विषय-सूची (Table of Contents)
1.समावेशी संवृद्धि की मूल अवधारणा (Concept of Inclusive Growth)
•अर्थ, परिभाषा और मूल दर्शन
•संवृद्धि (Economic Growth) बनाम समावेशी संवृद्धि (Inclusive Growth)
•समावेशी संवृद्धि के मुख्य स्तंभ (Core Pillars)
2.असमानता, गरीबी और रोजगार के आयाम (Inequality, Poverty & Employment)
•आय व संपत्ति विषमता (लॉरेंज वक्र, गिन्नी गुणांक, पाल्मा अनुपात)
•बहुआयामी गरीबी (Multidimensional Poverty Index - MPI)
•रोजगारहीन संवृद्धि (Jobless Growth) तथा श्रम बल सहभागिता दर (LFPR)
3.वित्तीय समावेशन (Financial Inclusion)
•वित्तीय समावेशन की आवश्यकता, स्तर और ढाँचा
•JAM त्रिमूर्ति (Jan Dhan, Aadhaar, Mobile) एवं डिजिटल वित्तीय संरचना
•प्राथमिकता प्राप्त क्षेत्रक ऋणदान (PSL), पेमेंट बैंक्स एवं SFBs
•स्व-सहायता समूह (SHG)-बैंक लिंकेज मॉडल
4.लैंगिक एवं सामाजिक समावेशन (Gender & Social Inclusion)
•जेंडर बजटिंग (Gender Budgeting - भाग A एवं B)
•महिला श्रम बल सहभागिता (FLPR) और देखभाल अर्थव्यवस्था (Care Economy)
•अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST), दिव्यांगजन व वृद्धजन का समावेशन
5.समावेशी संवृद्धि के समक्ष प्रमुख चुनौतियाँ (Major Bottlenecks)
•क्षेत्रीय असंतुलन (Regional Disparities)
•डिजिटल विभाजन (Digital Divide)
•गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, स्वास्थ्य और कौशल अंतराल
•कृषि एवं असंगठित क्षेत्रक की संरचनात्मक बाधाएँ
6.सरकारी पहलें एवं भावी रणनीति (Government Policy Framework & Way Forward)
•प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) एवं लक्षित जनकल्याण
•नीति आयोग का 'विकास रणनीति' दृष्टिकोण
•टिकाऊ एवं समावेशी संवृद्धि का रोडमैप (Way Forward)
7.UPSC परीक्षा विशेष मॉड्यूल (Prelims & Mains Practice)
•प्रीलिम्स हेतु त्वरित पुनरीक्षण तथ्य (Key Prelims Concepts)
•मेन्स उत्तर-लेखन मॉडल ढाँचा (Mains Answer Writing Frameworks)
1. समावेशी संवृद्धि की मूल अवधारणा (Concept of Inclusive Growth)
1.1 अर्थ एवं परिभाषा
समावेशी संवृद्धि (Inclusive Growth) का तात्पर्य ऐसी आर्थिक वृद्धि से है जो समाज के सभी वर्गों—विशेष रूप से निर्धन, वंचित, महिलाओं, ग्रामीण निवासियों तथा हाशिए पर स्थित समुदायों—तक आर्थिक लाभों का समान वितरण सुनिश्चित करती है।
•सरल शब्दों में: "केवल जीडीपी (GDP) का आकार बढ़ाना संवृद्धि है, परंतु उस जीडीपी वृद्धि में समाज के अंतिम व्यक्ति की भागीदारी और लाभ सुनिश्चित करना समावेशी संवृद्धि है।"
•संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (UNDP) के अनुसार: "समावेशी विकास वह विकास है जो जन-केन्द्रित हो, अवसरों का सृजन करे तथा सभी के लिए समान सामाजिक-आर्थिक सुरक्षा प्रदान करे।"
