1. मानव पूँजी निर्माण की अवधारणा एवं समष्टि अर्थशास्त्र (Human Capital Formation & Macroeconomics)
1.1 भौतिक पूँजी बनाम मानव पूँजी (Physical Capital vs Human Capital)
NCERT (कक्षा 11वीं - भारतीय अर्थव्यवस्था का विकास) के अनुसार, किसी भी अर्थव्यवस्था के विकास के लिए दो प्रकार की पूँजी आवश्यक होती है:
| आधार | भौतिक पूँजी (Physical Capital) | मानव पूँजी (Human Capital) |
|---|
| परिभाषा | उत्पादन के भौतिक साधन जैसे मशीनरी, भवन, उपकरण आदि। | व्यक्तियों में निहित ज्ञान, कौशल, क्षमताएँ, स्वास्थ्य व विशेषज्ञता। |
| प्रकृति | मूर्त (Tangible) - इसे बाज़ार में प्रत्यक्ष रूप से बेचा जा सकता है। | अमूर्त (Intangible) - इसे स्वामी से अलग नहीं किया जा सकता। |
| गतिशीलता | देशों के बीच आसानी से स्थानांतरित हो सकती है। | सांस्कृतिक व भाषाई बाधाओं के कारण कम गतिशील। |
| मूल्यह्रास (Depreciation) | निरंतर उपयोग से इसका मूल्य घटता है। | आयु बढ़ने से ह्रास होता है, परंतु निरंतर शिक्षा व प्रशिक्षण से संवर्धन संभव। |
1.2 मानव पूँजी निर्माण के मुख्य स्रोत (Sources of Human Capital Formation)
1.शिक्षा पर व्यय (Investment in Education): यह भविष्य में उच्च आय सृजन की क्षमता प्रदान करता है।
2.स्वास्थ्य पर व्यय (Investment in Health): एक स्वस्थ श्रमिक अधिक उत्पादक होता है। इसमें निवारक (Preventive), उपचारात्मक (Curative) व सामाजिक स्वास्थ्य (Social Medicine) शामिल हैं।
3.कार्यस्थल पर प्रशिक्षण (On-the-job Training): श्रमिकों की उत्पादकता व दक्षता में वृद्धि करता है।
4.प्रवासन पर व्यय (Expenditure on Migration): उच्च आय वाले स्थानों पर जाने की लागत (परिवहन व जीवन-यापन व्यय)।
5.सूचना पर व्यय (Expenditure on Information): श्रम बाज़ार व अवसरों से संबंधित जानकारी प्राप्त करने पर व्यय।
2. भारत का जनसांख्यिकीय लाभांश एवं अवसर (Demographic Dividend & Windows of Opportunity)
2.1 जनसांख्यिकीय लाभांश की परिभाषा (Definition)
संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या कोष (UNFPA) के अनुसार, जनसांख्यिकीय लाभांश वह आर्थिक वृद्धि क्षमता है जो जनसंख्या की आयु संरचना में परिवर्तन के परिणामस्वरूप उत्पन्न होती है—विशेष रूप से जब कार्यशील आयु वर्ग (15 से 59/64 वर्ष) का अनुपात गैर-कार्यशील (आश्रित) जनसंख्या से अधिक हो जाता है।
\text{आश्रितता अनुपात (Dependency Ratio)} = \frac{\text{बाल जनसंख्या (0-14 वर्ष)} + \text{वृद्ध जनसंख्या (65+ वर्ष)}}{\text{कार्यशील जनसंख्या (15-64 वर्ष)}} \times 100
•जब आश्रितता अनुपात न्यूनतम होता है, तब बचत दर (Savings Rate) एवं निवेश क्षमता (Investment Capacity) उच्चतम होती है।
2.2 भारत की जनसांख्यिकीय खिड़की (India's Demographic Window)
•अवधि: भारत की जनसांख्यिकीय खिड़की वर्ष 2005 में शुरू हुई थी और यह लगभग 2055 (या 2041 तक शिखर पर) तक रहने का अनुमान है।
•औसत आयु (Median Age): भारत की मध्यका आयु लगभग 28.4 वर्ष है (चीन व अमेरिका की तुलना में काफ़ी कम)।
•आर्थिक लाभ का तंत्र (Economic Transmission Channels):
1.श्रम आपूर्ति (Labor Supply): अर्थव्यवस्था में श्रमिकों की अधिक उपलब्धता।
2.बचत (Savings): आश्रितों पर कम व्यय के कारण व्यक्तिगत व राष्ट्रीय बचत में वृद्धि।
3.मानव पूँजी (Human Capital): स्वास्थ्य व शिक्षा पर प्रति व्यक्ति अधिक संसाधन आवंटन की क्षमता।
2.3 जनसांख्यिकीय लाभांश की चुनौतियाँ एवं 'सिल्वर इकोनॉमी' (Challenges & Silver Economy)
•जनसांख्यिकीय आपदा की आशंका (Demographic Disaster Risk): यदि कार्यशील युवाओं को पर्याप्त गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, कौशल व रोजगार न मिले, तो यह बेरोजगारी व सामाजिक अशांति का कारण बन सकता है।
