1. मुद्रा की अवधारणा एवं आपूर्ति (Money Supply & Aggregates)
1.1 मुद्रा के प्रकार एवं कार्य (Types & Functions of Money)
मुद्रा विनिमय का वह सर्वमान्य माध्यम है जो वस्तुओं और सेवाओं के मूल्य मापन, संचय और हस्तांतरण का कार्य करती है।
1.2 मुद्रा आपूर्ति के माप (Money Supply Aggregates)
आरबीआई द्वारा भारतीय अर्थव्यवस्था में तरलता और मुद्रा की मात्रा मापने के लिए निम्नलिखित चार संकेतकों (M_0, M_1, M_2, M_3, M_4) का उपयोग किया जाता है:
[ मुद्रा आपूर्ति के मापक ]
│
┌─────────────────────┴─────────────────────┐
[ संकीर्ण मुद्रा (Narrow Money) ] [ व्यापक मुद्रा (Broad Money) ]
│ │
┌────┴────┐ ┌────┴────┐
[M₀] [M₁] [M₂] [M₃] & [M₄]
(आधार (जनता की (M₁ + (M₁ + आवधिक जमा /
मुद्रा) करेंसी + डाकघर डाकघर कुल जमा)
माँग जमा) बचत)
M_0):नोट: इसे केंद्रीय बैंक का कुल दायित्व (Liability) भी कहा जाता है।
M_1):M_2 मुद्रा:M_3):नोट: M_3 नीतिगत विश्लेषण के लिए मुद्रा आपूर्ति का सबसे महत्वपूर्ण और प्रयुक्त मापक है।
M_4 मुद्रा:| मापक | घटक | तरलता का क्रम (Liquidity Order) |
|---|---|---|
M_0 | आरक्षित मुद्रा / हाई-पावर्ड मनी | सर्वाधिक उच्च तरलता (मूल केंद्र) |
M_1 | जनता के पास नकदी + माँग जमा | सर्वाधिक तरल (Most Liquid) |
M_2 | M_1 + डाकघर बचत जमा | उच्च तरलता |
M_3 | M_1 + बैंकों में आवधिक जमा | मध्यम तरलता (व्यापक मापक) |
M_4 | M_3 + डाकघर कुल जमा | न्यूनतम तरल (Least Liquid) |
1.3 मुद्रा गुणक (Money Multiplier - MM)
मुद्रा गुणक यह दर्शाता है कि प्राथमिक आरक्षित मुद्रा (M_0) की प्रति इकाई वृद्धि से अर्थव्यवस्था में व्यापक मुद्रा (M_3) का कितना सृजन होता है।
$ ext{Money Multiplier (MM)} = rac{ ext{ व्यापक मुद्रा (M}_3 ext{)}}{ ext{आधार मुद्रा (M}_0 ext{)}}$
मुद्रा गुणक के निर्धारक कारक:
CRR बढ़ने पर बैंकों की साख सृजन क्षमता घटती है \Rightarrow मुद्रा गुणक कम होता है।c/d): यदि जनता नकदी के रूप में पैसा अधिक रखती है और बैंक में जमा कम करती है \Rightarrow मुद्रा गुणक कम होता है।\Rightarrow जमा में वृद्धि \Rightarrow मुद्रा गुणक में वृद्धि।$ ext{मुद्रा गुणक (MM)} \propto rac{1}{ ext{CRR / Reserve Ratio}}$
2. मुद्रास्फीति एवं इसकी गतिकी (Inflation & Dynamics)
2.1 मुद्रास्फीति की अवधारणा एवं वर्गीकरण
मुद्रास्फीति (Inflation) से तात्पर्य समय के साथ वस्तुओं और सेवाओं की सामान्य कीमत स्तर में सतत एवं व्यापक वृद्धि से है, जिसके परिणामस्वरूप मुद्रा की क्रय शक्ति (Purchasing Power) में कमी आती है।
दर के आधार पर वर्गीकरण:
कारण के आधार पर वर्गीकरण:
[ मुद्रास्फीति के प्रकार ]
│
┌───────────────────────┴───────────────────────┐
[ माँग-जन्य मुद्रास्फीति ] [ लागत-जन्य मुद्रास्फीति ]
(Demand-Pull Inflation) (Cost-Push Inflation)
• मुद्रा आपूर्ति में अत्यधिक वृद्धि • कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि
• राजकोषीय प्रोत्साहन व व्यय • आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान
• जनसंख्या व उपभोग में वृद्धि • मजदूरी व करों में वृद्धि
2.2 मुद्रास्फीति मापन के सूचकांक (Indices of Inflation: WPI vs. CPI)