┌──────────────────────────────────────────────┐
│ समावेशी संवृद्धि (Inclusive Growth) │
└──────────────────────┬───────────────────────┘
│
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│ आर्थिक अवसर │ │ क्षमता निर्माण │ │ सामाजिक सुरक्षा │
│ (Employment, │ │ (Education, │ │ (Pensions, Food │
│ Credit, Land)│ │ Health, Skill) │ │ Security, Insurance)│
└──────────────┘ └────────────────┘ └───────────────────┘
1.2 संवृद्धि बनाम समावेशी संवृद्धि (Growth vs. Inclusive Growth)
| आधार | आर्थिक संवृद्धि (Economic Growth) | समावेशी संवृद्धि (Inclusive Growth) |
|---|
| प्रकृति | मात्रात्मक (Quantitative) | गुणात्मक एवं संचयी (Qualitative & Comprehensive) |
| मुख्य केंद्र | वस्तु एवं सेवाओं का कुल उत्पादन (GDP/GNP में वृद्धि) | आय का न्यायोचित वितरण, गरीबी उन्मूलन व अवसर की समानता |
| मापन | जीडीपी वृद्धि दर, प्रति व्यक्ति आय | गिन्नी गुणांक, HDI, बहुआयामी गरीबी सूचकांक (MPI) |
| प्रक्रिया | ऊपर से नीचे की ओर (Trickle-Down Theory पर आधारित) | नीचे से ऊपर की ओर (Bottom-Up Approach - जन भागीदारी) |
| दीर्घकालिक प्रभाव | यदि असमानता बढ़ती है तो असंतोष व मंदी का कारण बन सकती है | अर्थव्यवस्था को टिकाऊ, स्थिर एवं सामाजिक रूप से शांत बनाती है |
महत्वपूर्ण विश्लेषण: पारम्परिक 'ट्रिकल-डाउन सिद्धांत' (Trickle-Down Theory) यह मानती थी कि उच्च संवृद्धि दर का लाभ स्वतः ही गरीब वर्गों तक पहुँच जाएगा। परंतु भारत के आर्थिक इतिहास ने सिद्ध किया है कि ट्रिकल-डाउन प्रभाव सीमित रहा है, जिसके कारण 'संवृद्धि के साथ समावेशन' की आवश्यकता महसूस हुई।
1.3 समावेशी संवृद्धि के चार मुख्य स्तंभ (Four Core Pillars)
1.उत्पादक रोजगार व आर्थिक अवसर (Productive Employment & Opportunities):
•केवल परिसंपत्तियों का पुनर्वितरण पर्याप्त नहीं है; लोगों को अर्थपूर्ण, गरिमापूर्ण और उच्च उत्पादकता वाला रोजगार मिलना चाहिए।
2.मानव क्षमता निर्माण (Human Capacity Building):
•गुणवत्तापूर्ण प्राथमिक व उच्च शिक्षा, व्यावसायिक प्रशिक्षण तथा बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं (Health & Sanitation) तक सर्वसुलभ पहुँच।
3.सामाजिक सुरक्षा कवच (Social Safety Nets):
•असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों, वृद्धों, विधवाओं व आपदा से प्रभावित आबादी हेतु पेंशन, बीमा तथा खाद्य सुरक्षा (जैसे- NFSA, PM-KISAN)।
4.सुशासन एवं संस्थागत सशक्तिकरण (Good Governance & Institutional Reforms):
•भ्रष्टाचार मुक्त पारदर्शी वितरण प्रणाली, विकेंद्रीकरण (पंचायती राज) और त्वरित न्याय प्रणाली।
2. असमानता, गरीबी और रोजगार के आयाम (Inequality, Poverty & Employment)
2.1 असमानता का मापन (Measuring Inequality)
