता है।

यह वास्तविक ऊर्जा-मुक्ति का प्रारंभिक स्थान है।

केंद्र की गहराई भूकंप के प्रभाव को प्रभावित करती है।

उथला केंद्र

0–70 किमी।

आम तौर पर सतह पर अधिक तीव्र कंपन दे सकता है।

मध्यम गहराई

70–300 किमी।

गहरा केंद्र

300–700 किमी।

मुख्यतः सबडक्शन क्षेत्रों में।

2. अधिकेंद्र

भूकंप केंद्र के ठीक ऊपर पृथ्वी की सतह पर स्थित बिंदु अधिकेंद्र (Epicentre) कहलाता है।

परीक्षा-फँद

भूकंप की ऊर्जा अधिकेंद्र से पैदा नहीं होती।

ऊर्जा का प्रारंभिक स्रोत केंद्र है।

अधिकेंद्र केवल उसका सतही प्रक्षेपण है।

3. भ्रंश

शैल में ऐसी दरार जिसके दोनों ओर वास्तविक सापेक्ष विस्थापन हुआ हो, भ्रंश (Fault) कहलाती है।

सामान्य भ्रंश

तनावात्मक बल।

ऊपरी खंड नीचे जाता है।

रिफ्ट और अपसारी क्षेत्रों में सामान्य।

उत्क्रम भ्रंश

संपीड़न।

ऊपरी खंड ऊपर चढ़ता है।

थ्रस्ट भ्रंश

कम कोण वाला उत्क्रम भ्रंश।

हिमालय में अत्यंत महत्वपूर्ण।

स्ट्राइक-स्लिप भ्रंश

मुख्य गति क्षैतिज।

सैन एंड्रियास और सागाइंग प्रमुख उदाहरण।

भूकंप और भ्रंश का संबंध

हर भ्रंश हर समय सक्रिय नहीं।

सक्रिय भ्रंश वह है जिसने हाल के भूवैज्ञानिक समय में गति की हो और भविष्य में भी भूकंप उत्पन्न करने की क्षमता रखता हो।

कभी पुराने भ्रंश भी नए तनाव क्षेत्र में पुनः सक्रिय हो सकते हैं।

भारत के प्रायद्वीपीय अंतःप्लेट भूकंपों में यह महत्वपूर्ण है।

4. परिमाण

भूकंप स्रोत के आकार और मुक्त ऊर्जा का मात्रात्मक माप परिमाण (Magnitude) कहलाता है।

एक भूकंप का एक प्रमुख परिमाण मान होता है।

स्थान बदलने से परिमाण नहीं बदलता।

रिक्टर पैमाना

ऐतिहासिक रूप से प्रसिद्ध।

स्थानीय भूकंपों के लिए भूकंपीय तरंग आयाम पर आधारित।

बड़े भूकंपों के लिए इसकी सीमाएँ हैं।

आघूर्ण परिमाण

आधुनिक बड़े भूकंपों के लिए आघूर्ण परिमाण पैमाना (Moment Magnitude Scale, Mw) अधिक उपयुक्त है।

यह निर्भर करता है—

पर।

परीक्षा-सावधानी

समाचारों में “रिक्टर पैमाना” सामान्य शब्द की तरह लिखा जाता है, लेकिन आधुनिक बड़े भूकंप अक्सर Mw में दिए जाते हैं।

परिमाण का लघुगणकीय स्वभाव

परिमाण में 1 इकाई वृद्धि पर दर्ज तरंग आयाम लगभग 10 गुना बढ़ता है।

ऊर्जा वृद्धि इससे कहीं अधिक, लगभग 32 गुना के क्रम की होती है।

इसलिए M7 भूकंप M6 से केवल “थोड़ा” बड़ा नहीं होता।

5. तीव्रता

किसी विशेष स्थान पर महसूस हुई कंपन, मानव अनुभव और संरचनात्मक क्षति का माप तीव्रता (Intensity) कहलाता है।

यह—

पर निर्भर करती है।

एक ही भूकंप की तीव्रता अलग स्थानों पर अलग होगी।

संशोधित मर्काली तीव्रता

संशोधित मर्काली तीव्रता पैमाना (Modified Mercalli Intensity) I से XII तक जाता है।

I — लगभग महसूस न होने वाला।

XII — अत्यधिक विनाशकारी।

परिमाण और तीव्रता में अंतर

आधार परिमाण तीव्रता
अर्थ स्रोत का आकार/ऊर्जा स्थान विशेष पर प्रभाव
मान एक भूकंप के लिए एक मुख्य मान स्थान अनुसार बदलता
आधार यंत्र और स्रोत भौतिकी कंपन, क्षति, अनुभव
उदाहरण Mw 7.0 MMI VIII