| सूचकांक पैरामीटर | थोक मूल्य सूचकांक (WPI) | उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) |
|---|---|---|
| जारीकर्ता संस्था | आर्थिक सलाहकार कार्यालय (DPIIT), वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय | राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO), सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) |
| बाजार का स्तर | थोक मंडी/प्रारंभिक चरण (Mandi Level) | खुदरा/उपभोक्ता स्तर (Retail Level) |
| शामिल घटक | केवल वस्तुएं (Goods Only) (सेवाएं शामिल नहीं) | वस्तुएं एवं सेवाएं (Goods + Services) दोनों |
| आधार वर्ष (Base Year) | 2011-12 | 2012 |
| सर्वाधिक भारांश (Weightage) | निर्मित उत्पाद (Manufactured Products) ~ 64.2% | खाद्य एवं पेय पदार्थ (Food & Beverages) ~ 45.86% |
| RBI का नीतिगत आधार | 2014 से पहले प्रयुक्त | 2014 के बाद (उर्जित पटेल समिति) मौद्रिक नीति का मुख्य आधार |
2.3 महत्वपूर्ण शब्दावलियाँ (Key Inflation Concepts)
मुद्रास्फीति दर (%)
│
High│ │ \ (फिलिप्स वक्र - अल्पकालिक)
│ Low│_____\_________________
0 High बेरोजगारी दर (%)
3. मौद्रिक नीति एवं भारतीय रिजर्व बैंक (Monetary Policy & RBI)
3.1 भारतीय रिजर्व बैंक की संरचना एवं कार्य
भारतीय रिजर्व बैंक अधिनियम, 1934 के तहत 1 अप्रैल 1935 को स्थापित RBI भारत का केंद्रीय बैंक है।
3.2 मौद्रिक नीति समिति (Monetary Policy Committee - MPC)
आरबीआई अधिनियम, 1934 की धारा 45ZB के तहत उर्जित पटेल समिति की सिफारिश पर 2016 में MPC का गठन किया गया।
2\% से कम या 6\% से अधिक बनी रहती है, तो RBI को केंद्र सरकार को विफलता का कारण और सुधारात्मक उपाय प्रस्तुत करने होते हैं।3.3 मौद्रिक नीति के उपकरण (Tools of Monetary Policy)
[ मौद्रिक नीति के उपकरण ]
│
┌───────────────────────┴───────────────────────┐
[ मात्रात्मक उपकरण (Quantitative) ] [ गुणात्मक उपकरण (Qualitative) ]
• CRR, SLR (आरक्षित अनुपात) • मार्जिन आवश्यकताएँ
• Repo, SDF, MSF, Bank Rate • नैतिक दबाव (Moral Suasion)
• OMO (खुले बाजार की क्रियाएं) • ऋण की राशनिंग (Direct Action)
A. मात्रात्मक/परिमाणात्मक उपकरण (Quantitative Tools):
\Rightarrow बाजार से तरलता का निष्कासन (Liquidity Mop-up).\Rightarrow बाजार में तरलता का प्रवाह (Liquidity Injection).B. तरलता समायोजन सुविधा (Liquidity Adjustment Facility - LAF) कॉरिडोर:
3.4 मौद्रिक नीति संचरण (Monetary Policy Transmission) एवं चुनौतियाँ
मौद्रिक नीति संचरण का अर्थ है RBI द्वारा नीतिगत रेपो दर में किए गए बदलावों का वाणिज्यिक बैंकों की ऋण दरों (Lending Rates) तक पहुँचना।
मौद्रिक नीति संचरण प्रणाली का विकास:
ightarrow$ बेस रेट (Base Rate)**
4. भारतीय बैंकिंग संरचना एवं बैंकिंग क्षेत्र में सुधार (Banking Structure & Reforms)
4.1 भारतीय बैंकिंग प्रणाली की संरचना
[ भारतीय बैंकिंग प्रणाली ]
│
┌───────────────────────┴───────────────────────┐
[ वाणिज्यिक बैंक (Commercial Banks) ] [ सहकारी बैंक (Cooperative Banks) ]
│ │
┌─────┴───────────────────┐ ┌─────┴───────────────────┐
[अनुसूचित बैंक] [गैर-अनुसूचित] [शहरी सहकारी] [ग्रामीण सहकारी]
(RBI Act 2nd Sch.) (UCBs) (STCBs / DCCBs)
│
┌─────┼───────────────┬──────────────┐