समावेशी संवृद्धि का सबसे बड़ा बाधक आय एवं संपत्ति की विषमता (Income & Wealth Inequality) है।
(A) लॉरेंज वक्र (Lorenz Curve)
•लॉरेंज वक्र आय के वास्तविक वितरण को दर्शाता है।
•निरपेक्ष समता रेखा (Line of Absolute Equality): 45-डिग्री की वह रेखा जो यह दर्शाती है कि समाज में जनसंख्या का X% हिस्सा राष्ट्रीय आय का ठीक X% भाग प्राप्त करता है।
•लॉरेंज वक्र निरपेक्ष समता रेखा से जितना दूर (नीचे) होगा, असमानता उतनी ही अधिक होगी।
(B) गिन्नी गुणांक (Gini Coefficient)
•लॉरेंज वक्र और निरपेक्ष समता रेखा के बीच के क्षेत्रफल का गणितीय अनुपात।
$ ext{Gini Coefficient} = rac{ ext{लॉरेंज वक्र और समता रेखा के बीच का क्षेत्रफल}}{ ext{समता रेखा के नीचे का कुल क्षेत्रफल}}$
•मान की सीमा: 0 से 1 (या 0% से 100%)।
•0 = पूर्ण समानता (Perfect Equality)
•1 = पूर्ण असमानता (Perfect Inequality - संपूर्ण आय केवल 1 व्यक्ति के पास)
आय की ▲
प्रतिशत │ / निरपेक्ष समता रेखा (45°)
मात्रा │ /
│ / क्षेत्रफल A (असमानता का माप)
│ / ───┐
│ / │ लॉरेंज वक्र (Lorenz Curve)
│ / .┘
│ / क्षेत्रफल B
└────────────────────────►
0 जनसंख्या की प्रतिशत मात्रा
(C) पाल्मा अनुपात (Palma Ratio)
•समाज के सबसे अमीर 10% आबादी के कुल आय अंश की तुलना सबसे गरीब 40% आबादी के कुल आय अंश से करता है।
$ ext{Palma Ratio} = rac{ ext{शीर्ष 10% जनसंख्या की आय}}{ ext{निचली 40% जनसंख्या की आय}}$
2.2 बहुआयामी गरीबी (Multidimensional Poverty Index - MPI)
पारंपरिक रूप से गरीबी का मापन केवल उपभोग व्यय या आय के आधार पर किया जाता था। परंतु समावेशी विकास में गरीबी को बहुआयामी वंचना (Multidimensional Deprivation) के रूप में देखा जाता है।
नीति आयोग का राष्ट्रीय बहुआयामी गरीबी सूचकांक (National MPI Framework):
राष्ट्रीय MPI में 3 आयाम (Dimensions) और 12 सूचक (Indicators) शामिल हैं:
1.स्वास्थ्य (Health - 1/3 भार):
•बाल एवं किशोर मृत्यु दर (Child & Adolescent Mortality)
•प्रसव पूर्व देखभाल (Maternal Health)
2.शिक्षा (Education - 1/3 भार):
•स्कूली शिक्षा के वर्ष (Years of Schooling)
•स्कूल में उपस्थिति (School Attendance)
3.जीवन स्तर (Standard of Living - 1/3 भार):
•खाना पकाने का ईंधन (Cooking Fuel)
•पीने का पानी (Drinking Water)
•बैंक खाता (Bank Account)
2.3 रोजगारहीन संवृद्धि एवं असंगठित क्षेत्र (Jobless Growth & Informalization)
(A) रोजगारहीन संवृद्धि (Jobless Growth)
•जब जीडीपी की संवृद्धि दर ऊँची हो, परंतु अर्थव्यवस्था में नए रोजगार के अवसरों का सृजन उस अनुपात में न हो सके।
•सेवा क्षेत्र (Services Sector) आधारित जीडीपी वृद्धि, जो पूँजी व कौशल-गहन (Skill-intensive) है।
•विनिर्माण (Manufacturing) क्षेत्र की सुस्ती एवं स्वचालन (Automation/AI) का बढ़ता प्रभाव।