•राज्यों में असमानता (Regional Divergence): उत्तर भारतीय राज्यों (यूपी, बिहार) में युवा जनसंख्या का अनुपात अधिक है, जबकि दक्षिण भारतीय राज्यों (केरल, तमिलनाडु) में जनसंख्या तेजी से वृद्ध हो रही है।
•सिल्वर इकोनॉमी (Silver Economy): वृद्धजनों (60+ वर्ष) की बढ़ती जनसंख्या हेतु स्वास्थ्य देखभाल, पेंशन सुरक्षा तथा आर्थिक गतिविधियों के अनुकूल बाज़ार व अवसंरचना का विकास।
3. स्वास्थ्य अर्थशास्त्र एवं राष्ट्रीय नीतियाँ (Health Economics & National Policies)
3.1 भारत में स्वास्थ्य क्षेत्रक के मुख्य संकेतक (Key Indicators)
•जीडीपी का % व्यय: भारत का सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यय वर्तमान में जीडीपी का लगभग 2.1% है (राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति 2017 का लक्ष्य: 2.5%)।
•आउट-ऑफ़-पॉकेट एक्सपेंडिचर (OOPE): स्वास्थ्य पर जेब से होने वाला कुल व्यय कुल स्वास्थ्य व्यय का लगभग 47.1% है (आर्थिक समीक्षा के अनुसार इसमें गिरावट आई है, परंतु अभी भी वैश्विक औसत से अधिक है)। यह परिवारों को गरीबी में धकेलने का प्रमुख कारण है।
3.2 प्रमुख सरकारी पहलें (Major Health Interventions)
1.आयुष्मान भारत - PM-JAY:
•विश्व की सबसे बड़ी सरकारी वित्तपोषित स्वास्थ्य बीमा योजना।
•द्वितीयक व तृतीयक देखभाल (Secondary & Tertiary Care) हेतु प्रति परिवार ₹5 लाख प्रतिवर्ष का स्वास्थ्य कवर।
•आयुष्मान आरोग्य मंदिर (Health and Wellness Centres) के माध्यम से प्राथमिक स्वास्थ्य सेवा।
2.राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM): ग्रामीण व शहरी स्वास्थ्य प्रणालियों का सुदृढ़ीकरण, शिशु मृत्यु दर (IMR) व मातृ मृत्यु दर (MMR) में कमी लाना।
3.डिजिटल स्वास्थ्य (ABDM - Ayushman Bharat Digital Mission): ABHA (आयुष्मान भारत स्वास्थ्य खाता) ID के माध्यम से डिजिटल स्वास्थ्य रिकॉर्ड का एकीकरण।
4. शिक्षा व कौशल विकास अर्थशास्त्र (Education & Skill Development)
4.1 राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के आर्थिक आयाम
•सार्वजनिक निवेश लक्ष्य: शिक्षा क्षेत्र पर केंद्र व राज्यों का कुल सार्वजनिक व्यय जीडीपी का 6% करने का लक्ष्य।
•सकल नामांकन अनुपात (GER) लक्ष्य: उच्च शिक्षा में GER को 2035 तक 50% पहुँचाना (वर्तमान में ~28.4%)।
•व्यावसायिक शिक्षा (Vocational Education): कक्षा 6 से ही व्यावसायिक शिक्षा व इंटर्नशिप को एकीकृत करना।
4.2 भारत में कौशल विषमता (Skill Gap & Employability)
•समस्या: केवल ~5% भारतीय कार्यबल औपचारिक रूप से कुशल (Formally Skilled) है (दक्षिण कोरिया में 96% और जर्मनी में 75% की तुलना में)।
•प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना (PMKVY 4.0): उद्योग 4.0 (AI, रोबोटिक्स, 3D प्रिंटिंग) के अनुरूप कौशल प्रशिक्षण।
•राष्ट्रीय कौशल योग्यता ढाँचा (NSQF): योग्यता-आधारित कौशल स्तरों का मानकीकरण।
•स्किल इंडिया डिजिटल (SID) प्लेटफॉर्म: कौशल पारिस्थितिकी तंत्र का एकीकृत डिजिटल इंटरफ़ेस।
5. सामाजिक सुरक्षा, लैंगिक विकास व केयर इकोनॉमी (Social Security & Gender Development)
5.1 महिला श्रम बल सहभागिता (FLPR) एवं जेंडर बजटिंग
•FLPR स्थिति: आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण (PLFS) के अनुसार भारत में महिला श्रम बल सहभागिता दर में वृद्धि दर्ज की गई है (~37% से अधिक), परंतु इसमें ग्रामीण कृषि क्षेत्र में स्व-नियोजन का हिस्सा अधिक है।
•जेंडर बजटिंग (Gender Budgeting): 2005-06 से भारत के बजट में पेश की जाने वाली व्यवस्था।
•भाग A (Part A): 100% महिलाओं हेतु निर्दिष्ट योजनाएँ (जैसे- बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ)।
