Advanced Economy Topics • अध्याय 17

शहरी अर्थशास्त्र, प्रादेशिक विषमताएँ एवं स्थानीय वित्त

शहरी अर्थशास्त्र, शहरीकरण, प्रादेशिक विषमताएँ, संतुलित क्षेत्रीय विकास, शहरी स्थानीय निकायों के वित्त और म्यूनिसिपल सुधारों का उन्नत अध्ययन।

शहरी अर्थशास्त्रप्रादेशिक विषमतास्थानीय वित्तम्यूनिसिपल बॉन्ड
इस अध्याय में
1. अध्याय का परिचय एवं NCERT अंतर्संबंध (Introduction & NCERT Alignment)2. शहरी अर्थशास्त्र एवं शहरी अवसंरचना (Urban Economics & Infrastructure)3. प्रादेशिक विषमताएँ एवं संतुलित क्षेत्रीय विकास (Regional Disparities & Balanced Growth)4. स्थानीय निकाय वित्त एवं म्यूनिसिपल सुधार (Local Public Finance & ULB Finances)5. UPSC परीक्षा विशेष अभ्यास मॉड्यूल (UPSC Exam Special Module)

1. अध्याय का परिचय एवं NCERT अंतर्संबंध (Introduction & NCERT Alignment)

1.1 NCERT मुख्य बिंदु (कक्षा 11वीं एवं 12वीं)

मानव बस्ती एवं आर्थिक भूगोल: कक्षा 12वीं NCERT (मानव भूगोल के मूल सिद्धांत) के अनुसार, शहरीकरण आर्थिक विकास और औद्योगिक परिवर्तन का स्वाभाविक परिणाम है। जैसे-जैसे प्राथमिक क्षेत्र (कृषि) से द्वितीयक (उद्योग) व तृतीयक (सेवा) क्षेत्रों में श्रम का हस्तांतरण होता है, शहरों का निर्माण होता है।
आर्थिक संवृद्धि के इंजन (Engines of Economic Growth): शहर केवल जनसंख्या के केंद्र नहीं हैं, बल्कि ये अग्लोमरेशन इकोनॉमी (Agglomeration Economies) और पैमाने की अर्थव्यवस्था (Economies of Scale) का निर्माण करते हैं, जहाँ नवोन्मेष, पूँजी, और श्रम का संकेंद्रण उत्पादन लागत को घटाता है।
प्रादेशिक विषमता की अवधारणा: कक्षा 11वीं NCERT (भारतीय अर्थव्यवस्था का विकास) के अनुसार, भारत में औपनिवेशिक काल से ही बंदरगाहों और औद्योगिक केंद्रों (जैसे मुंबई, कोलकाता, चेन्नई) के इर्द-गिर्द विकास का असमान संकेंद्रण हुआ, जिसने क्षेत्रीय असंतुलन को जन्म दिया।

2. शहरी अर्थशास्त्र एवं शहरी अवसंरचना (Urban Economics & Infrastructure)

2.1 भारत में शहरीकरण की प्रवृत्ति (Urbanization Trends)

जनसंख्या अनुपात (2011 जनगणना): 2011 की जनगणना के अनुसार भारत की 31.16% जनसंख्या शहरों में निवास करती है। नीति आयोग के अनुमानों के अनुसार 2030 तक यह आँकड़ा 40% तथा 2050 तक 50% से अधिक हो जाएगा।
जीडीपी में योगदान: भारतीय शहर देश के कुल क्षेत्रफल का केवल ~3% हिस्सा घेरते हैं, लेकिन राष्ट्रीय GDP में इनका योगदान लगभग 60-65% है।
शहरीकरण का विकृत मॉडल (Distorted Urbanization): भारत में 'अनप्लांड अर्बनाइजेशन' (अव्यवस्थित शहरीकरण) देखा जा रहा है, जहाँ अवसंरचना के विकास से पहले जनसंख्या का पलायन हो जाता है। इसके परिणामस्वरूप स्लम्स (झुग्गी-झोपड़ी), वायु प्रदूषण, पेयजल संकट, और अर्बन फ्लडिंग (Urban Flooding) जैसी समस्याएँ उत्पन्न हो रही हैं।
[ ग्रामीण से शहरी पलायन ] ──► [ अव्यवस्थित शहरीकरण ] ──► [ बुनियादी सेवाओं पर दबाव ]
                                                                   │
[ अर्बन स्लम & प्रदूषण ] ◄── [ अपर्याप्त म्यूनिसिपल वित्त ] ◄───────┘