•कृषि क्षेत्र से अधिशेष श्रम का गैर-कृषि क्षेत्रों में समुचित समायोजन न होना।
(B) श्रम बल सहभागिता दर (Labor Force Participation Rate - LFPR)
•काम कर रहे या काम की तलाश कर रहे कुल कार्यशील आयु (15-59 वर्ष) के व्यक्तियों का प्रतिशत।
$ ext{LFPR} = rac{ ext{रोजगारयुक्त व्यक्ति + बेरोजगार व्यक्ति}}{ ext{कुल कार्यशील जनसंख्या (15-59 वर्ष)}} imes 100$
3. वित्तीय समावेशन (Financial Inclusion)
3.1 वित्तीय समावेशन की अवधारणा व लाभ
वित्तीय समावेशन (Financial Inclusion) का अर्थ है समाज के वंचित, निम्न आय वर्ग और दुर्गम क्षेत्रों के निवासियों को वहनीय लागत (Affordable Cost) पर निष्पक्ष एवं पारदर्शी तरीके से मूलभूत वित्तीय सेवाएँ (बचत खाता, ऋण, बीमा, पेंशन, भुगतान माध्यम) उपलब्ध कराना।
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│ वित्तीय समावेशन के तीन स्तर (Pillars) │
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│
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▼ ▼ ▼
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│ अभिगम्यता │ │ उपयोगिता │ │ गुणवत्ता │
│ (Access) │ │ (Usage) │ │ (Quality) │
└───────────┘ └───────────┘ └───────────┘
वित्तीय समावेशन के मुख्य लाभ:
1.बचत का संग्रहण व पूँजी निर्माण: असंगठित बचत को बैंकिंग तंत्र में लाकर निवेश हेतु उपलब्ध कराना।
2.महाजनों (Money Lenders) के शोषण से मुक्ति: सस्ते एवं संस्थागत ऋण की उपलब्धता।
3.वित्तीय संप्रभुता व सशक्तिकरण: प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) के माध्यम से बिचौलियों का उन्मूलन।
3.2 JAM त्रिमूर्ति एवं डिजिटल वित्तीय अवसंरचना
भारत में डिजिटल वित्तीय समावेशन का मूल आधार JAM त्रिमूर्ति (Jan Dhan - Aadhaar - Mobile) है।
•J - जन धन योजना (PMJDY): शून्य शेष (Zero Balance) पर बेसिक बचत बैंक जमा (BSBD) खाता।
•ओवरड्राफ्ट सुविधा (₹10,000 तक)
•रुपे (RuPay) डेबिट कार्ड व दुर्घटना बीमा।
•A - आधार (Aadhaar): डिजिटल पहचान पत्र, जिसने e-KYC की लागत को अत्यधिक कम कर दिया।
•M - मोबाइल (Mobile): UPI (Unified Payments Interface) एवं भारत क्यूआर के माध्यम से त्वरित, निर्बाध भुगतान।
3.3 विशेष बैंकिंग संस्थाएँ एवं प्राथमिकता क्षेत्रक ऋणदान (PSL)
(A) भुगतान बैंक (Payment Banks)
•सिफारिश: नचिकेता मोर समिति (Nachiket Mor Committee)।
•प्रति ग्राहक ₹2 लाख तक की जमा स्वीकार कर सकते हैं।
•ऋण (Loans) या क्रेडिट कार्ड जारी नहीं कर सकते।
•एटीएम/डेबिट कार्ड, नेट बैंकिंग व प्रेषण (Remittance) सेवाएँ दे सकते हैं।
•अपनी जमा राशि का 75% सरकारी प्रतिभूतियों (G-Secs) में SLR के रूप में रखना अनिवार्य है।
(B) लघु वित्त बैंक (Small Finance Banks - SFBs)