[सार्वजनिक] [निजी] [विदेशी] [RRBs] [पेमेंट/लघु वित्त बैंक]
4.2 गैर-निष्पादित परिसंपत्तियाँ (Non-Performing Assets - NPA)
जब किसी ऋण का मूलधन (Principal) या ब्याज का भुगतान 90 दिनों की अवधि तक बकाया रहता है, तो उसे गैर-निष्पादित परिसंपत्ति (NPA) घोषित किया जाता है। (कृषि ऋणों के लिए: अल्पकालिक फसलों हेतु 2 फसल मौसम और दीर्घकालिक फसलों हेतु 1 फसल मौसम)।
NPA का वर्गीकरण:
[ संकटग्रस्त परिसंपत्ति (Stressed Assets) ]
│
┌──────────────┴──────────────┐
[विशेष उल्लेख खाता (SMA)] [गैर-निष्पादित परिसंपत्ति (NPA)]
• SMA-0: 1 - 30 दिन • सब-स्टैंडर्ड (Sub-Standard): 12 माह तक NPA
• SMA-1: 31 - 60 दिन • संदिग्ध (Doubtful): 12 माह से अधिक NPA
• SMA-2: 61 - 90 दिन • हानि परिसंपत्ति (Loss Asset): पूर्णतः डूबा ऋण
4.3 एनपीए समाधान के विधायी एवं संस्थागत उपाय (NPA Resolution Framework)
4.4 बासेल मानक (Basel Norms) एवं जोखिम प्रबंधन
बैंक फॉर इंटरनेशनल सेटलमेंट्स (BIS), स्विट्जरलैंड द्वारा वैश्विक बैंकिंग प्रणाली की स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए बासेल मानक जारी किए जाते हैं।
$ ext{CRAR} = rac{ ext{Tier-1 Capital} + ext{Tier-2 Capital}}{ ext{जोखिम भारित परिसंपत्तियाँ (Risk Weighted Assets)}}$
5. UPSC परीक्षा विशेष मॉड्यूल (Prelims & Mains Practice)
5.1 प्रीलिम्स त्वरित पुनरीक्षण बिंदु (Quick Revision Points)
M_1 और M_2 को संकीर्ण मुद्रा, जबकि M_3 और M_4 को व्यापक मुद्रा कहा जाता है।M_1 अपरिवर्तित रहता है, लेकिन मुद्रा गुणक की प्रक्रिया शुरू हो जाती है।5.2 प्रीलिम्स अभ्यास प्रश्न (Prelims Practice Questions)
प्रश्न 1 (UPSC आधारित):
निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? (a) केवल 1 और 2 (b) केवल 1 और 3 (c) केवल 2 और 3 (d) 1, 2 और 3
उत्तर: (b) व्याख्या: कथन 1 सही है (RBI गवर्नर MPC के पदेन अध्यक्ष होते हैं)। कथन 2 गलत है क्योंकि CRR बढ़ाने से बैंकों की साख सृजन क्षमता घटती है, जिससे मुद्रा गुणक घटता है (MM \propto 1/CRR)। कथन 3 सही है (CPI में खाद्य पदार्थों का भार ~45.86% है जबकि WPI में प्राथमिक खाद्य वस्तुएं केवल ~15.2% हैं)।
5.3 मेन्स अभ्यास प्रश्न एवं उत्तर-लेखन ढाँचा (Mains Answer Blueprint)
प्रश्न: "भारतीय बैंकिंग क्षेत्रक में गैर-निष्पादित परिसंपत्तियों (NPA) के उच्च स्तर ने आर्थिक संवृद्धि और साख सृजन को बाधित किया है। इंसॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड (IBC) और 'बैड बैंक' (NARCL) की भूमिका का मूल्यांकन करते हुए इस संकट के स्थायी समाधान हेतु उपाय सुझाइए।" (250 शब्द, 15 अंक)
📝 उत्तर का विश्लेषणात्मक ढाँचा:
[ मेन्स उत्तर ढाँचा: NPA संकट व समाधान ]
│
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[भूमिका (Introduction)] [मुख्य भाग (Body Paragraphs)] [निष्कर्ष (Conclusion)]
• NPA की परिभाषा • NPA का आर्थिक संवृद्धि • 4R रणनीति का उल्लेख
• ट्विन बैलेंस शीट संकट व साख संचरण पर प्रभाव (Recognition, Resolution,
(TBS Problem) की स्थिति • IBC 2016 का मूल्यांकन Recapitalisation, Reforms)
• Bad Bank (NARCL) की भूमिका • स्थायी वित्तीय स्थिरता का
• विद्यमान चुनौतियाँ भावी रोडमैप