2.2 प्रमुख शहरी विकास योजनाएँ व मॉडल

योजना / पहलमुख्य उद्देश्यआर्थिक प्रभाव
स्मार्ट सिटीज मिशन (Smart Cities Mission)100 शहरों का चयन कर 'सस्टेनेबल व समावेशी' विकास करना।IoT, स्मार्ट मोबिलिटी, एकीकृत कमान व नियंत्रण केंद्र (ICCC) द्वारा दक्षता बढ़ाना।
AMRUT (अटल नवीकरण व शहरी परिवर्तन मिशन)500 शहरों में जलापूर्ति, सीवरेज, और हरित स्थानों का विकास करना।जीवन की गुणवत्ता (Ease of Living) में सुधार कर श्रम उत्पादकता बढ़ाना।
PM आवास योजना - शहरी (PMAY-U)'सभी के लिए आवास' (Housing for All) - क्रेडिट लिंक्ड सब्सिडी (CLSS)।निर्माण क्षेत्रक में रोजगार सृजन व एंसिलरी उद्योगों (सीमेंट, स्टील) को बढ़ावा।
GIFT सिटी (गुजरात):भारत का पहला अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय सेवा केंद्र (IFSC)।वैश्विक पूँजी को आकर्षित करना और अपतटीय वित्तीय सेवाओं (Offshore Finance) को भारत लाना।
विशेष आर्थिक क्षेत्र (SEZ):निर्यात-उन्मुख औद्योगिक मिनी-शहर।प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) और रोजगार सृजन।

3. प्रादेशिक विषमताएँ एवं संतुलित क्षेत्रीय विकास (Regional Disparities & Balanced Growth)

3.1 प्रादेशिक असंतुलन के कारण

1.
भौगोलिक एवं प्राकृतिक कारक: तटीय व मैदानी राज्यों (जैसे तमिलनाडु, गुजरात, पंजाब) की तुलना में पहाड़ी व भू-आवद्ध (Landlocked) राज्यों में परिवहन लागत अधिक होना।
2.
ऐतिहासिक एवं अवसंरचनात्मक कारक: औपनिवेशिक काल से व्यापारिक बंदरगाहों वाले क्षेत्रों का अधिक विकास।
3.
निजी पूँजी का झुकाव: निजी निवेश उन्हीं राज्यों में जाता है जहाँ बेहतर अवसंरचना, कानून-व्यवस्था, और कुशल श्रम उपलब्ध हो (उदा. दक्षिण व पश्चिमी भारत बनाम पूर्वी व उत्तर-पूर्वी भारत)।

3.2 संतुलित विकास हेतु प्रमुख नीतिगत पहलें

              ┌─── आकांक्षी जिला कार्यक्रम (ADP) - 112 पिछड़े जिले
              │
संतुलित विकास ├─── आकांक्षी ब्लॉक कार्यक्रम (ABP) - 500 पिछड़े ब्लॉक
के उपाय       │
              ├─── PM-DevINE - उत्तर-पूर्व क्षेत्र हेतु अवसंरचना विकास
              │
              └─── वित्त आयोग (Finance Commission) - क्षैतिज कर अंतरण (Horizontal Devolution)
1.
आकांक्षी जिला कार्यक्रम (Aspirational Districts Programme - ADP):
2018 में नीति आयोग द्वारा शुरू। देश के 112 सबसे पिछड़े जिलों का कायाकल्प।
3Cs रणनीति: Convergent (अभिसरण), Collaboration (सहयोग), Competition (प्रतिस्पर्धा - 360-डिग्री रैंकिंग)।
5 मुख्य क्षेत्र: स्वास्थ्य व पोषण (30%), शिक्षा (30%), कृषि व जल संसाधन (20%), वित्तीय समावेशन व कौशल (10%), बुनियादी अवसंरचना (10%)।
2.
आकांक्षी ब्लॉक कार्यक्रम (Aspirational Blocks Programme - ABP):
2023 में ADP की सफलता के आधार पर 500 अति-पिछड़े ब्लॉकों के लिए शुरू किया गया।
3.
PM-DevINE (उत्तर-पूर्व क्षेत्र हेतु प्रधानमंत्री विकास पहल):
100% केंद्रीय क्षेत्र की योजना, उत्तर-पूर्वी राज्यों में अवसंरचना और सामाजिक विकास परियोजनाओं के लिए शत-प्रतिशत वित्तपोषण।