•ऋण प्रदान कर सकते हैं तथा जमा स्वीकार कर सकते हैं।
•अपने कुल समायोजित निवल बैंक ऋण (ANBC) का 75% प्राथमिकता क्षेत्रक (PSL) को देना अनिवार्य है।
•कम से कम 50% ऋण ₹25 लाख से कम के होने चाहिए।
(C) प्राथमिकता प्राप्त क्षेत्रक ऋणदान (Priority Sector Lending - PSL)
आरबीआई के नियमानुसार, वाणिज्यिक बैंकों को अपने ANBC का निश्चित प्रतिशत प्राथमिकता प्राप्त क्षेत्रों को देना होता है:
•भारतीय वाणिज्यिक बैंक / विदेशी बैंक (20+ शाखाएँ): ANBC का 40%।
•लघु वित्त बैंक (SFB): ANBC का 75%।
•क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक (RRB): ANBC का 75%।
•प्रमुख PSL क्षेत्र: कृषि, एमएसएमई (MSME), निर्यात ऋण, शिक्षा, आवास, सामाजिक अवसंरचना, नवीकरणीय ऊर्जा, और कमजोर वर्ग (Weak Sections)।
3.4 स्व-सहायता समूह (SHG)-बैंक लिंकेज मॉडल
•अवधारणा: निर्धन महिलाओं (10-20 सदस्य) का अनौपचारिक समूह जो छोटी-छोटी बचतें एकत्रित करता है और आपस में ऋण देता है।
•महिला सशक्तिकरण एवं सामाजिक नेतृत्व क्षमता में सुधार।
•बैंकिंग तंत्र हेतु अति-निम्न एनपीए (NPA) दर।
•लखपति दीदी योजना: 3 करोड़ ग्रामीण महिलाओं को सूक्ष्म-उद्यमी बनाने का लक्ष्य।
4. लैंगिक एवं सामाजिक समावेशन (Gender & Social Inclusion)
4.1 जेंडर बजटिंग (Gender Budgeting)
जेंडर बजटिंग का अर्थ महिलाओं के लिए अलग से नया बजट बनाना नहीं है, बल्कि सरकार के संपूर्ण बजट का लैंगिक दृष्टिकोण से विश्लेषण करना है ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि बजट का लाभ महिलाओं और पुरुषों तक न्यायसंगत रूप से पहुँचे।
जेंडर बजटिंग स्टेटमेंट के दो भाग:
•भाग A (Part A): ऐसी योजनाएँ जिनमें 100% आवंटन विशेष रूप से महिलाओं/बालिकाओं के लिए समर्पित है (उदा.- सुकन्या समृद्धि योजना, सुरक्षित मातृत्व योजना)।
•भाग B (Part B): ऐसी योजनाएँ जिनमें कम से कम 30% से 99% तक आवंटन महिलाओं के लिए निर्धारित है (उदा.- पीएम आवास योजना, मनरेगा)।
4.2 महिला श्रम बल सहभागिता एवं देखभाल अर्थव्यवस्था (Care Economy)
(A) महिला श्रम बल सहभागिता दर (FLPR) की चुनौतियाँ:
•यू-आकार वक्र (U-Shaped Curve): जैसे-जैसे पारिवारिक आय बढ़ती है, महिला सहभागिता शुरू में घटती है (सामाजिक प्रतिष्ठा के कारण) और उच्च शिक्षा/तकनीक प्राप्त होने के बाद पुनः बढ़ती है।
•अवैतनिक देखभाल कार्य (Unpaid Care Work): महिलाओं द्वारा घरेलू कार्यों, बच्चों व वृद्धों की देखभाल में बिताया गया समय राष्ट्रीय आय (GDP) में नहीं गिना जाता।
(B) सुधारात्मक उपाय:
•मातृत्व लाभ (संशोधन) अधिनियम, 2017: 26 सप्ताह का सवेतन मातृत्व अवकाश।
•पालना घर (Crèche) सुविधा: 50 या अधिक कर्मचारियों वाले संस्थानों में अनिवार्य।
•सुरक्षित कार्यस्थल व रात्रिकालीन परिवहन सुरक्षा।
4.3 वंचित वर्गों का समावेशन (Social Inclusion of Vulnerable Groups)