•भाग B (Part B): कम से कम 30% महिलाओं को लाभ पहुँचाने वाली योजनाएँ।
5.2 देखभाल अर्थशास्त्र (Care Economy)
•अवधारणा: बच्चों, बुजुर्गों व बीमारों की अवैतनिक देखभाल (Unpaid Care Work)।
•आर्थिक प्रभाव: भारतीय महिलाएँ पुरुषों की तुलना में अवैतनिक देखभाल कार्य पर कई गुना अधिक समय खर्च करती हैं।
•सुधार आवश्यकता: मातृत्व लाभ अधिनियम 2017 (26 सप्ताह का सवेतन अवकाश), क्रैश (Childcare) सुविधाएँ, तथा 'केयर वर्क्स' को औपचारिक अर्थशास्त्र में शामिल करना।
6. UPSC परीक्षा विशेष अभ्यास मॉड्यूल (Exam Special Module)
6.1 प्रारंभिक परीक्षा हेतु अभ्यास प्रश्न (Prelims Practice Questions)
प्रश्न 1. 'जनसांख्यिकीय लाभांश' (Demographic Dividend) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1.यह किसी देश की कार्यशील जनसंख्या (15-64 वर्ष) का गैर-कार्यशील जनसंख्या की तुलना में अनुपात बढ़ने से प्राप्त होने वाला आर्थिक लाभ है।
2.भारत में जनसांख्यिकीय लाभांश की खिड़की केवल दक्षिण भारतीय राज्यों तक सीमित है।
3.उच्च आश्रितता अनुपात (Dependency Ratio) जनसांख्यिकीय लाभांश को अधिकतम करने की प्राथमिक शर्त है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? (A) केवल 1 (B) केवल 1 और 2 (C) केवल 2 और 3 (D) 1, 2 और 3
उत्तर: (A)
व्याख्या: कथन 1 सही है। कथन 2 गलत है क्योंकि यह संपूर्ण भारत की जनसांख्यिकीय संरचना से संबंधित है (हालाँकि उत्तर व दक्षिण में समय का अंतर है)। कथन 3 गलत है क्योंकि जनसांख्यिकीय लाभांश हेतु आश्रितता अनुपात न्यूनतम होना चाहिए, उच्च नहीं।
6.2 मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन ढाँचा (Mains Answer Writing Blueprint)
प्रश्न: "केवल युवाओं की विशाल जनसंख्या होना जनसांख्यिकीय लाभांश की गारंटी नहीं है; इसके लिए गुणवत्तापूर्ण मानव पूँजी निर्माण आवश्यक है।" इस कथन के आलोक में भारत के समक्ष मौजूद चुनौतियों एवं आवश्यक नीतिगत उपायों की विवेचना कीजिए। (15 अंक, 250 शब्द)
उत्तर लेखन ढाँचा (Blueprint):
1.भूमिका (Introduction - 30 शब्द):
•जनसांख्यिकीय लाभांश को परिभाषित करें (कार्यशील आयु वर्ग का अधिक अनुपात) और भारत की वर्तमान जनसांख्यिकीय खिड़की (2005-2055, मध्यका आयु 28.4 वर्ष) का संक्षिप्त उल्लेख करें।
2.मुख्य भाग (Body - 180 शब्द):
•भाग A: जनसांख्यिकीय लाभांश को भुनाने में मानव पूँजी की चुनौतियाँ:
•शिक्षा व गुणवत्ता: असंतोषजनक सीखने के परिणाम (ASER रिपोर्ट) तथा उच्च शिक्षा में कम GER।
•स्वास्थ्य सम्बंधी बाधाएँ: उच्च आउट-ऑफ़-पॉकेट व्यय (OOPE ~47%), कुपोषण (स्टंटिंग/वेस्टिंग) तथा सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यय में कमी (~2.1% of GDP)।
•कौशल विषमता: औपचारिक रूप से कुशल श्रम का निम्न प्रतिशत (~5%) तथा उद्योग 4.0 हेतु तैयार कार्यबल का अभाव।
•कम महिला श्रम बल सहभागिता (FLPR): आधी आबादी की उत्पादक क्षमता का पूर्ण उपयोग न होना।
•भाग B: आवश्यक नीतिगत उपाय (Way Forward):
•राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020) के क्रियान्वयन हेतु जीडीपी का 6% आवंटन।
•आयुष्मान भारत व प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों के माध्यम से स्वास्थ्य व्यय को जीडीपी के 2.5% तक बढ़ाना।
•PMKVY 4.0 व उद्योग-अकादमिक साझेदारी द्वारा कौशल विकास।
•देखभाल अर्थशास्त्र (Care Economy) में निवेश एवं सुरक्षित कार्यस्थलों द्वारा FLPR को बढ़ावा देना।
3.निष्कर्ष (Conclusion - 40 शब्द):
•जनसांख्यिकीय लाभांश एक सीमित समय-सीमा वाली खिड़की (Time-bound window) है। मानव पूँजी में रणनीतिक निवेश द्वारा ही भारत 'जनसांख्यिकीय लाभांश' को 'जनसांख्यिकीय आपदा' बनने से रोक सकता है और 2047 तक 'विकसित भारत' का लक्ष्य प्राप्त कर सकता है।