4. स्थानीय निकाय वित्त एवं म्यूनिसिपल सुधार (Local Public Finance & ULB Finances)

4.1 74वाँ संवैधानिक संशोधन अधिनियम (1992)

भाग 9A एवं 12वीं अनुसूची: शहरी स्थानीय निकायों (ULBs - नगर निगम, नगरपालिका, नगर पंचायत) को संवैधानिक दर्जा और 18 कार्यात्मक विषय प्रदान किए गए।
राज्य वित्त आयोग (Article 243-Y): प्रत्येक 5 वर्ष में राज्य के कर राजस्व का स्थानीय निकायों में वितरण हेतु अनुशंसा।

4.2 शहरी स्थानीय निकायों (ULBs) का वित्तीय संकट

RBI की "Report on Municipal Finances" के अनुसार, भारत में ULBs का कुल राजस्व भारत के GDP का केवल ~1% है, जबकि ब्राजील (7%) और दक्षिण अफ्रीका (6%) जैसे विकासशील देशों में यह काफी अधिक है।

[ अति-अल्प राजस्व (~1% GDP) ] ──► [ अनुदानों पर अत्यधिक निर्भरता ] ──► [ अवसंरचना निर्माण में विफलता ]

ULBs के राजस्व के स्रोत:

1.
कर राजस्व (Tax Revenue): संपत्ति कर (Property Tax - सबसे बड़ा स्रोत), मनोरंजन कर, विज्ञापन कर।
2.
गैर-कर राजस्व (Non-Tax Revenue): उपयोगकर्ता शुल्क (User Charges), भवन योजना स्वीकृति शुल्क, व्यापार लाइसेंस शुल्क।
3.
अंतरण (Devolution & Grants): केंद्रीय वित्त आयोग (Article 280) एवं राज्य वित्त आयोग की सिफारिशों पर मिलने वाले अनुदान।
4.
म्यूनिसिपल बॉन्ड्स (Municipal Bonds): पूँजी बाजार से ऋण जुटाना।

4.3 स्थानीय वित्त में आवश्यक सुधार

संपत्ति कर सुधार (Property Tax Reforms): जीआईएस (GIS Mapping) और सेल्फ-असेसमेंट सिस्टम द्वारा संपत्ति कर के कवरेज और वसूली में वृद्धि।
म्यूनिसिपल बॉन्ड्स (Municipal Bonds): SEBI के ढाँचे के तहत पुणे, इंदौर, और बेंगलुरु जैसे नगर निगमों द्वारा जारी बॉन्ड्स। 'क्रेडिट रेटिंग' में सुधार हेतु अमृत (AMRUT) योजना के तहत प्रोत्साहन।
राजकोषीय स्वायत्तता (Fiscal Autonomy): अनुदानों के बजाय अपने स्वयं के राजस्व (Own Source Revenue - OSR) को बढ़ाना।

5. UPSC परीक्षा विशेष अभ्यास मॉड्यूल (UPSC Exam Special Module)

5.1 प्रारंभिक परीक्षा हेतु त्वरित पुनरीक्षण बिंदु (Quick Revision Points)

1.
शहरीकरण अनुपात: 2011 जनगणना के अनुसार भारत की 31.16% आबादी शहरों में रहती है। गोवा सबसे शहरीकृत राज्य (62.2%) है, जबकि हिमाचल प्रदेश में सबसे कम शहरी आबादी (10%) है।
2.
आकांक्षी जिला कार्यक्रम (ADP): नीति आयोग द्वारा संचालित, स्वास्थ्य एवं पोषण (30%) और शिक्षा (30%) को सर्वाधिक भारांश (Weightage) दिया गया है।
3.
म्यूनिसिपल बॉन्ड: भारत में पहला म्यूनिसिपल बॉन्ड 1997 में बेंगलुरु नगर निगम द्वारा जारी किया गया था।
4.
74वाँ संविधान संशोधन: अनुच्छेद 243-W के तहत 12वीं अनुसूची में ULBs को 18 विषय सौंपे गए हैं।
5.
GIFT IFSC: भारत का एकमात्र अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय सेवा केंद्र गांधीनगर (गुजरात) में स्थित है, जिसका नियमन IFSCA (International Financial Services Centres Authority) द्वारा किया जाता है।

5.2 बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQs with Explanations)

प्रश्न 1: नीति आयोग के 'आकांक्षी जिला कार्यक्रम' (ADP) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