1.अनुसूचित जाति (SC) एवं अनुसूचित जनजाति (ST):
•स्टैंड-अप इंडिया (Stand-Up India) योजना (₹10 लाख से ₹1 करोड़ तक का हरित ऋण)।
•वन धन विकास केंद्र (VDVK) - जनजातीय उत्पादों का मूल्य संवर्धन (Value Addition)।
•सुगम्य भारत अभियान (Accessible India Campaign)।
•सार्वजनिक भवनों व परिवहन में बाधा-रहित अवसंरचना।
3.वृद्धजन (Senior Citizens):
•अटल वयो अभ्युदय योजना (AVYAY), राष्ट्रीय वयोश्री योजना।
•रजत अर्थव्यवस्था (Silver Economy) का संवर्धन।
5. समावेशी संवृद्धि के समक्ष प्रमुख चुनौतियाँ (Major Bottlenecks)
┌─────────────────────────────────────┐
│ समावेशी संवृद्धि की प्रमुख बाधाएँ │
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│
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│ क्षेत्रीय ││ डिजिटल │ │ कौशल व │ │ कृषि क्षेत्र│ │ असंगठित │
│ विषमता ││ विभाजन │ │ शिक्षा अंतराल│ │ की सुस्ती │ │ क्षेत्रक │
└──────────────┘└──────────────┘ └──────────────┘ └──────────────┘ └──────────────┘
1.क्षेत्रीय विषमताएँ (Regional Disparities):
•भारत के पश्चिमी व दक्षिणी राज्यों (महाराष्ट्र, तमिलनाडु, गुजरात) की तुलना में पूर्वी व मध्य राज्यों (बिहार, ओडिशा, उत्तर प्रदेश) में औद्योगिक व ढांचागत विकास की गति धीमी है।
2.डिजिटल विभाजन (Digital Divide):
•शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों के बीच इंटरनेट कनेक्टिविटी, डिजिटल साक्षरता और स्मार्टफोन की उपलब्धता में बड़ा अंतर।
3.कौशल एवं गुणवत्ता अंतराल (Skill & Quality Deficit):
•वार्षिक शिक्षा स्थिति रिपोर्ट (ASER) के अनुसार, प्राथमिक शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार की भारी आवश्यकता।
•भारतीय स्नातकों की रोजगार-योग्यता (Employability) का कम होना।
4.कृषि क्षेत्र की कम उत्पादकता:
•45%+ श्रम बल कृषि में संलग्न है, परंतु जीडीपी में योगदान केवल ~16-18% है। इससे 'प्रच्छन्न बेरोजगारी' (Disguised Unemployment) जन्म लेती है।
6. सरकारी पहलें एवं भावी रणनीति (Government Framework & Way Forward)
6.1 प्रमुख लक्षित कार्यक्रम (Key Targeted Programs)
| क्षेत्रक | प्रमुख सरकारी योजना/पहल | समावेशन का उद्देश्य |
|---|
| खाद्य सुरक्षा | राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (NFSA) / PM-GKAY | 80 करोड़ से अधिक आबादी को रियायती/निःशुल्क खाद्यान्न। |
| ग्रामीण रोजगार | महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (MGNREGA) | 100 दिनों का अकुशल शारीरिक रोजगार अधिकार। |
| स्वास्थ्य सुरक्षा | आयुष्मान भारत (PM-JAY) | प्रति परिवार ₹5 लाख का द्वितीयक व तृतीयक स्वास्थ्य बीमा। |
| आवास | प्रधानमंत्री आवास योजना (PMAY - ग्रामीण व शहरी) | पक्के मकानों का आवंटन (प्राथमिकता महिला स्वामित्व को)। |