भूकंपीय तरंगों की भूमिका

भूकंप स्रोत से ऊर्जा तरंगों में बाहर जाती है।

पी तरंग सबसे पहले।

एस तरंग बाद में।

सतही तरंगें कई बार सबसे अधिक संरचनात्मक क्षति करती हैं।

पी–एस आगमन समय के अंतर से भूकंप केंद्र की दूरी अनुमानित की जा सकती है।

कई स्टेशनों के आँकड़े मिलाकर अधिकेंद्र निर्धारित किया जाता है।

अधिकेंद्र निर्धारण

कम से कम तीन भूकंपमापी स्टेशनों से दूरी ज्ञात कर वृत्त बनाए जाते हैं।

इनका प्रतिच्छेदन अधिकेंद्र का अनुमान देता है।

आधुनिक भूकंप विज्ञान में संगणकीय नेटवर्क इससे कहीं अधिक परिष्कृत विधि उपयोग करते हैं।

स्थानीय मिट्टी और तीव्रता

नरम अवसाद भूकंपीय तरंगों को बढ़ा सकते हैं।

इससे समान दूरी पर कठोर चट्टान वाले क्षेत्र की तुलना में अधिक कंपन हो सकता है।

इसे स्थल प्रभाव (Site Effect) कहा जाता है।

द्रवीकरण

जलसंतृप्त ढीली रेतीली मिट्टी में तीव्र कंपन से कणों के बीच प्रभावी तनाव घट सकता है।

मिट्टी अस्थायी रूप से द्रव-जैसा व्यवहार कर सकती है।

इसे द्रवीकरण (Liquefaction) कहते हैं।

यह भवन, सड़क और पाइपलाइन को गंभीर नुकसान पहुँचा सकता है।

2025 म्यांमार भूकंप से अवधारणा

M7.7 मंडले भूकंप ने सागाइंग स्ट्राइक-स्लिप भ्रंश के लगभग 475 किमी भाग को तोड़ा।

यह दिखाता है—

2025 दक्षिणी तिब्बत भूकंप

M7.1 घटना उथले सामान्य भ्रंश पर हुई।

यह दिखाती है कि एक अभिसारी महाद्वीपीय क्षेत्र के भीतर भी स्थानीय विस्तारात्मक भ्रंश भूकंप उत्पन्न कर सकते हैं।

बिहार के लिए अवधारणा

उत्तर बिहार हिमालयी भूकंपीय प्रभाव क्षेत्र के निकट है।

इसके अतिरिक्त गंगा मैदान की मोटी अवसादी परतें स्थानीय कंपन को प्रभावित कर सकती हैं।

इसलिए BPSC के लिए केवल “भूकंप कहाँ आता है” नहीं, बल्कि स्थानीय भूगर्भ + भवन भेद्यता + जनसंख्या को जोखिम का भाग समझना चाहिए।

सटीक भविष्यवाणी की सीमा

केंद्र, अधिकेंद्र और भ्रंश घटना के बाद बहुत सटीकता से निर्धारित किए जा सकते हैं।

लेकिन किसी बड़े भूकंप का सटीक समय, स्थान और परिमाण पहले से विश्वसनीय रूप से बताना अभी संभव नहीं।

वैज्ञानिक कार्य—

पर केंद्रित है।

सत्यापित संघ लोक सेवा आयोग प्रारंभिक परीक्षा PYQ

UPSC प्रारंभिक परीक्षा, 2023

पी और एस तरंगों के आगमन क्रम तथा कण गति पर प्रश्न पूछा गया।

दोनों दिए गए कथन सही थे।

सत्यापित संघ लोक सेवा आयोग मुख्य परीक्षा PYQ

भूगोल वैकल्पिक, 2014

प्रश्न:

भूकंप की तीव्रता और परिमाण में अंतर स्पष्ट कीजिए तथा भारत के विभिन्न भागों में इसके अलग प्रभाव की व्याख्या कीजिए।

यह इस विषय का अत्यंत प्रत्यक्ष PYQ है।

सत्यापित बिहार लोक सेवा आयोग प्रारंभिक परीक्षा PYQ

केंद्र–अधिकेंद्र–परिमाण–तीव्रता के पूरे समूह पर प्रत्यक्ष वर्ष-सहित विश्वसनीय प्रश्न सत्यापित नहीं मिला।

अतः अभ्यास प्रश्न को PYQ के रूप में नहीं जोड़ा गया है।

सत्यापित बिहार लोक सेवा आयोग मुख्य परीक्षा PYQ

प्रत्यक्ष सत्यापित प्रश्न नहीं मिला।

प्रारंभिक परीक्षा के अंतिम तथ्य

केंद्र = पृथ्वी के भीतर।

अधिकेंद्र = केंद्र के ऊपर सतह।

परिमाण = भूकंप स्रोत का आकार।

तीव्रता = स्थान विशेष का प्रभाव।

Mw आधुनिक बड़े भूकंपों के लिए प्रमुख।

रिक्टर पैमाना ऐतिहासिक स्थानीय परिमाण पैमाना।

MMI तीव्रता I–XII।

एक ही भूकंप की तीव्रता अलग-अलग स्थानों पर अलग।

निष्कर्ष

भूकंप की मूल अवधारणाओं में केंद्र, अधिकेंद्र, भ्रंश, परिमाण और तीव्रता का स्पष्ट अंतर सबसे महत्वपूर्ण है। इन्हीं आधारों पर भूकंप के स्रोत, तरंग प्रसार, क्षति और जोखिम का वैज्ञानिक विश्लेषण किया जाता है।