1.
इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य पिछड़े जिलों को राज्य के औसत तक लाकर क्षेत्रीय असंतुलन को समाप्त करना है।
2.
इस कार्यक्रम में 'पर्यावरण एवं वानिकी' को सर्वाधिक भारांश (30%) दिया गया है।
3.
इसमें जिलों की प्रगति का मूल्यांकन करने के लिए 'डेल्टा रैंकिंग' (Delta Ranking) प्रणाली का प्रयोग किया जाता है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? (a) केवल 1 और 2 (b) केवल 1 और 3 (c) केवल 3 (d) 1, 2 और 3

उत्तर: (b)
व्याख्या: कथन 1 सही है (ADP का उद्देश्य 112 पिछड़े जिलों का त्वरित कायाकल्प करना है)। कथन 2 गलत है क्योंकि स्वास्थ्य व पोषण (30%) और शिक्षा (30%) को सर्वाधिक भारांश दिया गया है, न कि पर्यावरण को। कथन 3 सही है (मासिक आधार पर सुधार को मापने के लिए डेल्टा रैंकिंग का उपयोग होता है)।

प्रश्न 2: शहरी स्थानीय निकायों (ULBs) के 'म्यूनिसिपल बॉन्ड्स' के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

1.
म्यूनिसिपल बॉन्ड जारी करने के लिए नगर निगम को SEBI के दिशानिर्देशों के तहत क्रेडिट रेटिंग प्राप्त करना अनिवार्य है।
2.
भारत में किसी भी नगर निगम ने अब तक म्यूनिसिपल बॉन्ड जारी नहीं किया है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? (a) केवल 1 (b) केवल 2 (c) 1 और 2 दोनों (d) न तो 1, न ही 2

उत्तर: (a)
व्याख्या: कथन 1 सही है (SEBI के नियमों के अनुसार म्यूनिसिपल बॉन्ड जारी करने हेतु निवेश-ग्रेड क्रेडिट रेटिंग अनिवार्य है)। कथन 2 गलत है क्योंकि बेंगलुरु (1997), अहमदाबाद, पुणे, इंदौर और लखनऊ जैसे कई नगर निगम सफलतापूर्वक म्यूनिसिपल बॉन्ड्स जारी कर चुके हैं।

5.3 मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन ढाँचा (Mains Answer Blueprint)

प्रश्न: "भारतीय शहर राष्ट्रीय आर्थिक संवृद्धि के इंजन हैं, किंतु शहरी स्थानीय निकायों (ULBs) का कमजोर वित्तीय आधार और अव्यवस्थित शहरीकरण इस क्षमता को सीमित कर रहा है।" समालोचनात्मक विश्लेषण कीजिए और आवश्यक सुधारों का सुझाव दीजिए। (250 शब्द)

[ भूमिका (30 शब्द) ]
  └── जीडीपी में शहरों के योगदान (~65%) और 2011 जनगणना (~31.16%) के संदर्भ में शहरों की भूमिका।

[ मुख्य भाग (180 शब्द) ]
  ├── आर्थिक संवृद्धि के इंजन के रूप में शहर (Agglomeration, रोजगार, FDI, सर्विस हब)
  ├── क्षमता को सीमित करने वाले कारक:
  │    ├── वित्तीय संकट: GDP का केवल ~1% राजस्व, संपत्ति कर का खराब कवरेज।
  │    ├── अव्यवस्थित शहरीकरण: स्लम विकास, अर्बन फ्लडिंग, ट्रैफिक जाम, प्रदूषण।
  │    └── प्रशासनिक दुर्बलता: 74वें संशोधन का अधूरा कार्यान्वयन, राज्य सरकारों पर निर्भरता।
  └── आवश्यक सुधार (Way Forward):
       ├── वित्तीय सुधार: GIS-आधारित संपत्ति कर, म्यूनिसिपल बॉन्ड्स का विस्तार, ओएसआर (OSR) में वृद्धि।
       ├── प्रशासनिक: म्यूनिसिपल कैडर का गठन, मेयर का प्रत्यक्ष चुनाव व अधिकार।
       └── अवसंरचनात्मक: गतिशक्ति व समृद्ध शहरों के लिए PPP मॉडल।

[ निष्कर्ष (40 शब्द) ]
  └── 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य के लिए 'सस्टेनेबल व स्मार्ट अर्बनाइजेशन' को राष्ट्रीय प्राथमिकता बनाना अनिवार्य।