| वित्तीय सहायता | पीएम-किसान (PM-KISAN) | छोटे व सीमांत किसानों को ₹6,000/वर्ष की प्रत्यक्ष आय सहायता। |
| क्षेत्रीय विकास | आकांक्षी जिला कार्यक्रम (Aspirational Districts Programme) | देश के 112 सबसे पिछड़े जिलों का त्वरित कायाकल्प। |
6.2 भावी रणनीति (Way Forward / Roadmap)
1.श्रम-गहन विनिर्माण (Labor-Intensive Manufacturing) को बढ़ावा:
•टेक्सटाइल, लेदर, फ़ुटवियर, खाद्य प्रसंस्करण (Food Processing) जैसे क्षेत्रों में एमएसएमई को विशेष प्रोत्साहन देना।
2.मानव पूँजी में सामाजिक निवेश (Social Sector Spending):
•शिक्षा पर व्यय को जीडीपी के 6% तथा स्वास्थ्य व्यय को जीडीपी के 2.5% तक पहुँचाना।
3.प्रभावी विकेंद्रीकरण एवं पंचायती राज का सशक्तिकरण:
•'3-D Framework' (Functions, Functionaries, Funds) का पूर्ण क्रियान्वयन।
4.डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI) का विस्तार:
•ओएनडीसी (ONDC) और अकाउंटेबल एग्रीगेटर फ्रेमवर्क के जरिए सूक्ष्म-उद्यमियों व रेहड़ी-पटरी वालों को सस्ता ऋण व बाजार उपलब्ध कराना।
7. UPSC परीक्षा विशेष मॉड्यूल (UPSC Exam Special Module)
7.1 प्रीलिम्स त्वरित पुनरीक्षण बिंदु (Quick Prelims Revision Facts)
•गिन्नी गुणांक (Gini Coefficient): यदि मान 0 की ओर बढ़ता है तो समानता बढ़ती है; यदि 1 की ओर बढ़ता है तो असमानता बढ़ती है।
•नचिकेता मोर समिति: भुगतान बैंकों (Payment Banks) की स्थापना से संबंधित।
•उषा थोराट समिति: लघु वित्त बैंकों (Small Finance Banks) के नियमन से संबंधित।
•राष्ट्रीय MPI (नीति आयोग): इसमें 3 आयाम और 12 संकेत शामिल हैं (अंतर्राष्ट्रीय MPI के 10 संकेतकों की तुलना में इसमें 'मातृ स्वास्थ्य' और 'बैंक खाता' अतिरिक्त जोड़े गए हैं)।
•PSL लक्ष्य: सभी वाणिज्यिक बैंकों हेतु 40%, जबकि क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों (RRB) व लघु वित्त बैंकों (SFB) हेतु 75%।
•भुगतान बैंक नियम: जमा स्वीकार कर सकते हैं (₹2 लाख तक), परंतु ऋण नहीं दे सकते और न ही क्रेडिट कार्ड जारी कर सकते हैं।
7.2 मेन्स उत्तर-लेखन मॉडल ढाँचा (Mains Answer Writing Frameworks)
प्रश्न 1: "संवृद्धि के बिना समावेशन असंभव है, और समावेशन के बिना संवृद्धि टिकाऊ नहीं है।" इस कथन के प्रकाश में भारत में समावेशी विकास की रणनीतियों का आलोचनात्मक विश्लेषण कीजिए। (15 अंक, 250 शब्द)
📝 उत्तर का विश्लेषणात्मक ढाँचा (Analytical Blueprint):
1.भूमिका (Introduction - 30 शब्द):
•समावेशी संवृद्धि की परिभाषा से शुरुआत करें।
•उल्लेख करें कि संवृद्धि (Growth) 'पाइ का आकार बढ़ाना' है, जबकि समावेशन (Inclusion) 'पाइ का न्यायोचित बंटवारा' है।
2.मुख्य भाग 1: "संवृद्धि के बिना समावेशन असंभव क्यों है?" (Main Body Part 1 - 60 शब्द):
•जब तक जीडीपी का आकार नहीं बढ़ेगा, सरकार के पास कल्याणकारी योजनाओं (निःशुल्क स्वास्थ्य, शिक्षा, DBT) हेतु वित्तीय संसाधन (कर राजस्व) उपलब्ध नहीं होंगे।
•संसाधनों के सृजन हेतु उच्च आर्थिक संवृद्धि प्राथमिक शर्त है।
3.मुख्य भाग 2: "समावेशन के बिना संवृद्धि टिकाऊ क्यों नहीं है?" (Main Body Part 2 - 70 शब्द):
•अत्यधिक असमानता से उपभोक्ता मांग में गिरावट आती है (चूँकि गरीब आबादी की उपभोग प्रवृत्ति ऊँची होती है)।
•सामाजिक असंतोष, अपराध और राजनीतिक अस्थिरता उत्पन्न होती है जो लंबे समय में निवेश माहौल को नष्ट करती है।
•मानव पूँजी (शिक्षा/स्वास्थ्य) में निवेश के बिना उत्पादकता में वृद्धि नहीं हो सकती।
4.मुख्य भाग 3: भारत के समक्ष चुनौतियाँ एवं सुधारात्मक पहलें (Challenges & Initiatives - 60 शब्द):
•चुनौतियाँ: 'रोजगारहीन संवृद्धि', असंगठित क्षेत्र का वर्चस्व, ग्रामीण-शहरी विभाजन।
•पहलें: JAM त्रिमूर्ति, आकांक्षी जिला कार्यक्रम, आयुष्मान भारत, पीएम-गतिशक्ति।
5.निष्कर्ष (Conclusion - 30 शब्द):
•'संवृद्धि बनाम समावेशन' के बजाय 'समावेशी संवृद्धि' का एकीकृत दृष्टिकोण अपनाना होगा।
•नीति आयोग के "सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास, सबका प्रयास" के संकल्प को दोहराते हुए सकारात्मक निष्कर्ष दें।
प्रश्न 2: "क्या केवल बैंक खाता खोल देना ही वास्तविक वित्तीय समावेशन है?" भारत में वित्तीय समावेशन की सफलता और विद्यमान बाधाओं का मूल्यांकन कीजिए। (10 अंक, 150 शब्द)
📝 उत्तर का विश्लेषणात्मक ढाँचा (Analytical Blueprint):
1.भूमिका (Introduction - 25 शब्द):
•पीएम जन धन योजना (PMJDY) की सफलता (50 करोड़+ खाते) का उल्लेख करते हुए उत्तर शुरू करें।
2.मुख्य भाग 1: खाता खोलने से आगे वास्तविक समावेशन के मापदंड (Beyond Bank Accounts - 50 शब्द):
•वित्तीय समावेशन में 3 'A' शामिल हैं: Access (अभिगम्यता), Availability (उपलब्धता), and Affordability (वहनीयता)।
•वास्तविक समावेशन का अर्थ है: खातों का सक्रिय उपयोग (Active Usage), सस्ती संस्थागत साख (Credit), दुर्घटना व जीवन बीमा, तथा वृत्ति पेंशन तक पहुँच।
3.मुख्य भाग 2: विद्यमान बाधाएँ व चुनौतियाँ (Key Obstacles - 45 शब्द):
•निष्क्रिय खाते (Dormant Accounts): वित्तीय साक्षरता की कमी के कारण अनेक खातों में शून्य या न्यूनतम लेन-देन।
•क्रेडिट गैप (Credit Gap): छोटे किसानों व एमएसएमई को आज भी अनौपचारिक महाजनों पर निर्भर रहना पड़ता है।
•डिजिटल व साइबर धोखाधड़ी: साइबर साक्षरता का अभाव।
4.निष्कर्ष (Conclusion - 30 शब्द):
•वित्तीय साक्षरता (Financial Literacy) को बढ़ाने, बैंकिंग प्रतिनिधियों (Bank Mitras) को सुदृढ़ करने और सूक्ष्म-बीमा उत्पादों को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर बल दें।